जातिवाद ब्राह्मणवादियों के लिए अवसर है और शूद्रों के लिए अभिशाप,जब शीर्ष पद उच्च जातीय लोगों को देते है तब यह जातिवाद नहीं होता लेकिन जब आप ऊँगली उठाओगे तो आप जातिवादी हो जाओगे !… बोधसत्व भाई एस0 प्रेम


जातिवाद क्या है ?
लोकतंत्र में सब बहुमत का खेल है हिन्दू हित की बात कर बहुमत हासिल करने वाले लोग पदों की बंदरबाट में जब शीर्ष पद उच्च जातीय लोगों को देते है तब यह जातिवाद नहीं होता लेकिन जब आप ऊँगली उठाओगे तो आप जातिवादी हो जाओगे !
बीजेपी शाषित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की सूचि में कितने ओबीसी हैं ? केंद्रीय मंत्रिमंडल की सूचि देख लीजिए वहां भी केवल उच्च जाती ही मिलेगी उनके इस दोगलेपन पर सवाल उठाते ही आप जातिवादी हो जाओगे लेकिन वे फिर भी “हिन्दू” ही रहेंगे और तुमसे ज्यादा राष्ट्रवादी भी !
वो आपको बार बार बताएँगे की राम ने सबरी के बेर खाये लेकिन आप शम्बूक की बात करते ही जातिवादी हो जाओगे !
वे हिन्दू के नाम पर ब्राह्मण क्षत्रिय और वैश्य ही रहेंगे लेकिन आप ओबीसी दलित आदिवासी की बात करते ही जातिवादी घोसित कर दिए जाओगे !
वे शुद्धिकरण करवाएंगे फिर भी जातिवादी नही होंगे और आप सवाल उठाते ही जातिवादी हो जाओगे !
वे तुम्हे नौकरियों से बाहर करेंगे और तुम नौकरियों की बात करते ही जातिवादी हो जाओगे !
वे शोषण और अत्याचार करेंगे तुम न्याय और संविधान की बात करते ही जातिवादी हो जाओगे !
वे तुम्हें हिन्दू बनाएंगे लेकिन खुद कभी हिन्दू नहीं बनेंगे वे तुम्हारे बच्चों को हिन्दू बनाएंगे लेकिन अपने बच्चों को विदेश भेजेंगे !
वे तुम्हारे बच्चो को संस्कृत पढ़ाएंगे लेकिन अपने बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाएंगे !
 वे रामायण गीता मनुस्मृति के नियमों को कठोरता से लागू करने का भरपूर प्रयत्न करेंगे लेकिन आप आरक्षण की बात करते ही जातिवादी हो जाओगे !
वे तुम्हे आपस में लड़ाएंगे पाखंडों में फंसायेंगे फिर भी देशभक्त रहेंगे और तुमने अगर इनके षड्यंत्रों को समझ लिया तो देशद्रोही जातिवादी साबित कर दिये जाओगे !
जातिवाद उनके लिए अवसर है और शूद्रों के लिए अभिशाप…
-S प्रेम
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One thought on “जातिवाद ब्राह्मणवादियों के लिए अवसर है और शूद्रों के लिए अभिशाप,जब शीर्ष पद उच्च जातीय लोगों को देते है तब यह जातिवाद नहीं होता लेकिन जब आप ऊँगली उठाओगे तो आप जातिवादी हो जाओगे !… बोधसत्व भाई एस0 प्रेम

  1. Manusmriti
    **************
    Chapter – 4, Verse – 124

    “The Rig-veda is declared to be sacred to the gods, the Yajur-veda sacred to men, and the Sama-veda sacred to the manes; hence the sound of the latter is impure (as it were)”.

    मनुस्मृति में सिर्फ वेद का ही जिक्र होना चाहिए – ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद या अथर्ववेद का नहीं, क्यूंकि वेदों का 4 हिस्सों में वर्गीकरण तो महर्षि वेदव्यास ने द्वापरयुग में किया था।

    तो फिर मनुस्मृति के अध्याय 4, श्लोक 124 में ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद का जिक्र कैसे आ गया?

    वास्तव में तो द्वापरयुग से पहले के किसी भी ग्रंथ में ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद या अथर्ववेद का जिक्र नहीं मिलना चाहिए।

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