68 वे गणतन्त्र दिवस की बधाई लेकिन हम लोगों को आत्म मंथन की जरूरत है ,भारत का सविधान महज सविधान नही यह बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर की विरासत है,सविधान का सबसे ज्यादा फायदा समाज के दबे कुचले, शोषित, पीड़ित, आदिवासी, पिछड़े, महिला को मिला… एड्वोकेट कुशालचन्द्र


ambedkar-samvidhan sadhye68 वे गणतन्त्र दिवस की बधाई लेकिन
मन्थन करे ??
☸आज से ठीक 68 वर्ष पूर्व भारत एक सवैधानिक भारत बना। भारत के हजारो साल के इतिहास में पहली बार है की भारत एक लिखित सविधान द्वारा शासित हो रहा है।
☸भारत का सविधान महज सविधान नही यह बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर की विरासत है।
☸सविधान लागू होते ही देश में हजारो वर्षो से चली आ रही, रूढ़िवादी और ब्राह्मणवादी परम्पराये तुरन्त ही शून्य हो गयी। एक लाइन में अम्बेडकर ने उन्हें समाप्त कर दिया जो हमे हजारो सालो से गुलाम बनाये रखी थी।
☸सविधान का सबसे ज्यादा फायदा समाज के दबे कुचले, शोषित, पीड़ित, आदिवासी, पिछड़े, महिला को मिला ।
☸समाज के सभी वर्ग वो चाहे महिला हो या पुरुष, हिन्दू हो या मुस्लिम, सिख या ईसाई या बोद्ध सभी समान सवैधानिक रूप से मानवीय अधिकार मिले।।
☸हजारो सालो से शोषित वर्ग को बाबा साहब ने शिक्षा, नोकरी, राजनेतिक आरक्षण और सम्पूर्ण मानवीय अधिकार दिए।।
☸भारत की महिलाओ के लिये बाबा साहब एक मात्र ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने महिला अधिकारो के लिये क्रांतिकारी काम किया ।
☸महिला मताधिकार की मांग अंग्रेजो के सामने रखी और जब सविधान लिखने की बारी आयी तो उन्होंने तुंरत वे सारे अधिकार महिलाओ को दे दिए जिससे वह सदियो से वंचित थी। सभी तरह की समानता का अधिकार।
☸महिला अधिकारो का क्रांतिकारी कानून हिन्दू कोड बिल को पास करने में प्रधानमन्त्री जवाहर लाल नेहरू ने आनाकानी की तो उन्होंने कानून मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।।
☸अब प्रश्न यह उठता है की इतने सारे अधिकारो का हम फायदा तो उठा रहे है लेकिन बदले में हम क्या अदा कर रहे है।
☸हमारी अहसान फरामोश पीढ़ी के कारण हमे मिले आरक्षण और मानवीय अधिकार,  आजादी के बाद निरन्तर कम हो रहे है और आज भी हम सरकार से नोकरी मागने की लाइन में खड़े है अथार्त् हमारे पास और कोई विकल्प नही है जो हमारे मानसिक दिवालियेपन को दर्शाता है।
☸डॉ अम्बेडकर आंदोलन को आज थर्ड और फ़ोर्थ ग्रेड कर्मचारी चला रहे है और फर्स्ट ग्रैड कर्मचारी सरकार का दामाद बना बेठा है।
☸कुछ पढ़े लिखे कर्मचारी मिशन को आगे ले जाने का प्रयास कर रहे है लेकिन वे सफल तब – तक नही हो सकते है जब तक की वे सरकारी नोकर है। हमें इस सन्दर्भ में डॉ अम्बेडकर को पढ़ना चाहिये की, आखीर डॉ अम्बेडकर स्थायी सरकारी दामाद क्यों नही बने।।
☸अगर यही हाल रहा तो बहुत जल्दी भारत में मनुवादियों का सविधान लागू हो जाएगा। आज भारतीय सविधान पर “सविधान के विरोधियो” मनुवादियों, ब्राह्मणवादियों का कब्जा है। अब केवल उत्तरप्रदेश जीतना बाकी है यही यू पी जीता तो आगे का रास्ता तय करने में ज्यादा समय नही लगेगा।।
☸ध्यान रहे कानून को मिटाना तो आसान है लेकिन उसे बनाना बहुत कठिन कार्य है। अब अम्बेडकर पैदा होने वाले नही है। इसका जीता जागता उदाहरण “पदोन्नति आरक्षण” है आज केवल कागजो में दिखाई दे रहा है जो कल तक हमे मिलता था।।
☸हमारे जागने का समय आ गया है हमे सविधान और अपने अधिकारो की रक्षा वेसे ही करनी होगी जेसी हम अपने बच्चों की परवरिश करते है यदि हम तन – मन – धन से नही जुटे तो बाबा साहब द्वारा दिलाये सारे अधिकार ” पदोन्नति आरक्षण” की तरह कागजी बन जायेगे।।
☸हमें हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिये आजादी की लडाई लड़नी होगी अन्यथा वे गुलाम हो जायेगी। इसके लिये हमे बाबा साहब की विरासत अथार्त् हमारी आजादी का दस्तावेज सविधान को बचाना होगा।
☸आज सविधान पर संकट है जो बहुत ही गम्भीर है। हमे जागने और जगाने की जरूरत है।
☸☸☸☸गणतन्त्र दिवस की बहुत बहुत बधाई।
 kushal
कुशालचन्द्र एड्वोकेट
बिरसा फुले अम्बेडकर एसोसिएशन, राजस्थान।
Social and Political Activist🌀🌀🌀🌀
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