समयबुद्धा पूर्णिमा धम्म संघायन: ये एक जीवन सूत्र है की जिसकी लाठी उसी की भैस होती है | तर्क और कुतर्क या सच और झूठ में वही जीतता है जिसके साथ हिंसा शक्ति खड़ी हो इसीलिए इतिहास वर्तमान और भविष्य भी शक्तिशाली का होता है


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बचपन में स्कूल की कक्षा में जब किसी दबंग छात्र के पास तथ्यों और तर्कों का जवाब नहीं होता था तब वो अपने आत्मस्वाभिमान की रक्षा के लिए हाथापाई मार पीट का इस्तेमाल करके तर्कशील छात्र को चुप करा देता था| ये बचपन के खेल लगते थे पर गौर से देखा जाए तो ये हर लेवल पर हो रहा है, मतलब ये एक जीवन सूत्र है की तर्क और कुतर्क या सच और झूठ में वही जीतता है जिसके साथ हिंसा शक्ति खड़ी हो|

इतिहास वर्तमान और भविष्य भी शक्तिशाली का होता है

इतिहास हमेशा से दो तरह का होता है एक सच्चा इतिहास दूसरा विजेता द्वारा लिखवाया गया इतिहास| इतिहास विजेता ही लिखवाते हैं, जो हार गए मर गए उनके सही और न्यायवादी होने से क्या होता है, विजेता तो खुद को ही सही लिखवाएगा|ऐसे ही महाभारत के “सुयोधन और शुषाशन”, दुर्योधन और दुशाशन नहीं हो गए| इस तरह हम कह सकते हैं की जो इतिहास हम पढ़ते हैं वो सम्पूर्ण नहीं होता, न होता हो न सही जीवन तो फिर भी चल रहा है, मतलब सच्चा इतिहास कुछ भी हो व्याहारिक इतिहास वही है जो विजेता लिखवा जाए| इतना ही नहीं इतिहास में छेड़छाड़ और अपने मन मुताबिक बदलाव दबाव और उभार अदि ये सब राजनीतिक दाव पेच हैं| सबसे बड़ी बात की जो इतिहास राजा का है वही इतिहास प्रजा का कैसे हो सकता है और उसमें भी उस ज़माने की स्त्रियों का इतिहास उसकी तो कोई बात ही नहीं होती| क्या आपके लिए ये समझ पाना बहुत मुश्किल है की हारने वाली पक्ष की महिलाओं की क्या दुर्दशा होती होगी, पर वो सब तो इतिहास से गायब होता है| खेर मतलब साफ़ है इतिहास केवल शक्तिशाली का होता है |

वर्तमान में देखो , अपने चारो और देखो कौन सुखी है, व्यक्तिगत कर्मफल को अगर छोड़ दिया जाए तो आप पाओगे की जो शक्तिशाली है वो ही सुखी है| जो शक्तिशाली कौमे हैं , क्या आपने सुना की किसी ने उनको पीटा, बेइज्जत किया, या न्याय नहीं मिला या बलात्कार की घटना अदि कभी सुना|अपनी गली से लेकर गांव-मोहल्ले से लेकर जिला-राज्ये और देश तक हर जगह केवल उसी की चलती है जो शक्तिशाली हो| अमेरिका की दुनिया में इसलिए नहीं चलती की उसका नाम अमेरिका है बल्कि इसलिए की वो सबसे शक्तिशाली देश है |थाने में एक दलित थानेदार और सवर्ण हवलदार में से किसकी चलती है क्या आपको नहीं पता |मतलब साफ़ है केवल एक व्यक्ति का शक्तिशाली होना काफी नहीं है, उसके पीछे कौन लोग खड़े है मतलब वो किस कौम से आता है उसकी शक्ति से ही व्यक्ति की शक्ति का पता चलता है

ये तो कोई मूर्ख भी समझ सकता है की जिसके पास शक्ति होगी उसके पास ही धन और धरती होगी| मतलब वही अपने भविष्य, और दूसरों के भविष्य का फैसला कर सकता है| प्रकृति जिसे लोग ईश्वर कहते हैं ने सबके लिए ये धरती बनाई थी तब ऐसा क्यों की की कुछ जमीनदर हैं कुछ भूमिहीन मजदूर | सब शक्ति का खेल है | शाशन भी शक्ति के भय से चलता है |

ऐसे में यदि गरीब जनता को कोई गौतम बुद्ध और धम्म के नाम पर अहिंसा का पाठ या सहते जाना पढाये तो मुझे तो ये दबंगों की साजिश लगती है- कमजोर को कमजोर रखने की| यही एकमात्र मामला हैं जहाँ मैं गौतम बुद्ध से सहमत नहीं हूँ, मैंने अपने गौतम बुद्ध के हाथ से भीख का कटोरा छीन के फेक दिया है और उनके एक हाथ में ज्ञान भरी किताब और दुसरे हाथ में हतियार पकड़ा दिया है |मैं ऐसे बुद्ध को मानता हूँ, सम्राट अशोक महान न होते तो गौतम बुद्ध की बात हम तक भी न पहुची होती, सब जानते हैं की सम्राट अशोक की हिंसा शक्ति के कारन उन्हें ब्राह्मणवादी चंड अशोक बुलाया करते थे |

जो जिस भाषा में समझता है उसे उसी भाषा में समझाना पड़ता है, दबंगों के सामने आपका ज्ञान काम न आएगा आपका लट्ठ काम आएगा | नहीं मानते तो आजमा कर देख लो ,कुछ अपवादों का रोना मत रोना, मैं मैजोरिटी केस की बात कर रहा हूँ| आज ही मैं टीवी में बच्चो के कार्टून देखे, उसमे भी वही देवता और राक्षशों का युद्ध, सन्देश यही था की छल से राक्षशों को मार डालो दया न करना|राजा अपने बेटे को तलवार चलना सिखाता है पर किसान हल चलना, तो ये समझना मुश्किल नहीं की किसका क्या भविष्य होगा| मतलब कौन अपने बच्चों की क्या शिक्षा देकर बड़ा कर रह है, वही भविष्य होगा| हमारे लोग कहते हैं क्या आप भी पुरानी बातें लेकर बैठ जाते हैं, टीवी पर राक्षश-देव जैसी बात इनको सही लगती है पर अम्बेडकरवाद पुरानी बात लगती है|मैं जितना सोचता हूँ उतना ही अहसास पक्का होता जाता है की हर व्यक्ति/कौम अपनी दुर्दशा की खुद जिम्मेदार है, दूसरे तो बस मौके का फायदा उठाते हैं|

अब सवाल ये उठता है की शक्ति मिलेगी कैसे, क्या ज्यादा खाने से,क्या ज्यादा कसरत से, क्या ज्यादा पढ़ने से, ये सब तो व्यक्तिगत शक्ति पाने के तरीके हैं| ऐसे बहुत दे शारीरिक और बौद्धिक शक्तिशाली लोगों को आप किसी न किसी की चाकरी करते हुए देखोगे | तो फिर क्या करें? अरे भाई आपको ये समझना होगा की शक्ति दो प्रकार की होती है एक व्यक्तिगत दूसरी संघ (संघटन या कौम) की शक्ति| संगठन शक्ति से राजनीती होती है और ‘राजनीतिक विजेता’ ही तय करता है को किसी का भूत भविष्य और वर्तमान क्या होगा |जैसे जीने के लिए खाना जरूरी है वैसे ही जीने के लिए राजनीती जरूरी है|जो तुमको कहते हैं राजनीती बुरी चीज़ है वही खूब करते हैं,तुम भी खूब करो, करो अगर जीना है तो करो अगर अपना भूत वर्तमान और भविष्य बदलना है तो|

बाबा साहेब ने कहा है की जिसे बढ़ना है उसे लड़ना होगा और जिसे लड़ना है उसे पहले पढ़ना होगा,यहाँ ध्यान दो बाबा साहब में पढ़ना और लड़ना दोनों शब्द कहे हैं |बाबा साहब ने जो भी कुछ हमारे लिए किया उसके पीछे अंग्रेजों की शक्ति का योगदान पहचानना क्या ज्यादा मुश्किल है|

नोट : अकारण हिंसा नहीं करनी चाहिए, अन्यथा पतन निश्चित है, पर जब वक्त आपसे हिंसा की मांग करे तब पीठ दिखाने से भी पतन निश्चित है

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