फेसबुक पर एक लाख प्लस फोल्लोवेर्स होने पर दिलीप सी मंडल एव समस्त बहुजन भाइयों को हार्दिक मंगलकामनाएं *दिलीप मंडल की जुबानी अपनी कहानी* आप सभी से अनुरोध है की फेसबुक पर वर्तमान मूलविासी गुरु, पत्रकार एव मार्गदर्शक श्री दिलीप सी मंडल को फॉलो या ज्वाइन जरूर करें हर रोज उनके ज्ञानवर्धक वचन आँखें खोलने के लिए काफी हैं https://www.facebook.com/dilipc.mandal


dilip_mandal

आप सभी से अनुरोध है की फेसबुक पर वर्तमान मूलविासी गुरु, पत्रकार एव मार्गदर्शक श्री दिलीप सी मंडल को फॉलो या ज्वाइन जरूर करें   हर रोज उनके ज्ञानवर्धक वचन आँखें खोलने के लिए काफी हैं   https://www.facebook.com/dilipc.mandal

 

https://www.facebook.com/dilipc.mandal

 

 

 

*दिलीप मंडल की जुबानी अपनी कहानी*

आज शायद पहली बार मेरी अपनी कहानी.

जब मैं पत्रकारिता में आया तो हर दिन कम से कम दस अखबार पढ़ता था.

*क्योंकि मेरे नाम के पीछे (सरनेम जो जाति बयां करता है) जो लगा है, उसके साथ अगर मैं अपने साथ वालों से दोगुनी जानकारी न रखता, तो मुझे बराबर का भी न माना जाता.*

बाकी लोग न पढ़कर भी जानकार माने जाने का सुख ले सकते थे.

उनका ज्ञानी होना स्वयंसिद्ध था.

*यह उनके टाइटिल में था. पिता के टाइटिल में था.*

जनसत्ता, कोलकाता में जब मैं काम करता था, तो न्यूज डेस्क पर सबके बराबर काम करता था.

यानी आठ से दस घंटे.

लेकिन इसके अलावा, ऑफिस आने से पहले, मैं हर रोज तीन-चार घंटे की रिपोर्टिंग अलग से करता था.

इसके अलावा ए़डिट पेज के लिए लेख भी लिखता था.

डेस्क के लोग आम तौर पर यह नहीं करते थे.

मैं हर रिपोर्टिंग दिन करता था. मेरा वर्किग आवर औरों से डेढ़ गुना था.

इस वजह से कम सोता था. यह मेरी च्वाइस थीं. वरना, मेरा भी काम सिर्फ ऑफिस वर्क से चल जाता.

*लेकिन मुझे सिर्फ काम नहीं चलाना था. सबके कम उम्र में संपादक बनना था.*

यह सब इसलिए बता रहा हूं कि

*अगर आप SC, ST, OBC हैं तो बाकियों के बराबर होने से काम नहीं चलेगा. औरों से दोगुना तक ज्यादा मेहनत करेंगे, उनसे बेहतर करेंगे, तब कहीं बराबर के माने जाएंगे.*

आपका ज्ञान, आपका पांडित्य स्वयंसिद्ध नहीं है.

*हर दिन उसे साबित करना पड़ेगा. बराबर होने से आपका काम नहीं चलने वाला. आपको ज्यादा करना होगा.*

इंडिया टुडे का पहला मैनेजिंग एडिटर होने के बावजूद, या तमाम शीर्ष पदों पर होने के बावजूद मेरा टैलेंट स्वयंसिद्ध नहीं है.

मीडिया की सबसे पॉपुलर किताब लिखने के बावजूद मेरी प्रतिभा स्वयंसिद्ध नहीं है.

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस के लिए मेरा चैप्टर लिखना भी मुझे टैलेंटेड कहे जाने के लिए काफी नहीं है.

शायद मैं भारत का अकेला संपादक रहा, जिसने प्रिंट, टीवी और वेब तीनों जगह काम किया.

*पढ़ाया, किताबें लिखीं, देश भर की यूनिवर्सिटी में लैक्चर दिए, लेकिन आज भी मुझे अक्सर साबित करना पड़ता है कि मुझे मास कम्युनिकेशन की समझ है.*

इसलिए अब भी मैं नियमित लाइब्रेरी में पाया जाता हूं.

*मुझे आज भी साबित करना पड़ता है कि मुझे अपना काम आता है.*

इससे मेरा कोई नुकसान नहीं हुआ है.

हमेशा अप-टू-डेट रहना पड़ता है. बहुत पढना पड़ता है, तो इसमें समस्या क्य़ा है?

यह तो अच्छी बात है.

है कि नहीं?

*दिलीप सी मंडल की फेसबुक वाल से*

 

chautha khamba dilip mandal

Advertisements

2 thoughts on “फेसबुक पर एक लाख प्लस फोल्लोवेर्स होने पर दिलीप सी मंडल एव समस्त बहुजन भाइयों को हार्दिक मंगलकामनाएं *दिलीप मंडल की जुबानी अपनी कहानी* आप सभी से अनुरोध है की फेसबुक पर वर्तमान मूलविासी गुरु, पत्रकार एव मार्गदर्शक श्री दिलीप सी मंडल को फॉलो या ज्वाइन जरूर करें हर रोज उनके ज्ञानवर्धक वचन आँखें खोलने के लिए काफी हैं https://www.facebook.com/dilipc.mandal

  1. Pingback: आप सभी से अनुरोध है की फेसबुक पर वर्तमान मूलविासी गुरु, पत्रकार एव मार्गदर्शक श्री दिलीप सी मंडल

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s