चुनाव आयोग की वेबसाइट पर आपको भारतीय गणराज्य की गजट घोषणा मिलेगी। हर वोटिंग मशीन के साथ काग़ज़ की पर्ची पर दर्ज वोट सुरक्षित रखना होगा। 2013 का गजट है। उसी साल अक्टूबर में अमल में आया। लेकिन अब तक लागू नहीं हुआ।लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने काग़ज़ की पर्ची डालने और उसे सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था।….EVM repated FB post of Dilip C Mandal


1. चुनाव आयोग की वेबसाइट पर आपको भारतीय गणराज्य की यह गजट घोषणा मिलेगी। हर वोटिंग मशीन के साथ काग़ज़ की पर्ची पर दर्ज वोट सुरक्षित रखना होगा। 2013 का गजट है। उसी साल अक्टूबर में अमल में आया। लेकिन अब तक लागू नहीं हुआ।लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने काग़ज़ की पर्ची डालने और उसे सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था। लेकिन कोई है जो भारतीय लोकतंत्र की जड़ों में मट्ठा डाल रहा है।वह किसी एक पार्टी से बड़ा है।कौन है वह लोकतंत्र का दुश्मन?

2. घोटाला वग़ैरह मैं नहीं जानता। लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार को आदेश है कि चुनाव आयोग को पैसे दे ताकि वह सभी बूथ पर मशीन के साथ काग़ज़ से भी वोट कराए, तो सिर्फ मशीन से वोट क्यों हो रहे हैं। पैसे क्यों नहीं दिए? 2013 का फ़ैसला है।

3. सुप्रीम कोर्ट का 2013 का आदेश है कि हर EVM के साथ पर्ची निकालने की मशीन लगाई जाए। इन पर्चियों को मतपेटी में सुरक्षित रखा जाए ताकि विवाद की स्थिति में वोट दोबारा गिने जा सकें।”From the materials placed by both the sides, we are satisfied that the “paper trail” is an indispensable requirement of free and fair elections. The confidence of the voters in the EVMs can be achieved only with the introduction of the “paper trail”.हर मशीन के साथ पर्ची निकालने पर 13,000 रुपए प्रति मशीन के हिसाब से 1690 करोड़ का ख़र्च आएगा। यह रक़म केंद्र सरकार के लिए कितनी मामूली है इसका अंदाज़ा इस बात से लगाइए कि मुंबई महानगरपालिका का इस साल का बजट 37,000 करोड़ रुपए है। लेकिन केंद्र सरकार ने 1690 करोड़ चुनाव आयोग को नहीं दिए।इसलिए चंद सीटों को छोड़कर पूरे चुनाव सिर्फ EVM पर होते हैं।यह है EVM घोटाला।बाक़ी तो सब लीला है।

4. सुप्रीम कोर्ट का 2013 का फ़ैसला है कि साफ़-सुथरे चुनाव तभी मुमकिन हैं, जब EVM में डाले गए हर वोट की पर्ची को सुरक्षित रखा जाए।यह मशीन और पेपर बैलेट की मिलीजुली व्यवस्था है।इसके लिए केंद्र सरकार से कहा गया कि चुनाव आयोग को रुपए दे।सरकार ने वह रक़म नहीं दी। ये है EVM घोटाला। इसके बाद तो जो है, सो लीला है।सिर्फ मशीन से हुए चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट ने अविश्वास जताया है।पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला।

5. EVM घोटाले पर भारत में बनी पहली डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म। कल अपलोड होने के बाद से अब तक इसे दो लाख 64 हज़ार स्मार्ट फ़ोन ओर कंप्यूटर पर देखा गया है।कई बार पहले इसे यूट्यूब डिलीट कर चुका है। लेकिन यह हर बार वायरल हो जाता है।

 

6. मीडिया EVM का बचाव ऐसे कर रहा है जैसे पॉकेटमार गिरोह के सदस्य पकड़े गए अपने साथी को बचाते हैं। चाहे इस चक्कर में इज़्ज़त ही क्यों न चली जाए।

7. दुनिया के पाँचवें सबसे विकसित देश नीदरलैण्ड में लोग 15-mar-2017  बैलेट पेपर पर मतदान कर रहे हैं। आज वहाँ मतदान है।अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे विकसित देश EVM से वोटिंग नहीं कराते।ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स पर भारत 130वें नंबर का देश है।

8. उत्तर भारत ने पिछले 50 साल में लोहिया, कांशीराम, चरण सिंह, रामस्वरूप वर्मा, जगदेव प्रसाद, वीपी सिंह, कर्पूरी ठाकुर, लालू प्रसाद, मायावती, मुलायम सिंह के नेतृत्व में मझोली, पिछड़ी और अनुसूचित जातियों का राजनीतिक उभार देखा।वे एक समय अच्छा लड़े। फिर कमज़ोरियाँ उभर आईं।सवर्ण जातियों ने अब जाकर इस तरह की राजनीति की काट ढूँढ ली है।यह प्रतिक्रांति है। इतिहास का अंत नहीं है।वे फिर आएँगे।

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