हरियाणा हिसार,14 अक्टूबर।तथागत बुद्ध के सैंकड़ों अनुयायियों ने धम्म प्रवर्तन/वापसी दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को हिसार लघुसचिवालय से लेकर अग्रोहा बौद्ध स्तूप तक धम्म यात्रा निकाली।भारतीय बौद्ध महासभा,धम्म भूमि पलवल,समता सैनिक दल व अन्य संगठनों ने मिलकर इस धम्म कार्यक्रम का आयोजन किया………..Rajesh Rathi FB post


धम्मप्रवर्तन/वापसी दिवस 14-oct पर बुद्ध अनुयायियों ने हिसार से अग्रोहा तक निकाली धम्म यात्रा

लघुसचिवालय में डॉ आंबेडकर को माल्यापर्ण के बाद अग्रोहा बौद्ध स्तूप पर हुई धम्म देशना

हिसार,14 अक्टूबर।तथागत बुद्ध के सैंकड़ों अनुयायियों ने धम्म प्रवर्तन/वापसी दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को हिसार लघुसचिवालय से लेकर अग्रोहा बौद्ध स्तूप तक धम्म यात्रा निकाली।भारतीय बौद्ध महासभा,धम्म भूमि पलवल,समता सैनिक दल व अन्य संगठनों ने मिलकर इस धम्म कार्यक्रम का आयोजन किया था।यात्रा की शुरुआत लघुसचिवालय स्थित संविधान निर्माता डॉ भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया।उसके उपरांत मोटरसाइकिल व गाड़ियों के काफिले से यात्रा अग्रोहा पहुंची।

धम्म देशना करने पहुँचे भन्ते धम्मशील,भन्ते क्षमाशील अग्रोहा बौद्ध स्तूप पर पहुंचे और बुद्ध वन्दना कर स्तूप की गरिमा के साथ अनुयायियों को धम्म की राह बताई।त्रिशरण व पंचशील पाठ के बाद कार्यक्रम के वक्ताओं ने कहा कि 44 साल अध्ययन के बाद 14 अक्टूबर 1956 को बाबासाहेब डॉ अम्बेडकर ने रूढ़िवादी,वर्णवादी व भेदभाव युक्त धर्म को छोड़कर मानवतावादी बुद्ध धम्म को लाखों अनुयायियों के साथ नागपुर की धरती पर आत्मसात किया था।इसी उपलक्ष्य में हर साल बुद्ध धम्म के अनुयायी 14 अक्टूबर को तथागत बुद्ध और डॉ अम्बेडकर को याद करते हुए धम्म प्रवर्तन दिवस मनाते है।मुख्यवक्ता डॉ जगराम ने कहा कि अग्रोहा की भूमि पर तथागत बुद्ध के पवित्र कदम पड़े थे।

यहां पर विशाल बौद्ध विहार होता था जिसमे हजारों बौद्ध भिक्षु निवास करते थे।सम्राट अशोक द्वारा चौरासी हजार बुद्ध शिलालेखों का निर्माण करवाया गया जिसमें अग्रोहा स्तूप व हिसार की लाट की मस्जिद भी शामिल है।लेक़िन मानवतावाद विरोधी शक्तियो ने अग्रोहा के साथ देश भर के बौद्ध स्तूपों को नष्ट कर दिया।डॉ जगराम ने कहा की बुद्ध की संस्कृति संसार भर में फैली हुई है।उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म को आगे बढ़ाने व इसके प्रचार-प्रसार के लिए एकजुट होकर काम करना पड़ेगा।बुद्ध की राह ही मानवता की असली राह है।देश मे जो धार्मिक कट्टरता का माहौल बन चुका है उसे केवल बुद्ध के बताए शांति के मार्ग से ठीक किया जा सकता है।भारतीय बौद्ध महासभा के जिलाध्यक्ष राजेश बौद्ध ने बताया कि महाकारुणिक बुद्ध की ऐतिहासिक भूमि अग्रोहा का पता भारतीय पुरातत्विक विभाग की खुदाई के बाद लगा।लेकिन सरकार बौद्ध स्तूप की लगातार उपेक्षा कर रही है।स्तूप की सेंकडो एकड़ भूमि यहाँ कब्जाई जा चुकी है।बुद्ध स्तूप की सुरक्षा व संरक्षण को लेकर अनुयायियों का एक दल जल्द ही उचित कदम उठाएगा।

मंगलकामना व प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम की समाप्ति हुई।इस मोके पर पूनम बौद्ध, सोनू विशरवाल,जगदीश बौद्ध,विनोद शिला, सज्जन,नरेश खोखर,रविन्द्र चौहान,राजेंद्र बौद्ध,कमलेश बरबड़,तेलूराम अग्रोहा,इंद्राज बौद्ध,राजबीर सोरखी,विक्रम अटल,राजेश,रमेश बोद्ध,सोनू,सन्दीप मंगाली व अन्य मौजूद थे।

 

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