सावित्री बाई फूले जी के जन्मदिन 3 जनवरी (भारतवासी शिक्षक दिवस) की हार्दिक शुभकामनाएं|इस बात का अहसास GOOGLE.COM को भी है,देखिये गूगल के इस आइकॉन में गुरुमाता की अपने बच्चों के साथ मन को छु लेने वाली छवि, गूगल को बहुत बहुत साधुवाद


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आज भारत की पहले बहुजन शिक्षिका माता सावित्री बाई फूले जी के जन्मदिन 3 जनवरी (भारतवासी शिक्षक दिवस) का अहसास गूगल को भी है, ये और बात है की जिनके लिए इन्होंने काम किया उन लोगों को अहसास न हो, इसीलिए तो इन लोगों का पिछड़ापन नहीं छूट पाता| देखिये गूगल के इस आइकॉन में गुरुमाता की अपने बच्चों के साथ मन को छु लेने वाली छवि, गूगल को बहुत बहुत साधुवाद…जय भीम नमो बुद्धाय

जब राष्ट्रपिता जोतिराव फुले जी और सावित्रीबाई फुले जी ने आंदोलन शुरू किया था तब पूना के ब्राम्हण गालिया बक रहे थे। विरोध कर रहे थे।शुद्र ( ओबीसी),अतिशूद्र( अनुसूचित जाति, जनजाति,घुमन्तु जनजातियाँ ) को ब्राम्हणो की व्यवस्था से आज़ाद करने का काम फुले दाम्पत्य कर रहे थे। आज पढ़े लिखे लोग ही फुले दाम्पत्य के संघर्ष और उद्देश्य को भूल चुके है। जब राष्ट्रपिता जोतिराव फुले जी को किसी ने भी साथ सहयोग नहीं दिया तब सावित्री बाई फुले जी ने दिया। बहुत सालो तक अपने मयके नहीं गयी थी।एक बार गयी तो अपने भाई ने झगड़ा किया और ब्राम्हण दोनों के कार्य के बारे में क्या चिल्लाते है यह बताया तब सावित्री बाई फुले अपने पति को खत लिखकर कहती है कि अब मेरा पूरा यकीन हो गया है कि हम जो कार्य शुद्र अतिशूद्र को जगाने का कर रहे है इसकी चर्चा मेरे मइके तक आयी है हम जल्द ही हमारे लक्ष को देश भर में पूरा करेंगे। ब्राम्हणो का विरोध हो रहा है इसका मतलब हम जित रहे है। ऐसी सोच सावित्री बाई फुले जी की थी। उनका लक्ष के प्रति इतनी कर्मठता की अब भी हमारे समाज को प्रेरित करती है।
माता सावित्रीबाई फुले जी से प्रेरणा लेकर राष्ट्रिय मूलनिवासी महिला संघ की करोडो करोडो महिलाएं आज पूरे देश भर में व्यवस्था परिवर्तन का महान कार्य कर रही है। मूलनिवासी बहुजन और उनका देश विदेशी ब्राम्हणो से आज़ाद होगा यह ख्वाब था राष्ट्रपिता जोतिराव फुले जी और राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले जी का। इसे पूरा करने का आज उनके जयंती पर दृढ़ निश्चय करे!!!

आज देश की पहली महिला शिक्षक, समाज सेविका, कवि और वंचितों की आवाज उठाने वाली सावित्रीबाई ज्‍योतिराव फुले की पुण्यतिथि  है. पेश हैं उनके बारे में दस खास बातें….

1. इनका जन्‍म 3 जनवरी, 1831 में दलित परिवार में हुआ था.

2. 1840 में 9 साल की उम्र में सावित्रीबाई की शादी 13 साल के ज्‍योतिराव फुले से हुई.

3. सावित्रीबाई फुले ने अपने पति क्रांतिकारी नेता ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर लड़कियों के लिए 18 स्कूल खोले. उन्‍होंने पहला और अठारहवां स्कूल भी पुणे में ही खोला.

 4. सावित्रीबाई फुले देश की पहली महिला अध्यापक-नारी मुक्ति आंदोलन की पहली नेता थीं.

5. उन्‍होंने 28 जनवरी 1853 को गर्भवती बलात्‍कार पीडि़तों के लिए बाल हत्‍या प्रतिबंधक गृह की स्‍थापना की.

6. सावित्रीबाई ने उन्नीसवीं सदी में छुआ-छूत, सतीप्रथा, बाल-विवाह और विधवा विवाह निषेध जैसी कुरीतियां के विरुद्ध अपने पति के साथ मिलकर काम किया.

7. सावित्रीबाई फुले ने आत्महत्या करने जाती हुई एक विधवा महिला काशीबाई की अपने घर में डिलवरी करवा उसके बच्चे यशंवत को अपने दत्तक पुत्र के रूप में गोद लिया. दत्तक पुत्र यशवंत राव को पाल-पोसकर इन्होंने डॉक्टर बनाया.

8. महात्मा ज्योतिबा फुले की मृत्यु सन् 1890 में हुई. तब सावित्रीबाई ने उनके अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिये संकल्प लिया.

9. सावित्रीबाई की मृत्यु 10 मार्च 1897 को प्लेग के मरीजों की देखभाल करने के दौरान हुई.

10. उनका पूरा जीवन समाज में वंचित तबके खासकर महिलाओं और दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष में बीता. उनकी एक बहुत ही प्रसिद्ध कविता है जिसमें वह सबको पढ़ने लिखने की प्रेरणा देकर जाति तोड़ने और ब्राह्मण ग्रंथों को फेंकने की बात करती हैं…

जाओ जाकर पढ़ो-लिखो, बनो आत्मनिर्भर, बनो मेहनती

काम करो-ज्ञान और धन इकट्ठा करो

ज्ञान के बिना सब खो जाता है, ज्ञान के बिना हम जानवर बन जाते है

इसलिए, खाली ना बैठो,जाओ, जाकर शिक्षा लो

दमितों और त्याग दिए गयों के दुखों का अंत करो, तुम्हारे पास सीखने का सुनहरा मौका है

इसलिए सीखो और जाति के बंधन तोड़ दो, ब्राह्मणों के ग्रंथ जल्दी से जल्दी फेंक दो.

(मराठी कविता का हिंदी अनुवाद )

http://aajtak.intoday.in/education/story/10-point-about-savitribai-phule-1-802692.html

 

https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%88_%E0%A4%AB%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A5%87

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