गुजरात में गाये-आतंकी द्वारा दलितों की पिटाई के विरोध में 31-july-2016 को दलित महासम्मेलन हुआ|अहमदाबाद के रास्तो पर 2 लाख से भी ज्यादा लोगो का जन सैलाब देख कर पूरा भारत हैरान रह गया.दलित महासंमेलन मे जितने लोग मैदान मे थे उस से कई ज्यादा लोग बहार सडको से संमेलन को सुन रहे थे,संमेलन मे शामिल लोगो में से 80 % युवा थे….विशाल सोनार व् दिलीप सी मंडल की फेसबुक पोस्ट से साभार


 

dalit mahasammelan gujrat 31july2016 DCM

अहमदाबाद मे दलित महासंमेलन को आखिरी दिन मंजूरी दी गयी और पुर्व निर्धारित जगह मे भी सरकार द्वारा बदलाव करवाया गया. बारिश के चलते थोडी मुश्किलें हुयी मैदान मे कइ जगहो पर पानी भरा हुआ था फिर भी संमेलन मे दलित एकता देखने को मिली

काफी रुकावट के बावजूद संमेलन ने अपना नीर्धारीत लक्ष्यांक बखूबी सिद्ध किया.

अहमदाबाद के रास्तो पर 2 लाख से भी ज्यादा लोगो का जन सैलाब देख कर पूरा गुजरात ही नहीं पूरा देश हैरान रह गया.दलीत महासंमेलन मे जितने लोग मैदान मे थे उस से कई ज्यादा लोग बहार सडको से संमेलन को सुन रहे थे.संमेलन मे सामेल लोगो में से 80 % युवा थे.

संमेलन के कन्विनर श्री जिग्नेश मेवाणी ने अपने धुंवाधार वक्तव्य मे मोदी और आनंदी बेन की मीली भगत सरकार से मांग रखी की आरोपियो को जमानत मिल ना पाये और अगर मिल भी जाये तो उन को पांच जिलों मेसे तडीपार या तो पासा के तहत कार्यवाही हो.

आज ईस इन्साफ की मुहीम मे समस्त हिन्दू समाज में से कोइ हमारे साथ खडा नहीं हुआ है. लगता है सब को गाय के आगे दलित की कोइ हेसीयत नहिं दिख रहि है. हैरानी कि बात तो ये है की ये लोग झूठा दिलासा देने का साहस भी नहीं कर रहे है. ऐसे वक़्त में लगता है क्या वाकई हम हिन्दू हैं ?

परंतु ऐसे समय मे मुस्लिम संस्था (Jamiat-e-Ulema-e-Hind Gujarat,JeUHG) ने हमारे आंदोलन को संपुर्ण रुप से समर्थन दिया है. एडवोकेट श्री पठान सर की अगवाइ मे काफी तादाद मे मुस्लिम समुदाय के लोग भी हमारे संमेलन मे सामेल हुए है. पठान सर ने “कौमवाद/सम्प्रदायवाद मुर्दाबाद” के नारे लगवाये और देश मे अमन और चेन के लिये दलित-मुस्लिम दोस्ती की अहमीयत समजाई. हम इस दोस्ति को नहि भुलेंगे पठान साहब. सलाम है आप को.

सभा मे प्रण लिया गया की कल से मरे हुए पशु नही उठायेंगे और ऐसा करने पे मजबुर कर रहे लोगों पर कडी कार्यवाही हो उस के लिये अपनी आवाज उठायेंगे.

इस “खेल महाकुंभ” की सरकार को लिखीत मे सुचीत किया जायेगा की देश के हर एक गांव और शहर मे हमारे लोगोंको स्वबचाव के लिये लाइसेंसे कुन्ग-फू, मर्शल आर्टस और कराटे की प्रशीक्षा दे ताकी लोग आत्मरक्षा करने मे सक्षम बने. और जातीवादी आतंकवादीओ से लड सके.

संमेलन मे एक ऐतिहासीक कूच का संकल्प भी लिया गया, 5 अगस्त 2016 को अहमदाबाद से उना तक जन जाग्रुती के लिये पद यात्रा निकाली जायेगी और पद यात्रा 15 अगस्त के दिन समाप्त होगी,और स्‍वतंत्रता पर्व को सही मायने मे लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के संकल्प के साथ राष्ट्र ध्वज को उना मे सलामी दी जायेगी.
संमेलन बहोत ही शांतीपुर्ण और एकता के साथ खत्म हुआ है.

पूरा दलित समाज एक है ऐसे प्रण के साथ खत्म हुआ है. आंदोलन की एकता के बारे मे किसी भी प्रकार कि मिडीया प्रयोजीत अफवाह पर ध्यान न दे.

अहमदाबाद मे दलित महासंमेलन को आखिरी दिन मंजूरी दी गयी और पुर्व निर्धारित जगह मे भी सरकार द्वारा बदलाव करवाया गया. बारिश के चलते थोडी मुश्किलें हुयी मैदान मे कइ जगहो पर पानी भरा हुआ था फिर भी संमेलन मे दलित एकता देखने को मिली

काफी रुकावट के बावजूद संमेलन ने अपना नीर्धारीत लक्ष्यांक बखूबी सिद्ध किया.

अहमदाबाद के रास्तो पर 2 लाख से भी ज्यादा लोगो का जन सैलाब देख कर पूरा गुजरात ही नहीं पूरा देश हैरान रह गया.दलीत महासंमेलन मे जितने लोग मैदान मे थे उस से कई ज्यादा लोग बहार सडको से संमेलन को सुन रहे थे.संमेलन मे सामेल लोगो में से 80 % युवा थे.

संमेलन के कन्विनर श्री जिग्नेश मेवाणी ने अपने धुंवाधार वक्तव्य मे मोदी और आनंदी बेन की मीली भगत सरकार से मांग रखी की आरोपियो को जमानत मिल ना पाये और अगर मिल भी जाये तो उन को पांच जिलों मेसे तडीपार या तो पासा के तहत कार्यवाही हो.

आज ईस इन्साफ की मुहीम मे समस्त हिन्दू समाज में से कोइ हमारे साथ खडा नहीं हुआ है. लगता है सब को गाय के आगे दलित की कोइ हेसीयत नहिं दिख रहि है. हैरानी कि बात तो ये है की ये लोग झूठा दिलासा देने का साहस भी नहीं कर रहे है. ऐसे वक़्त में लगता है क्या वाकई हम हिन्दू हैं ?

परंतु ऐसे समय मे मुस्लिम संस्था (Jamiat-e-Ulema-e-Hind Gujarat,JeUHG) ने हमारे आंदोलन को संपुर्ण रुप से समर्थन दिया है. एडवोकेट श्री पठान सर की अगवाइ मे काफी तादाद मे मुस्लिम समुदाय के लोग भी हमारे संमेलन मे सामेल हुए है. पठान सर ने “कौमवाद/सम्प्रदायवाद मुर्दाबाद” के नारे लगवाये और देश मे अमन और चेन के लिये दलित-मुस्लिम दोस्ती की अहमीयत समजाई. हम इस दोस्ति को नहि भुलेंगे पठान साहब. सलाम है आप को.

सभा मे प्रण लिया गया की कल से मरे हुए पशु नही उठायेंगे और ऐसा करने पे मजबुर कर रहे लोगों पर कडी कार्यवाही हो उस के लिये अपनी आवाज उठायेंगे.

इस “खेल महाकुंभ” की सरकार को लिखीत मे सुचीत किया जायेगा की देश के हर एक गांव और शहर मे हमारे लोगोंको स्वबचाव के लिये लाइसेंसे कुन्ग-फू, मर्शल आर्टस और कराटे की प्रशीक्षा दे ताकी लोग आत्मरक्षा करने मे सक्षम बने. और जातीवादी आतंकवादीओ से लड सके.

संमेलन मे एक ऐतिहासीक कूच का संकल्प भी लिया गया, 5 अगस्त 2016 को अहमदाबाद से उना तक जन जाग्रुती के लिये पद यात्रा निकाली जायेगी और पद यात्रा 15 अगस्त के दिन समाप्त होगी,और स्‍वतंत्रता पर्व को सही मायने मे लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के संकल्प के साथ राष्ट्र ध्वज को उना मे सलामी दी जायेगी.
संमेलन बहोत ही शांतीपुर्ण और एकता के साथ खत्म हुआ है.

पूरा दलित समाज एक है ऐसे प्रण के साथ खत्म हुआ है. आंदोलन की एकता के बारे मे किसी भी प्रकार कि मिडीया प्रयोजीत अफवाह पर ध्यान न दे.

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