हरिशंकर परसाई – एक पत्र शंकराचार्य के नाम


हरिशंकर परसाई – एक पत्र शंकराचार्य के नाम~~
“मैं तो मतिमंद हूँ, आप जगतगुरु हैं । मुझ मूढ़ को समझाइए कि अपना भगवान् तो हिन्दू पैदा करता है, और ईसाइयों का भगवान् ईसाई पैदा करता है । मुसलमानों का भगवान् मुसलमान पैदा करता है । तो प्रभु, अपना भगवान ही सब आदमी पैदा क्यों नहीं कर लेता ? दूसरे भगवानों को ईसाई, मुसलमान क्यों पैदा करने देता है ? बौद्ध लोग तो भगवान् को नहीं मानते । फिर इन्हें कौन पैदा करता है ? क्या अपना ही भगवान पैदा करता है ? गुरु, ब्राह्मण को तो भगवान पैदा करता है, पर वही क्या कान्यकुब्ज और सरयूपारीण भी पैदा करता है ? मुझे भगवान की लीला समझ में नहीं आती । आपको आती होगी तो यह बताइए कि एक हिन्दू जब मुसलमान हो जाता है, तब उसका भगवान् आपके हुक्म से बदलता है या मुल्ला के ? मुसलमान हिन्दू हो जाता है तो क्या ख़ुदा उसे अपने भगवान् को सौंप देता है । यह कैसे सौंप देता है भगवान् ? भगवान्, बहुत से हिन्दू ईसाई स्त्री से शादी करने लगे हैं । तो जब इनका बच्चा होता है तब उसे हिन्दू-भगवान् पैदा करता है कि ईसाई का भगवान् ? उसकी जाति कौन सा भगवान् तय करता है ? दुनिया में लगभग 300 अलग अलग धर्म और पंथ हैं । इस तरह 300 भगवान् हो गये । इन भगवानों में झगड़ा भी होता होगा । एक भगवान् कहता होगा -इसे तो मैं हिन्दू पैदा करूँगा । दूसरा भगवान् कहता होगा -नहीं, इसे तो मैं ईसाई बनाऊंगा । प्रभु, इन भगवानों में फिर मारपीट भी होती होगी । आपने तो देखी होगी । कैसी होती है वह मारपीट ? और ये भगवान् आपस में कैसी गालियाँ देते हैं । क्या अपने जैसी गालियाँ देते हैं ? पर भगवान् की माँ-बहन तो होती नहीं है । तो किसकी गाली देते होंगे ?”

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