मोएनजोदारो को यूनेस्को ने बौद्ध स्तूप बताया है.इसका काल निर्धारण लगभग 200 ईस्वी सन् का है. यानी बुद्ध के जन्म के कोई छह सौ साल बाद. अफगानिस्तान में बामियान बुद्ध की विशाल मूर्तियां इसके भी दो सौ साल बाद की हैं. Dilip C Mandal FB post


mohenjodaroयह है मोएनजोदारो की सबसे ऊंची और सभ्य भव्य इमारत. यूनोस्को की साइट पर उसकी यह सुंदर तस्वीर लगी है.

यूनेस्को ने इसे बौद्ध स्तूप बताया है.क्या भारत की स्कूली किताबों में सिंधु घाटी सभ्यता पढ़ाते समय इस स्तूप के बारे में आपने कभी कुछ पढ़ा है?
सच से डरता कौैन है?

यूनेस्को के मुताबिक यह स्तूप बाकी इमारतों के बाद की बनी हुई है. कच्ची ईंट से बनी यह इमारत अब भी अपने मूल स्वरूप में विद्यमान है.

इसका काल निर्धारण लगभग 200 ईस्वी सन् का है. यानी बुद्ध के जन्म के कोई छह सौ साल बाद. अफगानिस्तान में बामियान बुद्ध की विशाल मूर्तियां इसके भी दो सौ साल बाद की हैं.

और हां, मोएनजोदारो में कोई हथियार नहीं मिला है त्रिशूल तो कतई नहीं. न ही घोड़ा होने का कोई संकेत या कोई घोड़े की कोई मूर्ति वगैरह.

यूनेस्को ने यह लिखा है- ”Moenjodaro comprises two sectors: a citadel area in the west where the Buddhist stupa was constructed with unbaked brick over the ruins of Moenjodaro in the 2nd century AD, and to the east, the lower city ruins spread out along the banks of the Indus. Here buildings are laid out along streets intersecting each other at right angles, in a highly orderly form of city planning that also incorporated systems of sanitation and drainage.”

लिंक देखिए – http://whc.unesco.org/en/list/138

 

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