व्यंग कहानी “मुरखलाल की मोटरसाइकिल और उसका ब्राह्मणवादी इन्सोरैंस “, व्यंग कहानी है पर सच्चा सबक देती है….बोधिसत्व भाई एस0 प्रेम


bike poojaइन्सुरेंस कंपनी के दफ्तर में खड़े मुरखलाल को समझाना अब मुश्किल होता जा रहा था मैनेजर ने मुरखलाल को अपने केबिन में बुलाया उसे ठंडा पानी पिलाया फिर कहा “देखो बेटा आपकी नई गाडी का एक्सिडेंट हुआ आपने इंस्युरेन्स करवाया था इंस्युरेन्स का यह मतलब तो नहीं की आपकी गलती का पूरा भुगतान हम ही करें ?? दहेज़ में मिले नोट से खरीदी गई बाइक को पहले चलाना तो सीख लेते ?? इंस्युरेन्स के कागजों में साफ साफ लिखा है की दुर्घटना होने पर हुई क्षति का साठ प्रतिशत भुगतान ही हमारी कंपनी कर सकती है आपके द्वारा भरा गया एक साल का प्रीमियम जो कुल ग्यारह सौ रुपयों का है और आपकी गाडी की मरम्मत का कुल खर्च दस हजार का है जिसमे नियमानुसार हम छः हजार रुपये के भुगतान को तैयार हैं इससे ज्यादा हम कुछ नहीं कर सकते है !!”

मेनेजर की बात से मुरखलाल पूरी तरह संतुष्ट नहीं था इसलिए मेनेजर ने उसे समझाने का एक दूसरा उपाय निकाला !

मैनेजर ने मुरखलाल से कहा “चलो तुम्हे पूरे दस हजार चाहिए मैं आपको चार हजार अपनी सैलरी से देता हूँ अब तो ठीक है देखो मैं यहाँ दिन भर मेहनत करता हूँ तुम जैसे विद्वानों से सर खपाता हूँ तब मुझे सैलरी मिलती है इसी एक नौकरी के लिए माँ बाप ने खेत बेच कर मुझे पढ़ाया था लेकिन जब तुमने गाडी खरीदी तब जिस ब्राह्मण से उस गाडी की पूजा करवाई थी वो कहाँ तक पढ़ा था ?

मुरखलाल- पता नहीं

मैनेजर -चलो कोई बात नहीं , यह बताओ की पूजा तुमने क्यों करवाई ? और कितना खर्चा किया??

मुरखलाल- मंगलकामना के लिए , पंडित जी ने कहा था मंगल होगा और 1500 रूपये दक्षिणा लिए बाकी नारियल वैगरह में हजार रूपए अलग से खर्च हुए !!

मैनेजर- कुल हुआ ढाई हजार मतलब तुमने ढाई हजार में मंगल होने की पॉलिसी खरीदी और मंगल नहीं हुआ बल्कि अमंगल हो गया आप गए उस ब्राह्मण नामक धर्म के एजेंट के पास ??  यही रोब जो यहाँ हमारे सामने झाड़ रहे हो वही रॉब उस पंडित पर क्यों नहीं दिखाते ?? हिम्मत नहीं है ?? ग्यारह सौ रूपए भरकर दस हजार का मुआवजा हमसे चाहते हो तब ढाई हजार रूपये लुटवा कर उस ब्राह्मण नामक धर्म के एजेंट के पास से पच्चीस हजार क्यों नहीं छीन लेते ??

जाओ हम तो ईमानदारी से काम करते है भाई , लोगों इंस्युरेन्स करके कंपनी हम जैसे हजारो वर्करों को रोजगार देती है सरकार को टैक्स भी देती है लेकिन तुम जैसों का मंगल करने वाले ब्राह्मणदेवता कितनो को रोजगार दे रहे हैं ??

मुरखलाल समझ चूका था वह चुपचाप वहां से निकल लिया !!

💥प्रेम💥

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