बौद्ध धम्म कोई धर्म नहीं हैं दोनों में फर्क है, इस फर्क को समझें बिना आप बौद्ध धम्म के सार को नहीं पा सकते , आईये समझें धम्म क्या है ….facebook page बुद्धकथाएँ


DHAMMA or DHARMAधम्म क्या है ?
धम्म पाली भाषा का एक शब्द है जैसे संस्कृत में धर्म वैसे पाली में धम्म.
परंतु महामानव गौतम बुद्ध का धम्म यह ब्राह्मण धर्म से बिलकुल अलग है ब्राह्मण धर्म आत्मा और परमात्मा पर आधारित है पर बुद्ध का धम्म विज्ञान पर जिस में आत्मा और परमात्मा के आस्तित्व को नकार दिया गया है ,इस लिए कुछ लोग बौद्ध धम्म को नास्तिको का धम्म भी कहते है
धर्म इंसान को देवतो के आस्तित्व को विशवास करने को मजबूर करता है ; पर बुद्ध का धम्म इंसान को आंतरिक मनोबल प्रदान करता है
धम्म मतलब सामाजिक विज्ञान. धम्म मतलब सामाजिक क्रांती. धम्म मतलब सामाजिक बंधुत्व, धम्म मतलब सामाजिक आत्म-सम्मान!
लोग धर्म को मानाने वाले हो सकते है लेकीन धम्म को मानाने वाले नहीं हो सकते क्योंकि धम्म इंसान को विज्ञानवादी बना देता है . धम्म का पालन करने वालो का दिमाग खुल जाता है अर्थात धम्म का पालन करने वाला यह जनता है की क्या उस के लिए अच्छा है और क्या बुरा वो आँख बंद कर किसी किताब का पालन नहीं करता क्यों की बुद्ध ने यह सिखाया ही नहीं है, बुद्ध का धम्म किसी किताब में कैद नहीं है क्यों बुद्ध ने बौद्ध धम्म को मानाने वाले लोगो को कोई किताब नहीं दी जिस से धम्म सीख जाये यह तो बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद संघ ने बुद्ध के उपदेशो को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें किताबो में संगृहीत करने की कोशिश की ,बुद्ध तो यह स्वयंम कहते थे की धार्मिक किताबो में समय के साथ कुछ ऐसे बाते जुड़ जाती है ,जो उस समय के हिसाब से अनुकूल नहीं है या फिर उन्हें किसी के द्वारा स्वयं के लाभ के लिए धार्मिक किताबो में जोड़ दिया गया है ,इस लिए धार्मिक किताब में लिखी हर बात को अपनी बुद्धि से परखो यह है बुद्ध का धम्म, धम्म से नैतिकता पर आधारित समाज की रचना होती है ,धम्म से लोग जागृत होते है,वह अन्याय सहन नहीं करते क्योंकी उन के पास सम्यक दृष्टी होती है बल्कि वह . अन्याय के विरुद्ध लड़ने को तैयार होते है . बंधु-भाव निर्माण होता है . प्रेम-जीव के प्रति. प्रेम का निर्माण होता है और इस प्रेम से समाज संरक्षित होता है
धम्म के कारन लोग समाज के उद्धार के लिए सतर्क और कार्यरत रहते है धम्म का पालन करने वाले लोग हमेशा सामाजिक अभ्यास करते है और जब कभी समता ,स्वतंत्रता और बंधुत्व को कोई तत्व हानि पहुचते है तब वह सम्यक दृष्टि का इस्तेमाल करते हुए बुद्ध के तत्व को समाज में पुनः स्थापित करने के लिए जान लगा देते है
धर्म मतलब धर्म के लिए कुछ भी ,धर्म गर्व रखना सिखाता है ,पूजा पाठ करना सीखता है ,जाति पलना सीखता है ,व्रत सिखाता है ,जो चीज़ जो स्वयंम के स्वार्थ के लिए है वह सब सिखाता है और मनुष्यता तो भुला के केवल धर्म सिखाता है
उसी प्रकार धम्मांधता मतलब बौद्ध-धम्म के लिए कुछ भी करना ,अंद्धश्रद्धालु हो के पुजा-पाठ करना , धम्म तो सीखना पर धम्म का पालन न करना (धम्म को मानते है; धम्म की नही मानते), आपस में भेदभाव करना ,गुटो का निर्माण करना ,स्वयंम के स्वार्थ के लिए समाज को धोखा देना , बौद्ध धम्म पर गर्व करना ,बुद्ध को ईश्वर मान कर उन की पूजा करना ,बौद्ध-धम्म के बारे में जो बुरा बोलता है उस का अज्ञान न मिटा के उस पर प्रहार करना ,किसी दुसरे धर्म के लोगो पर बौद्ध धम्म लादना धम्मांधता है
ऐसा झूठा धम्म या धर्म को पालने वाले स्वयंम को ऊँचा समझते है ,अज्ञानी लोगो को गुलाम समझते है ,उन्हें लगता है की वह धम्म का पालन कर रहे है इस लिए वह महान है ,और जो धम्म का पालन नहीं कर रहे वह मुर्ख है ,ऐसा सोचना समाज के लिए घातक है ,धोखादायी है , अगर तुम धम्म को पालते हो तो दुसरो का अति इस को सहना सीखना होगा उस के लिए पर्यटन करना होगा ,लोगो को खुद को हीन समझने दे कर तुम धम्म का अपमान कर रहे हो,सामाजिक भेदभाव पाल कर तुम धम्म का अपमान कर रहे हो,फिर दूसरे धर्मो में और तुम्हारे धम्म में क्या अंतर है
बौद्ध-धम्म में ऐसा कुछ करना गलत है , . धम्म मतलब बौद्ध लोगो की अस्मिता वह धम्म बदनाम हो ऐसे काम नहीं करने चाहिए
धम्म मनुष्य के लिए है ,मनुष्य धम्म के लिए नहीं है ऐसा बाबा साहेब ने कहा है
बुद्ध ने भी कभी अपना धम्म किसी पर नहीं लादा,पहले उसे खुद पर परखा फिर दुसरो को सिखाया
बौद्ध धम्म तर्क करने लगता है ,समाज के लिए जो सही है वह करना सिखाता है ,समाज का अज्ञान दूर करना है यह बताता है दुसरो को ज्ञानी बनाना यह सिखाता है
समाज के कल्याण के लिए जो कुछ करता है वह धम्म है
बौद्ध धम्म मतलब अन्याय के विरुद्ध लड़ाई ,अधम्म मतलब समाज पर होने वाले अर्थिक, मानसिक, शैक्षणिक और सामाजिक शोषण. इस शोषण के विरुद्ध, या इस अन्याय के विरुद्ध अगर हम नहीं लड़े तो हमारे बौद्ध होने का क्या मतलब ?
धम्म एक वैचारिक लड़ाई है ,. धम्म बताता है बुद्धि की में शरण जा! बुद्धि का उपयोग कर के समाज में क्या बुराई है यह पता चलता है और उस को सुधरने का उपाय भी आता है
. धम्म बताता है की धम्म की शरण में लोक-कल्याण के मार्ग पर चलो . धम्म बताता है संघटित रहो मतलब समाज की रक्षा करो ; न्याय और समता के लिए संघर्ष करो .
“Give a man a Fish, and you feed him for a day; show him how to catch fish, and you feed him for a lifetime”.
इस उक्ति में ही धम्म है ,एक व्यक्ति को आप दान करो वह धर्म है ,लेकिन एक व्यक्ति को उस की आजीविका के लिए कुछ काम सीखना , उस में आत्मविश्वास और स्वाभिमान का निर्माण करना ,उसे जीवन भर भीख न मागते हुए .सम्यक मार्ग पे चलते हुए उस के जीवन भर पेट भरने का प्रबोधन देना यही धम्म है

 

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