NEWS: खुद को बाबा साहब अंबेडकर का दत्तक पुत्र बताने वाले कोलकाता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सी0एस0 कर्णन ने ऐतिहासिक फैसला दिया है। कर्णन ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश सहित 7 जजों को एससी/एसटी एक्ट का दोषी पाए जाने के बाद 5 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।…http://www.nationaldastak.com (टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार में ये खबर आयी है )

 

 

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नई दिल्ली। खुद को बाबा साहब अंबेडकर का दत्तक पुत्र बताने वाले कोलकाता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सीएस कर्णन ने ऐतिहासिक फैसला दिया है। कर्णन ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश सहित 7 जजों को एससी/एसटी एक्ट का दोषी पाए जाने के बाद 5 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

उन्होंने पहली बार न्यायपालिका में नियुक्ति में करप्शन का मामला उठाया था। इसकी शिकायत उन्होंने पीएम मोदी को पत्र लिखकर की थी। इस शिकायत को सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशों ने अपमान मानकर अवमानना का केस दर्ज कर लिया।

पढ़ें- जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों को दलित उत्पीड़न का दोषी पाया, 5 साल की कैद

कर्णन कई बार कह चुके हैं कि उन्हें दलित होने की वजह से परेशान किया जा रहा है। इस मामले पर सुनवाई करते हुए उन्होंने यह सजा सुनाई है। पढ़िए उनका पूरा फैसला……

देश में सर्वाधिक चर्चित कोलकाता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस कर्णन सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश सहित सात जजों को सजा सुनाई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवमानना के केस का सामना कर रहे कर्णन ने इन जजों को दलित उत्पीड़न का दोषी पाया है। कर्णन ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर पांच साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

आपको बता दें कि कर्णन ने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रधानमंत्री से शिकायत की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के जजों ने इस शिकायत को सकारात्मक तरीके से लेने की जगह इसे अपना अपमान मान लिया और जस्टिस कर्णन के खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई शुरू कर दी।

http://www.nationaldastak.com/story/view/justice-karnan-sentences-sc-7-judges-to-5-years-http://www.nationaldastak.com/story/view/read-full-decision-of-justice-karnan

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वरिस्ट पत्रकार श्री दिलीप सी मंडल लिखते हैं :

आज़ादी के बाद पहली बार इस साल गर्मियों में सुप्रीम कोर्ट के लगभग सारे जज काम पर हैं। वरना सिर्फ वेकेशन बैंच काम करती है। लाखों केस पेंडिंग होने के बावजूद जज लंबी छुट्टी पर विदेश निकल लेते हैं।

इस बार ऐसा नहीं हुआ। जस्टिस कर्णन ने सात जजों के विदेश जाने पर रोक लगा दी है। हवाई अड्डों को आदेश है कि इन जजों को विदेश न जाने दें।

जज लोग विदेश जाना भूल गए।

यह उस जज का फ़ैसला है जिसने 25,000 से ज़्यादा फैसले सुनाए हैं।

कौन हैं CJI को सज़ा सुनाने वाले जस्टिस करनन?

http://www.bbc.com/hindi/india-39851320