समस्त बहुजन समाज को “भीमा-कोरेगांव क्रांति” शोर्य दिवस (1 जनवरी) कि हार्दिक मंगलकामनाएं….. Team SBMT


चित्र : भीमा कोरेगाव में बहुजनों कि विजय का प्रतीक विजय स्थम्भ Bhima_Koregaon_Victory_Pillar

नेपोलियन बोनापार्ट ने कितना सही कहा था कि ABILITY IS NOTHING WITHOUT OPPORTUNITY-प्रतिभा मौके के बिना कुछ नहीं , ये बात कोरेगाव के युद्ध से साबित होती है|

भारत में अंग्रेज़ी राज़ की स्थापना के विषय में सामान्यतः लोग यह मानते हैं कि अंग्रेज़ के पास आधुनिक हथियार और सेना थी इसलिए उन्होंने आसानी से भारत पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया. लेकिन सच्चाई यह है कि अंग्रेजों ने भारत के राजाओं-महाराजाओं को अंग्रेज़ी सेना से नहीं बल्कि भारतीय सैनिको की मदद से परास्त किया था. अंग्रेजों की सेना में बड़ी संख्या में भर्ती होने वाले ये सैनिक कोई और नहीं बल्कि इस देश के अछूत कहलाने वाले बहुजन लोग थे जो ब्राह्मणवादी राजाओं के जुल्मों से त्रस्त थे |

1 जनवरी 1818 को कोरेगांव के युद्ध में बहुजन महार सैनिकों ने ब्राह्मणवादी पेशवाओं को धूल चटा दी थी. इस ऐतिहासिक दिन को याद करते हुए डॉ बाबासाहेब आंबेडकर प्रतिवर्ष 1 जनवरी को कोरेगांव जाकर उन वीर बहुजनों का नमन किया करते थे.

डॉ आंबेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेस (अंग्रेज़ी) के खंड 12 में ‘द अनटचेबल्स एंड द पेक्स ब्रिटेनिका’ में इस तथ्य का वर्णन किया है, पाठकों के लिए हम इसके संपादित अंश पेश कर रहे हैं:

ब्रिटिशों की भारत की जीत में वर्ष 1757 और 1818 का बड़ा महत्व है.

1757 में ईस्ट इण्डिया कंपनी और बंगाल के नवाब सिराज-उद-दौला के बीच युद्ध हुआ. इसे प्लासी की लड़ाई के नाम से जाना जाता है. यह पहला युद्ध था जिससे अंग्रेजो भारत की भूमि पर अपना अधिकार प्राप्त किया था.

अंग्रजों ने भारत के अन्य भू-भाग पर अधिकार प्राप्त करने के लिए अंतिम युद्ध 1818 में किया, यह कोरेगाँव की लड़ाई थी, जिसके माध्यम से अंग्रेजों ने मराठा साम्राज्य को ध्वंस्त कर भारत में ब्रिटिश राज स्थापित किया. यहाँ 500 महार सैनिकों ने ब्राह्मण/ पेशवा के 28 हजार घुड़सवारों और पैदल सैनिकों की फौज को हराकर देश से पेशवाई का अंत किया|पेशवाई राज ने ही बहुजनों को अछूत बनाकर गले में हांड़ी और कमर में झाड़ू बांड कर रखने का आदेश दिया था|

इन दोनों ही युद्धों में अंग्रेजों की जीत सिर्फ बहुजनों के कारण हुई.

प्लासी की लड़ाई में अंग्रेजी सेना में रॉबर्ट क्लाइव के नेतृत्व में लड़े बहुजन लोग दुसाध (पासवान) थे और कोरेगांव के युद्ध में शामिल बहुजन लोग महार थे. इस तरह ब्रिटिशों के पहले और आखिरी युद्ध दोनों ही में अंग्रेजों को विजय दिलाने वाले लोग बहुजन ही थे.

इतना ही नहीं विद्रोह के समय अंग्रेजों को साथ देनी वाली रेजिमेंट बॉम्बे रेजिमेंट और मद्रास रेजिमेंट थी, जिसमें क्रमशः महार और दक्षिण के पर्रैया थे.

http://en.wikipedia.org/wiki/Battle_of_Koregaon

http://www.neelkranti.com/2013/01/01/%E0%A4%AD%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%81%E0%A4%B5-1-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%80-1818/

koregaon kranti

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