जानते हैं दलित क्यों हारते हैं?…….बोधिसत्व मान्यवर जाटव


जानते हैं दलित क्यों हारते हैं?
क्योंकि जब इनके पार पैसा हो जाता है तब ये अपने अम्बेडकरवाद और बुद्ध धम्म को समय देना बंद कर देते हैं, फिर जब एक दो पीढ़ी सुख भोगकर गरीब होते हैं तब तक तो बहुत देर हो चुकी होती है। इसीलिए डॉ आंबेडकर ने कहा था की बौद्ध धम्म तुम्हारा झोपड़ा असल घर है जब तुम पर पैसा हो जाए और ब्राह्मणवादी महलों में जाओ तब अपने झोपड़े को आग लगाकर मत जाना क्योंकि जिस दिन गरीब होंगे उस दिन यही झोपड़ा तुमको आसरा देगा। हमारे सक्षम लोगों को चाहिए की जब उनपर पैसा हो तो उसमे से कुछ पैसे से अपना झोपड़े में भी लगा दे ताकि अगर कभी लौटना पड़े तो एक बेहतर घर मिले।
क्या आप नहीं समझ सकते की करोड़ों में खेलने वाले ब्राह्मणवादी लोग अपनी नींद ख़राब कर के सुबह पांच बजे खाखी निक्कर पहन लाठी लेकर RSS/BJP की शाखाओं में क्यों जाते हैं, आखिर इतने अमीर होने की बावजूद उनको क्या जरूरत है।
अपना घर अपना ही होता है उसी को महल बनाओ न की दूसरों के महल को अपना समझने की भूल करो। हमारे लोगों की सोच देखो आत्मरक्षा के हतियार की जगह I-फ़ोन खरीदते है ,धम्म को बढ़ने के दान देने की जगह रीबॉक के जूते पहनते हैं, कानून की पढाई करने की जगह मनोरंजन में टाइम ख़राब करते हैं ,अपनी कौम के संगठन बढ़ाने की बजाये अपने लोगों को ही धोखा देते हैं। सवर्णों की तलवे चाटते हैं और अपने लोगों को ही लूटते हैं | फिर जब पीटते हैं तब बस रोकर रह जाते हैं| शक्ति वक्त रहते बढ़ाई जाती है पर जब अच्छे दिन आते हैं तब दलित शक्ति बढ़ने की बजाए मौज मस्ती में ऐसा डूबता है की जब बर्बाद होता है तभी आँख खुलती है |
जय भीम, नमो बुद्धाय ,सम्राट अशोक महान की जय
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 सरकार का विरोध करने से कुछ हासिल नही होगा… विरोध ही करना है तो…”EVM” का विरोध करो…।।
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