सवर्णो को लगता है की जातिवाद अब ख़तम हो गया है इसलिए अब आरक्षण को ख़तम कर देना चाहिए ,आओ मेरे साथ मैं तुम्हें जातिवाद दिखाता हूँ….Sanjay Bouddh


*आओ मेरे साथ मैं तुम्हें जातिवाद दिखाता हूँ।*
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आजकल जहाँ भी दो चार जनरल केटेगरी वाले इक्कठे बैठते हैं वहाँ एक ही चर्चा होती है कि इस आरक्षण ने देश को बर्बाद कर दिया है, अब तो सभी बराबर हो गए हैं कोई जातिवाद नहीं है इसलिए अब इस आरक्षण को खत्म कर देना चाहिए।

अफशोस की बात यह की हमारे कई नेता भी बोलने लगे हैं कि आरक्षण की समीक्षा होती है तो क्या बुरा है।

जिन लोगों को सब कुछ ठीक ठाक लग रहा है और कहीं भी जातिवाद नजर नहीं आता है उनको आह्वान किया जाता है कि आओ मेरे साथ मैं तुम्हें जातिवाद दिखाता हूँ।

आओ चलें ईंट भट्ठों पर और देखो वहाँ जो ईंट पाथ रहें हैं या पक्की हुई ईंटों की निकासी कर रहे हैं जिनमें पुरुषों के साथ साथ उतनी ही संख्या में महिलाएं भी दिखाई दे रही हैं उनमें ब्राह्मण, राजपूत और बणिया कितने हैं ?

इसका जवाब यही होगा कि इनमें तो उन समाजों का एक भी व्यक्ति नहीं है तो फिर यह जातिवाद नहीं है तो फिर क्या है ?

अब आगे चलो मेरे साथ शहरों की गलियों में और ध्यान से देखो जो महिलाएं सड़कों पर झाड़ू लगा रही हैं और गंदी नालियाँ साफ कर रही हैं उनमें कितनी ब्राह्मणी, ठुकराईंन और सेठाणी जी दिखाई दे रही हैं ?

यहाँ भी वही जवाब की इनमे तो ब्राह्मणी, ठुकराएंन और सेठाणी एक भी नहीं है तो यह जातिवाद नहीं है क्या ?

अब आओ चलते हैं रेलवे स्टेशन, हमारे देश में कई हजारों की संख्या में रेलवे स्टेशन बने हुए हैं वहाँ जो रेलवे लाइनो पर शौच के ढेर के ढेर लगे हुए रहते हैं उनको रातों रात साफ करने के लिए पंडित जी आता है या सिंह साहब या फिर शाहूकार जी सेवा देते हैं।

इसका भी वही जवाब मिलेगा की उनमे से तो एक भी नहीं आता है तो फिर क्या यह जातिवाद नहीं है ?

अब रूख करते हैं भवन निर्माण कार्य करने वाले मिस्त्री और मजदूरों की ओर, जो पूरे दिन अपना हाथ चलाते रहते हैं जिन्हें मिस्त्री कहते हैं और जो पूरे दिन सिर पर काठड़ी ढोने में लगे रहते हैं उन्हें मजदूर कहा जाता है वैसे वे मजदूर नहीं बल्कि मजबूर हैं क्योंकि 50 डिग्री तापमान में कोई कूलर की हवा खा रहा होता है तो कोई ऐ सी में मौज कर रहा होता है उस वक्त भी ये लोग तेज गर्मी और लू के थपेड़े खा रहे होते हैं, अब इनमे भी नजर दौड़ाते हैं तो उनकी संख्या नदारद मिलती है तो क्या यह जातिवाद नहीं है क्या ?

अब अपना ध्यान जगह जगह बोरी बिछाकर बैठे हुए उन लोगों की ओर लेकर जाओ जो जूता पॉलिश करते हैं या जूतों की मरमत करते हैं उनमें पंडित जी और उनके साथियों की भागीदारी कितनी है, जवाब मिलेगा बिलकुल शून्य, तो पूरा का पूरा तो जातिवाद भरा पड़ा है ।

अब आजाओ बाजारों की ओर चारों ओर जो बड़े बड़े मॉल और बड़ी बड़ी दुकाने दिखाई दे रही है उनका मालिक कोई एस सी समाज वाला भी है या नहीं ?

यहाँ एकदम से ही पासा पलट गया है अब यहां एस सी का एक भी बन्दा नजर नहीं आएगा और सभी पर ब्राह्मण और बनिया व राजपूत का कब्जा मिलेगा।

अब सभी मिलकर सोचो कि क्या यह जातिवाद नही है ?

बिलकुल यह खुलं खुला जातिवाद हैं।

अब मंदिरों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहना चाहता हूँ कि मंदिरों में कितने पुजारी ब्राह्मण के अलावा देखने को मिलते हैं, शायद एक भी नहीं । क्या इसे आप जातिवाद नहीँ समझते हो।

आज भी हर कदम पर जातिवाद का जहर भरा हुआ है और लोग कहते हैं कि अब कोई जातिवाद नहीं है अब आरक्षण खत्म कर दिया जाना चाहिए।

आरक्षण होते हुए भी उच्च पदों पर हमारे समाज के लोगों को पहुंचने से रोका जाता है यदि जिस दिन आरक्षण खत्म हो जायेगा उस दिन से तो जातिवाद और अधिक पढ़ जायेगा ।
इसलिये जो ऐसी बात करता है उसे कहो कि आओ मेरे साथ तुम्हेँ जातिवाद दिखाता हूँ ।

…..भारत में 3% ब्राह्मण …..
**********************
3% लोगों का हिस्सा देखिये….

लोकसभा में ब्राह्मण : 48 %
राज्यसभा में ब्राह्मण : 36 %
ब्राह्मण राज्यपाल : 50 %
कैबिनेट सचिव : 53 %
मंत्री सचिव में ब्राह्मण : 64%
अतिरिक्त सचिव ब्राह्मण : 62%
पर्सनल सचिव ब्राह्मण : 70%
यूनिवर्सिटी में ब्राह्मण वाईस
चांसलर : 61%
सुप्रीम कोर्ट में ब्राह्मण जज: 85%
हाई कोर्ट में ब्राह्मण जज : 70 %
भारतीय राजदूत ब्राह्मण : 51%
पब्लिक अंडरटेकिंग ब्राह्मण :
केंद्रीय : 67%
राज्य : 82 %

बैंक में ब्राह्मण : 67 %
एयरलाइन्स में ब्राह्मण : 61%
IAS ब्राह्मण : 72%
IPS ब्राह्मण : 61%
टीवी कलाकार एव बॉलीवुड : 83%
CBI Custom ब्राह्मण 72%
यदि हमारा आरक्षण गलत है और उसका सवर्णों के द्वारा विरोध किया जाता है! तो ये क्या है इसका विरोध आज तक किसी ने क्यो नही किया गया ? कहाँ छुपे हैं आरक्षण विरोधी लोग।
एससी-एसटी और ओबीसी को जो आरक्षण मिला है वह जनसंख्या के अनुपातिक आधार पर मिला है जिसके तहत SC & ST को 22.5% नौकरी और राजनीति में मिला ह.

https://www.facebook.com/sanjay.meghwal.165685/posts/1970729793149019

आप सरकारी नौकरी करने वाले जितने लोगों को जानते हो उनकी सूची बनाओ फिर उनमे से सेडुल कास्ट के लोगों को अलग कर उनकी प्रतिशत जानो , आप खुद जान जाओगे की सेडुल कास्ट के लोगों को बेहद काम सरकारी नौकरी मिलती है, जबकि आप पाओगे की उस लिस्ट में सभी ब्राह्मण बनिए भरे पड़े होंगे। जब आरक्षण के बाद ये हाल है तो बिना आरक्षण के क्या होगा, आप आरक्षण बंद करने की बात करते हो अरे पहले उसे लागू तो करो बैक लोग तो भरो , दिखावटी आरक्षण से क्या होगा।देश की तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व नहीं, इतने बड़े देश में सिर्फ चार जज ही सेडुल कास्ट के हैं ऐसा क्यों ? अब मेरिट का रोना मत रोने लगना, प्राइवेट और सरकारी स्कूल जैसी दो धाराएं चलते हो और फिर मेरिट या क्षमता का रोना रोते हो, हमारे जो चंद लोग प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे हैं वो अच्छा कर रहे हैं

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2 thoughts on “सवर्णो को लगता है की जातिवाद अब ख़तम हो गया है इसलिए अब आरक्षण को ख़तम कर देना चाहिए ,आओ मेरे साथ मैं तुम्हें जातिवाद दिखाता हूँ….Sanjay Bouddh

  1. Very Nice 👍

    On 19-Sep-2017 11:57 AM, “SAMAYBUDDHA’s Dhamm Deshna” wrote:

    > KSHMTABUDDHA posted: “*आओ मेरे साथ मैं तुम्हें जातिवाद दिखाता हूँ।*
    > _______________________ आजकल जहाँ भी दो चार जनरल केटेगरी वाले इक्कठे बैठते
    > हैं वहाँ एक ही चर्चा होती है कि इस आरक्षण ने देश को बर्बाद कर दिया है, अब
    > तो सभी बराबर हो गए हैं कोई जातिवाद नहीं है इसलिए अब इस आ”
    >

  2. आप सरकारी नौकरी करने वाले जितने लोगों को जानते हो उनकी सूची बनाओ फिर उनमे से सेडुल कास्ट के लोगों को अलग कर उनकी प्रतिशत जानो , आप खुद जान जाओगे की सेडुल कास्ट के लोगों को बेहद काम सरकारी नौकरी मिलती है, जबकि आप पाओगे की उस लिस्ट में सभी ब्राह्मण बनिए भरे पड़े होंगे। जब आरक्षण के बाद ये हाल है तो बिना आरक्षण के क्या होगा, आप आरक्षण बंद करने की बात करते हो अरे पहले उसे लागू तो करो बैक लोग तो भरो , दिखावटी आरक्षण से क्या होगा।देश की तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व नहीं, इतने बड़े देश में सिर्फ चार जज ही सेडुल कास्ट के हैं ऐसा क्यों ? अब मेरिट का रोना मत रोने लगना, प्राइवेट और सरकारी स्कूल जैसी दो धाराएं चलते हो और फिर मेरिट या क्षमता का रोना रोते हो, हमारे जो चंद लोग प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे हैं वो अच्छा कर रहे हैं

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