मूंछ रखना न रखना व्यक्तिगत फैसला है, पर जिस तरह से गुजरात के बहुजनो ने इसको मुद्दा बनाया,ये सब देख कर लगता है धीरे धीरे बहुजन समाज राजनीती करना सीख गया है और संगठन का महत्व जान गया है।


मूंछ रखना न रखना व्यक्तिगत फैसला है, पर जिस तरह से गुजरात के बहुजनो ने इसको मुद्दा बनाया और इतना बड़ा बनाया की सवर्ण मीडिया भी इसे कवर करने पे मजबूर है। इससे पहले भी बहुत से ऐसे दलित मुद्दे हुए हैं जब सारा समाज एकजुट होकर प्रतिकार कर रहा है।ये सब देख कर लगता है धीरे धीरे बहुजन समाज राजनीती करना सीख गया है और संगठन का महत्व सीख गया है। संगठित और राजनैतिक रूप से जगी हुई कौम की आबादी कम हो फिर भी वो अपना वर्चस्व कायम कर सकते हैं, और यहाँ तो बहुजन मेजोरिटी में है, अकेली चमार जाती भारत के मुसलमानो से ज्यादा है।

इस सब में बहुजनो को ध्यान रखना होगा की ये सब राजनैतिक मुद्दे हो सकते हैं पर असल मुक्ति केवल शिक्षा और ज्ञान लेने से ही संभव है, अकेली मूछ कुछ न दे पाएगी पर हाँ अगर उस मूंछ के पीछे एक पढ़ा लिखा बुद्धिमान होगा जो संगठन को सबसे बड़ा मानता होगा तब मुक्ति संभव है

क्या है पूरा मुद्दा जानने के लिए इन लिंक को देखें

http://thewirehindi.com/20406/dalit-atrocities-within-a-week-in-gujrat/

http://www.bbc.com/hindi/india-41502688

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