आखरी “जय भीम” कह कर “रोहित वेमुला” आंबेडकर के मिशन के लिए शहीद हो गए| एक्लव्य ये देश शर्मिन्दा हैं दोणाचार्य अभी जिंदा है…..हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के रिसर्च स्कॉलर रोहित वेमुला हमें अफसोस है कि अपनी बात बहरों को सुनाने के लिए आपको मरना पड़ा. आपकी मौत ने इस देश की अंतरात्मा को, जो किसी कोने में दुबकी पड़ी थी, झकझोरने का काम किया है….आपको भी जय भीम ….


rahulएक्लव्य ये देश शर्मिन्दा हैं दोणाचार्य अभी जिंदा है

हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के रिसर्च स्कॉलर रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या का जिन्हें दुख या नाराजगी नहीं है, अगर कोई व्यक्ति ऐसे शोक के क्षणों में भी जाति, धर्म और संस्कृति या नस्ल के बंधनों से ऊपर उठकर सबके साथ मिलकर दुखी नहीं हो सकता, तो मान लीजिए कि वह देश का नागरिक नहीं, किसी कबीले का सदस्य मात्र है. उनका इंसान होना भी शक के दायरे मे है.
क्या आपको अपने आस पास ऐसे लोग नजर आते हैं?

अगर रोहित वेमुला पर शोक मनाने के लिए और नाराजगी जताने सिर्फ दलित बहुजन आगे आते हैं, हाशिमपुरा और भागलपुर दंगों या अखलाक के लिए अगर सिर्फ मुसलमान रोता है, लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार के लिए सिर्फ OBC या दलित दुखी होते हैं, भगाना या खैरलांजी अगर सिर्फ दलित महिलाओं का मुद्दा है, कंधमाल को लेकर शोक मनाने का दायित्व अगर सिर्फ ईसाइयों का है, दांतेवाड़ा का दर्द अगर सिर्फ आदिवासियों को होता है……. तो लोगों का नागरिक बनना तो छोड़िए, इंसान बनना भी पूरा नहीं हुआ है. वे अपने अपने कबीलों के सदस्य हैं, जिन्हें इतिहास ने एक नक्शे के अंदर रहने को मजबूर कर दिया है…..Dilip C Mandal
हमें अफसोस है रोहित वेमुला, कि अपनी बात बहरों को सुनाने के लिए आपको मरना पड़ा. आपकी मौत ने इस देश की अंतरात्मा को, जो किसी कोने में दुबकी पड़ी थी, झकझोरने का काम किया है. लोग धर्म, जाति, भाषा, प्रांत, लिंग जैसे तमाम बंधनों से ऊपर उठकर दुखी हैं, नाराज हैं. पूरे देश में सामूहिक शोक का माहौल है. यहां से कोई अच्छी बात की शुरुआत हो तो बात है. आदमी का इंसान बनना शुरू हो तो बात है. शिक्षा संस्थानों के कत्लगाह बंद हों, तो बात है. द्रोणचार्यों का अंत हो, तो बात है….Dilip C Mandal


आत्महत्या की चिट्ठी लिखते हुए भी अपनी फ़ेलोशिप का हक़ और दोस्त का कर्ज, दोनों याद रखने वाला आदमी आपको कायर लगता है तो आप बहुत बीमार हैं। मौत के वक़्त दोस्तों को ही नहीं दुश्मनों को भी न सताने की बात कहने वाला आदमी आपको कायर लगता है तो आप निरे जातिवादी दोपाया, जिसका कोई इलाज नहीं है। Om Sudha https://www.facebook.com/om.sudha.7?fref=t

 

 

rohit2

आखरी “जय भीम” कह कर “रोहित वेमुला” आंबेडकर के मिशन के लिए
शहीद हो गए, रोहित के क्रिमेशन की प्रतीकात्मक तस्वीर.rahul1

rohit vemula

http://navbharattimes.indiatimes.com/state/other-states/hyderabad/expelled-dalit-scholar-rohith-vemula-commits-suicide-in-university-of-hyderabad/articleshow/50626090.cms

 

http://navbharattimes.indiatimes.com/india/politics-protests-over-hyderabad-students-death/articleshow/50633936.cms

http://www.bbc.com/hindi/india/2016/01/160119_rahulgandhi_rohit_ia?ocid=socialflow_facebook

cartoon in the hindu

 

 

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  1. (वेमुला रोहित की मौत पर )
    !! शम्बूक तुम हर युग में आते रहना
    शम्बूक तुम फिर आ गए नाम रूप बदल कर
    इस बार वेमुला रोहित बन कर आये
    लेकिन ढूंढ ही लिए गए ना
    जैसे मर्यादा पुरुषोत्तम ने
    त्रेता युग में खोज ही लिया था तुम्हें
    भूल गए तुम कि नारद ने राजसभा में क्या कहा था
    याद दिलाऊँ..
    नारद ने कहा था- कोई शूद्र तपस्या कर रहा है
    इसलिए ब्राह्मण बालक की अकाल मृत्यु हुयी है
    त्रेता क्या द्वापर में भी शूद्र का तप निषेध है
    यह भी तो कहा था महर्षि ने
    मर्यादा पुरुषोत्तम ने पुष्पक पर
    चढ़ कर ढूंढ लिया था तुम्हें शैवाल पर्वत पर
    पेड़ पर उल्टे लटक तपस्या करते तुम
    झूठ भी तो नहीं बोले थे
    तुम शूद्र हो ये जानकर श्रीराम ने सिर काट लिया
    त्रेता से कलि काल तक
    तुम बिना सिर के धड़ लिए भटकते ही रहे
    और अब आ गए वेमुला रोहित का नाम धर कर
    लेकिन अब भी तुम्हारी तपस्या
    आँख का काँटा बन गयी उनके लिए
    मूँज की रस्सी बट कर दे दी तुम्हें
    इस बार तुम्हारे वध का दोष भी
    ‘मर्यादा’ की तलवार पर नहीं आने पाये
    इसलिये अपने हाथों ही करो अपना वध
    हे तापस , तुम तब भी
    देवलोक नहीं जा सके
    अब भी लेखक नहीं बन सके
    कार्ल सगान की तरह
    तुम्हें सितारों से प्रेम है न
    तो जाओ वहीँ रहो
    अभी इस धरती पर
    तुम्हारे लिए जगह नहीं बन पायी है
    लेकिन तुम्हें कसम है शम्बूक
    इसी तरह हर युग में आते रहना
    करना तप मनुष्यता के लिए
    किसी से प्रेम करना बिना आहत हुए
    लिखना खूब जितना लिख सको
    बनाना प्रकृति के चित्र
    बच्चों को सुनाना विज्ञान की कहानियां
    शायद किसी युग में ये पृथ्वी
    वैसी बन जाये जैसी तुम्हारे स्वप्न में आती है
    शम्बूक , तुम हर युग में आते रहना।
    साभार- डॉ आरिफ w/ap

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