🌺💐आंतरराष्ट्रिय महीला दिन की शुभ कामना🌺💐अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर गली गली में कार्यक्रम होंगे पर 99% महिलाए भीमराव अम्बेडकर का नाम नही लेगी जिनके प्रयासो की वजह से महिलाओं को धार्मिक गुलामी से आज़ादी मिली सम्मान से जीने के अधिकार मिले, ये अहसानफ़रामोशी है या अज्ञानता …


प्रस्तुत हैं डॉ अम्बेडकर के कुछ कार्टून जो उस समय अख़बारों में छपते थे जब वो महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ रहे थे| डॉ अम्बेडकर को केवल दलितों तक सीमित करना एक षडियंत्र है वो तो असल में समस्त मानवता के उद्धार के मसीहा हैं| आधुनिक भारत के वो आर्किटेक्ट है IMG-20151210-WA0007IMG-20151210-WA0008IMG-20151210-WA0009विश्व में सबसे स्वार्थी महिला कही पायी जाती है तो वो है भारत।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर गली गली में कार्यक्रम होंगे पर 99% महिलाए भीमराव आंबेडकर का नाम नही लेगी। जिनके प्रयासो को चलते

  • 1942 में कामकाजी महिलाओ को मातृत्व अवकाश (maternity leave) का अधिकार मिला।
  • आर्टिकल 14 में लिंगभेद खत्म कर दिया।
  • कानून मंत्री रहते हुए हिन्दू कोड बिल लाके भारतीय महिलाओ को सदियो की गुलामी से मुक्त किया और XXXX द्वारा उस बिल को पास नही करने के कारण इस्तीफा तक दे दिया।
  • डॉ. आंबेडकर, जो मानते थे के किसी भी देश के विकास का आधार उस देश की महिलाओ की सामाजिक स्थिति पे निर्भर करता है।
  • सावित्री फुले का नाम नही लेती जिन्होंने सन् 1850 समय में कंकड़,पत्थर,कीचड़ की मार सहकर
    भी सभी वर्ण की महिलाओ और लड़कियो के लिए स्कुल खोला और पढ़ाया और रुढिवादिओ का संघर्ष भी सहा
  • राजा राम मोहनराय का नाम नही लेगी जिन्होंने सती प्रथा का विरोध किया,
  • लार्ड विलियम बैंटिक का नाम नही लेगी जिन्होंने 1829 में सती प्रथा पर प्रतिबन्ध लगाया।
  • ईश्वर चन्द्र विद्यासागर का नाम नही लेगी जिन्होंने विधवा विवाह के लिए संघर्स किया।

भारत की महीला को ईन महान पूरूषो का नाम तक नही पता। भारतीय महिलाओ को करवा चौथ, व्रत और देवी देवताका नाम बडी आसानीसे आता होगा । उन धर्मग्रंथो के नाम और पठन भी करती होगी जिसने महिलाओ के व्यक्तिगत और सामाजिक विकास को सदियो तक रुँधे रखा, गुलामी के सिवाय कुछ भी नही दिया ।
बात कड़वी है आर सोचने वाली है—-

One thought on “🌺💐आंतरराष्ट्रिय महीला दिन की शुभ कामना🌺💐अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर गली गली में कार्यक्रम होंगे पर 99% महिलाए भीमराव अम्बेडकर का नाम नही लेगी जिनके प्रयासो की वजह से महिलाओं को धार्मिक गुलामी से आज़ादी मिली सम्मान से जीने के अधिकार मिले, ये अहसानफ़रामोशी है या अज्ञानता …

  1. उनका जन्म इसवी सन पूर्व 563 में और शादी 25 उम्र के बाद हुई थी सर
    On Mar 9, 2016 11:30 AM, “SAMAYBUDDHAs Dhamm Deshna” wrote:

    > KSHMTABUDDHA posted: “प्रस्तुत हैं डॉ अम्बेडकर के कुछ कार्टून जो उस समय
    > अख़बारों में छपते थे जब वो महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ रहे थे| डॉ अम्बेडकर
    > को केवल दलितों तक सीमित करना एक षडियंत्र है वो तो असल में समस्त मानवता के
    > उद्धार के मसीहा हैं| आधुनिक भारत के वो आर्किटेक्ट है वि”
    >

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