ब्राह्मणवादी लोग पूरी कोशिश करेंगे कि बहुजन समाज को अम्बेडकर साहित्य से दूर रखा जाए और पूजा-पाठ गीत-संगीत में उलझा दिया जाए। गीत संगीत मान सम्मान समाज की जाग्रति के लिए जरूरी है पर ये शुरुआत है यहाँ रुकना नहीं है हमारा भला पूजने गाने बजाने में नहीं होगा बल्कि उनकी विचारधारा जानने मानने और उसपर चलने से होगा …भुवनेश


विश्व के महानतम मानवतावादी महाज्ञानी महापुरुष बोधिसत्व बाबा साहब डॉ आंबेडकर महान की १२६वी जयंती पर हार्दिक शुभकामनायें

ब्राह्मणवादी लोग पूरी कोशिश करेंगे कि बहुजन समाज को अम्बेडकर साहित्य से दूर रखा जाए और पूजा-पाठ गीत-संगीत में उलझा दिया जाए। गीत संगीत मान सम्मान समाज की जाग्रति के लिए जरूरी है पर ये शुरुआत मात्र है यहाँ रुकना नहीं है हमारा भला पूजने गाने बजाने में नहीं होगा बल्कि उनकी विचारधारा जानने मानने और उसपर चलने से होगा …भुवनेश

जब *अंबेडकर जयंती* आती है, तो पूरा बहुजन समाज *भीममय* हो जाता है और पार्कों में, मैदानों में “जय भीम” के नारे गूंजने लगते हैं – और फिर यही लोग पूरे *364* दिन जाकर सो जाते हैं, जब चुनाव आता है तो फिर जाग जाते हैं। पार्कों और मैदानों में भीड़भाड़ इकट्ठी हो जाती है, जैसे रामलीला में होती है। अगर आप सिर्फ घूमने-फिरने आए हैं, तो फिर ऐसी भीड़ का कोई मतलब नहीं।
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ऐसे सिर्फ टाइम पास हो सकता है, खुद के दिल को तसल्ली दी जा सकती है – मगर कुछ बदलाव नहीं हो सकता, कोई क्रांति नहीं हो सकती।
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मेरा निवेदन है कि आप लोग अंबेडकर की जय करने, अंबेडकर की मूर्ति के सामने अगरबत्ती जलाने के बजाए – अंबेडकर के विचार और उनके उद्देश्य के बारे में पढे। तभी मिशन को कुछ मदद मिलेगी, वरना ब्राह्मणवादियों ने तो अंबेडकर को बहुजन समाज से छीनने की मुहिम शुरू कर दी है।
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यहाँ हम अंबेडकर जयंती की तैयारी कर रहे हैं और वहाँ भाजपा UP मार ले गयी।
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ब्राह्मणवादी लोग पूरी कोशिश करेंगे कि बहुजन समाज को अम्बेडकर साहित्य से दूर रखा जाए और पूजा-पाठ में उलझा दिया जाए। गीत-संगीत के कार्यक्रम भी शुरू हो चुके हैं।
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अम्बेडकर के सामने अगरबत्ती जलाओ, माल्यार्पण करो, पूजा शुरू कर दो, भीम चालीसा तो लिख ही दी गई है। कभी जाकर बौद्ध विहार की हालत देखिये। पूरे साल में अंबेडकर जयंती के अवसर पर बौद्ध विहार में सफाई अभियान चलता है।

सही बात कही है किसी ने, अगर किसी महापुरुष के विचारों की हत्या करनी हो, कहीं उंसके विचार लोगों तक न पहुँच पाये और उसका मिशन आगे न बढ़ पाये – तो उस महापुरुष की पूजा करना शुरू कर दो, उसके मंदिर बनाओ, उसकी मूर्तियाँ बनाओ।
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महापुरुष के शरीर की हत्या उसकी असली हत्या नहीं है – असली हत्या तो है उसके विचारों को फैलने से, लोगों तक पहुँचने से रोक देना।
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*जय भीम – नीला सलाम*
|| भवतु सब्बमंगलं ||

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