आधुनिक बुद्ध और भारतवासियों के मसीहा बाबा साहब डॉ आंबेडकर ने जो संविधान बनाया है उसमें जनकल्याणकारी बौद्ध धम्म के पञ्चशील को कानून का ही रूप दे दिया है|


bhagya vidhata sansad me hain
गौतम बुद्ध द्वारा इंसान के जीवन में दुखों के कारणों का अध्ययन किया गया और उन्होंने पाया की ज्यादातर दुखों के केवल पांच ही मूल कारन हैं, जिनकी वजग से दुःख शुरू होता है और बढ़ता ही जाता है, यहीं पांच कारणों से बच कर रहने के जो पांच उसील या नियम या शील बनाए वो विश्व भर में पञ्चशील के नाम से मशहूर हैं|इतना तो आप सभी ने सुन ही रख होगा पर आपको जानकर अच्छा लगेगा की आधुनिक बुद्धा और भारतवासियों के मसीहा बाबा साहब डॉ आंबेडकर ने जो संविधान बनाया है उसमें इन शीलों से प्रेरणा लेकर शील को कानून  का ही रूप दे दिया है|

 

कृपया निम्न पञ्च शील एव उससे जुडी धाराओं पर ध्यान दें आप खुद ही समझ जायेंगे:

 

 

1)पाणातिपाता वेरमनी सीक्खापदम् सम्मादीयामी !
अर्थ (में बिना वजह प्राणि-हिंसा से दूर रहने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ !)
धारा 302.303,304,304ए,304बी,307,308,309,323,324,,326,328,332,333.आदि
,
2)आदिन्नादाना वेरमणाी सिक्खापदम् समादियामी!
अर्थ (मैं चोरी से दूर रहने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ !)
धारा 327,379,380,381,382,384,385,386,392,393,394,395,396,397,398,399 आदि

3)कामेसूमीच्छाचारा वेरमणाी सिक्खापदम् समादियामी!
अर्थ (मैं व्यभिचार से दूर रहने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ !)
धारा 354,355,376,377,509 आदि

4)मुसावादा वेरमणाी सिक्खापदम् समादियामी !
अर्थ (मैं झूठ बोलने से दूर या विरत रहने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ !)
धारा 394,305,306,509 आदि

5)सुरामेरयमज्जपमादठटाना वेरमणाी सिक्खापदम् समादियामी !
, अर्थ (मैं सुरा=पक्की शराब+मेरय=कच्ची शराब, मज्जपमादठटाना=नशीली चीजो के सेवन से विरत रहने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ !)
धारा 510,34,4/13,जुआ एक्ट 8/20 नार्कोटीक्स एक्ट आदि

अतः हर भारतीय को बौद्ध धम्म (धर्म) मानकर अपना जीवन यापन करना ही पड़ेगा

(भारत संवेधानिक तोर पर बुद्ध के धम्म (धर्म) से चलता हें भारत की मुद्रा पर भी अशोक चक्र,अशोक स्तम्भ है)

हर एक भारतीय को यह मालूम हो जाय की बुद्ध और उनका धम्म कितना प्रभावशाली है, कितना मानवतावादी हें !
सब का मंगल सबका हो ।

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