अनुसंधान (research) ;- सम्भवत: शाक्यों और कोलियों में रोहिणी नदी के पानी को लेकर झगड़े ही बुद्ध के गृह त्याग का सच था ।


buddh-yuddh-chod-gayeअनुसंधान (research) ;- सम्भवत: शाक्यों और कोलियों में रोहिणी नदी के पानी को लेकर झगड़े ही बुद्ध के गृह त्याग का सच था ।

आज का विषय ;- बौद्ध धम्म साहित्य में विरोधियों ने जबरदस्त मिलावट की है। उदाहरण तैार पर गौतम बुद्ध ने ‘घर त्याग की घटना’ इसका कारन वह कहानी नहीं है जिसमे बुद्ध ने वृद्ध मनुष्य , रोगी और मृत व्यक्ति को देखकर विचलित हो चले थे बल्कि युद्ध को टालने की कोशिश थी |

1 ) ;- माना जाता है कि बुद्ध के गृह त्याग के पीछे वह कहानी है जिसमे बुद्ध ने वृद्ध मनुष्य , रोगी और मृत व्यक्ति को देखकर विचलित हो चले थे और उसी के फ़लस्वरुप उन्होने गृह त्याग किया ।

2 ) ;- यह कितना तर्क संगत लगता है जब कि उनके पिता माँ और उनके राज्य के मंत्री गण स्वयं वृद्ध हो चले थे क्या वह कभी बीमार नही पडे थे।

3 ) ;-कहानी तर्कसंगत नहीं लगती । हाँलाकि इसे ही प्रचलित कहानियों मे माना गया है । डा. भदन्त आनन्द कौसात्यायन के अनुसार त्रिपिटक के किसी भी ग्रन्थ में गृहत्याग के इस कथानक का कहीं उल्लेख नहीं है। फ़िर यह उल्लेख बार – बार क्युं पाया जाता है ।
डा. कौसात्यायन का मत है कि वृद्ध, रोगी और मृत व्यक्ति को देखकर गृहत्याग की मान्यता ‘‘वे अट्टकथाएँ हैं, जिन्हें बुद्धघोष तथा अन्य आचार्यों ने भगवान बुद्ध के एक हजार वर्ष बाद परम्परागत सिंहल अट्टकथाओं का आश्रय ग्रहण कर पाली भाषा में लिखे थे।

अत्त्द्ण्डा भवं जातं , जनं पस्सच मेषकं।
संवेनं कित्त्यिस्सामि यथा संविजितं मया ॥ १ ॥
फ़न्दमानं पजं दिस्वा मच्छे अप्पोदके यथा ।
अज्जमज्जेहि व्यारुद्धे दिस्वा मं भयमाविसि ॥२॥
समन्तसरो लोको, दिसा सब्बा समेरिता ।
इच्छं भवन्मत्तनो नाद्द्सासिं अनोसितं ।
ओसाने त्वेव व्यारुद्धे दिस्वा अरति अहु ॥३॥

4 ) ;-अर्थ :‘‘शस्त्र धारण मतलब – मुझमें वैराग्य मे भय उत्पन्न हुआ अपर्याप्त पानी में जैसे मछलियां छटपटाती हैं वैसे एक-दूसरे से विरोध करके छटपटाने वाली प्रजा को देखकर मेरे मन में भय उत्पन्न हुआ। चारों ओर का जगत असार दिखायी देने लगा सब दिशाएं काँप रही थी ऐसा लगा और उसमें आश्रय का स्थान खोजने पर निर्भय स्थान नहीं मिला, क्योंकि अन्त तक सारी जनता को परस्पर विरुद्ध हुए देखकर मेरा जी ऊब गया।

5 ) ;-महामाया कोलीय वंश की राजकुमारी थीं। मतलब बुद्ध का ननिहाल। घर राज्य त्यागना बुद्ध का (कोलीय वंश ननिहाल) से युद्ध को रोकना।

6 ) ;-संघ ने कोलियों के विरुद्ध युद्ध का प्रस्ताव पारित किया, जिसका सिद्धार्थ गौतम ने विरोध किया।

 

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कुछ कहावतें याद आ गयी

– हाथ पर हाथ धार के बैठे रहने से कुछ नहीं होता, आओ संगर्ष करें
– शांति से वही जी सकते हैं जो युद्ध के लिए तैयार हों
– युद्ध में हार ही किसी भी कौम के दलितीकरण का मुख्य कारन होता है

– अपनी पोल खुद ही उघाड़ना
– कबूतर पर जब बिल्ली हमला करती है तो वो आँखे बंद कर के सोचता है की बिल्ली अब नहीं है

-लातों की देवी बातों से नहीं मानती

 

One thought on “अनुसंधान (research) ;- सम्भवत: शाक्यों और कोलियों में रोहिणी नदी के पानी को लेकर झगड़े ही बुद्ध के गृह त्याग का सच था ।

  1. ईस लेख अच्छा लगा सान्दर्भिक लेख लगा बहुत बहुत आभारी हुँ ।

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