कांचा इलैया की किताबें आम तौर पर लाखों में बिकती हैं. उनकी जिस किताब Post Hindu India पर विवाद फैलाने की कोशिश हो रही है, उसकी सारी कॉपी अमेजन और फ्लिपकार्ट पर इस हफ्ते देखते ही देखते बिक गईं. स्टॉक खत्म हो गया…Dilip C Mandal

कौन डरता है कांचा से.

कांचा इलैया की इस किताब पर सारा विवाद इसकी हिंदी कॉपी आने के बाद हुआ. इसका पहला मतलब यह है कि नौ साल से इसकी इंग्लिश कॉपी बिक रही है. अमूमन देश भर की लाइब्रेरी में है. लेकिन मूर्खों को कोई दिक्कत नहीं हुई. अब किताब आम जनता तक पहुंच रही है, तो उनको मिर्ची लग गई है.

इस किताब में आखिर ऐसा क्या है?
क्यों लग रही है मिर्ची?

किताब दरअसल भारत के आदिवासी, दलित और पिछड़े समुदायों के श्रम से उपजे ज्ञान का आख्यान है.

पहला चैप्टर बताता है कि किस तरह आदिवासियों ने ज्ञान का सृजन किया.

दूसरा चैप्टर चमार जाति की ज्ञान क्षेत्र में उपलब्धियों को बताता है.

तीसरा चैप्टर महार जाति के ज्ञान सृजन को रेखांकित करता है.

ऐसे ही एक चैप्टर यादव जाति के ज्ञान और अन्य चैप्टर नाई जाति की उपलब्धियों को दर्ज करता है.

कांचा खुद पशुपालक जाति से हैं और मानते हैं कि जो श्रमशील जातियां हैं. वही ज्ञान का सृजन कर सकती हैं. निठल्ले लोग ज्ञान की सृजन नहीं कर सकते.

यह विश्वस्तर पर स्थापित थ्योरी है और कांचा कोई नई बात नहीं कह रहे हैं.

इसलिए आप पाएंगे कि यूरोप में भी ज्यादातर आविष्कार वर्कशॉप और उससे जुड़ी प्रयोगशालाओं में हुए.

भारत में ज्ञान गुरुकुलों में रहा और इसलिए भारत आविष्कारों की दृष्टि से एक बंजर देश है. बिल्कुल सन्नाटा है यहां.

कांचा की किताब के आलोचक यह नहीं बता रहे हैं कि उन्हें मिर्ची किस बात से लग रही हैं. वे बस हाय हाय कर रहे हैं कि बहुत ज्यादा मिर्ची है.

यह सच भी है कि किताब में भरपूर मिर्च है. निठल्ले समुदायों की खाल खींचकर कांचा ने उस खाल को धूप में सुखा दिया है.

कांचा की किताबें आम तौर पर लाखों में बिकती हैं. उनकी जिस किताब Post Hindu India पर विवाद फैलाने की कोशिश हो रही है, उसकी सारी कॉपी अमेजन और फ्लिपकार्ट पर इस हफ्ते देखते ही देखते बिक गईं. स्टॉक खत्म हो गया.

हिंदी अनुवाद ‘हिंदुत्व मुक्त भारत’ नाम से अब भी उपलब्ध है. 250 रुपए की है. खरीद लीजिए. पता नहीं, कल मिले या न मिले.

विचार को रोकने की कोशिश मत करो. कोई फायदा नहीं होगा. यह राख झाड़कर जिंदा हो जाने वाला विचार है.

Dilip C Mandal खरीदिए. हालांकि अभी उपलब्ध नहीं है. https://www.amazon.in/Post-Hindu-India…/dp/817829902X

हिंदी एडिशन खरीद सकते हैं. https://www.amazon.in/Hindutva-Mukt-Bharat…/dp/B06ZZMKWX3

मूंछ रखना न रखना व्यक्तिगत फैसला है, पर जिस तरह से गुजरात के बहुजनो ने इसको मुद्दा बनाया,ये सब देख कर लगता है धीरे धीरे बहुजन समाज राजनीती करना सीख गया है और संगठन का महत्व जान गया है।

मूंछ रखना न रखना व्यक्तिगत फैसला है, पर जिस तरह से गुजरात के बहुजनो ने इसको मुद्दा बनाया और इतना बड़ा बनाया की सवर्ण मीडिया भी इसे कवर करने पे मजबूर है। इससे पहले भी बहुत से ऐसे दलित मुद्दे हुए हैं जब सारा समाज एकजुट होकर प्रतिकार कर रहा है।ये सब देख कर लगता है धीरे धीरे बहुजन समाज राजनीती करना सीख गया है और संगठन का महत्व सीख गया है। संगठित और राजनैतिक रूप से जगी हुई कौम की आबादी कम हो फिर भी वो अपना वर्चस्व कायम कर सकते हैं, और यहाँ तो बहुजन मेजोरिटी में है, अकेली चमार जाती भारत के मुसलमानो से ज्यादा है।

इस सब में बहुजनो को ध्यान रखना होगा की ये सब राजनैतिक मुद्दे हो सकते हैं पर असल मुक्ति केवल शिक्षा और ज्ञान लेने से ही संभव है, अकेली मूछ कुछ न दे पाएगी पर हाँ अगर उस मूंछ के पीछे एक पढ़ा लिखा बुद्धिमान होगा जो संगठन को सबसे बड़ा मानता होगा तब मुक्ति संभव है

क्या है पूरा मुद्दा जानने के लिए इन लिंक को देखें

http://thewirehindi.com/20406/dalit-atrocities-within-a-week-in-gujrat/

http://www.bbc.com/hindi/india-41502688

जानते हैं दलित क्यों हारते हैं?…….बोधिसत्व मान्यवर जाटव

जानते हैं दलित क्यों हारते हैं?
क्योंकि जब इनके पार पैसा हो जाता है तब ये अपने अम्बेडकरवाद और बुद्ध धम्म को समय देना बंद कर देते हैं, फिर जब एक दो पीढ़ी सुख भोगकर गरीब होते हैं तब तक तो बहुत देर हो चुकी होती है। इसीलिए डॉ आंबेडकर ने कहा था की बौद्ध धम्म तुम्हारा झोपड़ा असल घर है जब तुम पर पैसा हो जाए और ब्राह्मणवादी महलों में जाओ तब अपने झोपड़े को आग लगाकर मत जाना क्योंकि जिस दिन गरीब होंगे उस दिन यही झोपड़ा तुमको आसरा देगा। हमारे सक्षम लोगों को चाहिए की जब उनपर पैसा हो तो उसमे से कुछ पैसे से अपना झोपड़े में भी लगा दे ताकि अगर कभी लौटना पड़े तो एक बेहतर घर मिले।
क्या आप नहीं समझ सकते की करोड़ों में खेलने वाले ब्राह्मणवादी लोग अपनी नींद ख़राब कर के सुबह पांच बजे खाखी निक्कर पहन लाठी लेकर RSS/BJP की शाखाओं में क्यों जाते हैं, आखिर इतने अमीर होने की बावजूद उनको क्या जरूरत है।
अपना घर अपना ही होता है उसी को महल बनाओ न की दूसरों के महल को अपना समझने की भूल करो। हमारे लोगों की सोच देखो आत्मरक्षा के हतियार की जगह I-फ़ोन खरीदते है ,धम्म को बढ़ने के दान देने की जगह रीबॉक के जूते पहनते हैं, कानून की पढाई करने की जगह मनोरंजन में टाइम ख़राब करते हैं ,अपनी कौम के संगठन बढ़ाने की बजाये अपने लोगों को ही धोखा देते हैं। सवर्णों की तलवे चाटते हैं और अपने लोगों को ही लूटते हैं | फिर जब पीटते हैं तब बस रोकर रह जाते हैं| शक्ति वक्त रहते बढ़ाई जाती है पर जब अच्छे दिन आते हैं तब दलित शक्ति बढ़ने की बजाए मौज मस्ती में ऐसा डूबता है की जब बर्बाद होता है तभी आँख खुलती है |
जय भीम, नमो बुद्धाय ,सम्राट अशोक महान की जय
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 सरकार का विरोध करने से कुछ हासिल नही होगा… विरोध ही करना है तो…”EVM” का विरोध करो…।।

जब तक तुम लोगों का राज रहा और हमें पढ़ने नहीं दिया तब तक तुम्हारे बन्दर भी उड़े है, फल खाने से बच्चे भी पैदा हुए हैं , पृथ्वी को शेषनाग के फन पर टिकाया, तथाकथित भगवानों ने अवतार लिए, पर अब जब हम पढ़ गए और बाबा साहब के संविधान से शाशन चलता है तब ऐसा क्यों नहीं होता? हम क्या माने अब ….बोधिसत्व अशोक जाटव

 👉🏻 तुमने बोला *_”बिना पंख के बंदर उड़ गया …”_*
*~* हमने मान लिया…।
👉🏻 तुमने बोला *_”बन्दर ने उड़कर आग के विशाल गोले (सूर्य )को  निगल लिया….।”_*
*~* हमने बोला हां ठीक है…|
👉🏻 तुमने बोला *_”पृथ्वी गाय के सिंग पर टिकी है…”_*
*~* हमने बोला हां ठीक है…|
👉🏻 तुमने बोला *_”पृथ्वी शेषनाग के फन पर टिकी है…”_*
*~* हमने बोला हां ठीक है…|
👉🏻 तुमने बोला, *_”ब्राम्हण ब्रम्हा के मुँह से निकला है, इसलिए श्रेष्ठ है….।”_*
*~* हमने कहा ठीक है…।
👉🏻 तुमने बोला, *_”शुद्र ब्रम्हा के पैर से पैदा हुये है…।”_*
*~* हमने मान लिया…।
👉🏻 तुमनें बोला, *_”कौरव घी के डिब्बों से पैदा हो गए….”_*
*~* हमनें यह भी मान लिया…।
👉🏻 तुमनें बोला, *_”सीताजी खेत में हल चलाते समय जमीन से निकल आयी…”_*
*~* हमनें यह भी मान लिया…|
👉🏻 तुमने बोला, *_’हनुमान कान से पैदा हो गए ….”_*
*~* हमनें यह भी मान लिया…।
👉🏻 तुमने बोला, *_”श्रृंगी ऋषि हिरनी से पैदा हो गए….”_*
*~* हमने यह भी मान लिया.
👉🏻 तुमने बोला, *_”मकरध्वज मछली से पैदा हुआ…”_*
*~* मैंने यह भी मान लिया.
👉🏻 तुमनें बोला, *_”हिरण्याक्ष पृथ्वी को उठाकर समुद्र में घुस गया….”_*
*~* हमने यह भी मान लिया.
👉🏻 तुमने बोला, *_”विष्णू ने वराह (सुवर)का अवतार धारण कर पृथ्वी को हिरण्याक्ष से छुड़ा लिया…”_*
*~* हमने यह भी मान लिया.
👉🏻 *_”तुमने हत्यारे, लुटेरे, व्यभिचारी, धोखेबाज, बलात्कारी लोगो को भगवान-देवी-देवता बताया….”_*
*~* हमने वह भी मान लिया.
👉🏻 *_”तुमने बंदरो से पत्थर तैराकर समुद्र में पूल बनवा दिया …।”_*
*~* हमने वह भी मान लिया.
👉🏻 *_”तुमने जिस शेषनाग के फन पर पृथ्वी टिकी थी, उसी सांप को रस्सी बनाकर समुद्रमंथन करा दिया…”_*
*~* हमने वह भी मान लिया.
👉🏻 *_”तुमने एक बन्दर से सोने (धातु) की लंका (पूरा नगर) को जलवा दिया….।”_*
*~* हमने वह भी मान लिया.
👉🏻 तुमने बोला, *_”ब्रम्हा के मुख से पैदा हुआ ब्राम्हण ही सर्वेसर्वा भूदेव है…”_*
*~* हमने मान लिया.
👉🏻 तुमने बोला, *_”यह पूरी दुनियाँ एक ईश्वर चलाता है, जो खुद ब्राम्हणों के कहने पर चलता है…”_*
*~* हमने फिर भी मान लिया.
👉🏻 तुमने बोला, *_”यहां के हर पत्थर में भगवान है….”_*
*~* हम आजतक उसे भी मानते रहे.
👉🏻 तुमने बोला, *_”तुम ब्रम्हा के पैरों से पैदा हुये हो इसलिए तुम्हे कोई भी अधिकार नहीं हैं….”_*
*~* मैंने वह भी मान लिया…।
*ऐसे और भी हजारों, ऐसे तथ्य है जिन्हें तुमने हमें मानने पर मजबूर किया और हमने चाहे, न चाहे मान लिया….।*
*आखिर क्यों …?*
_*क्योंकि, तुमने हमारे सोचने-समझने-जानने की ताकत (शिक्षा) तर्क, बुद्धि और विज्ञान छीनकर हमें अँधा बनाकर अपाहिज बना दिया था…।*_
*_पर आज हमारी आँखें खुल चूकी हैं,_*
*_हमारे पास आज ताकत है,_ _”फुले, साहू, पेरियार, अम्बेडकरी विचारधारा कि और सिद्धांतों के कलम के ताकत की, जिसमे स्याही भरी है इन्ही महापुरुषों के तर्क, बुद्धि, विवेक और विज्ञान की…।*
*_और आज हमारे पास ताकत है, महामानव बोधिसत्व बाबासाहब डाॅ. भीमराव अंबेडकर के संविधान की जिसमे अपार क्षमता है महाकारुणिक तथागत बुद्ध के प्राकृतिक विज्ञान की…।_*
इसलिये, आज मैं इन काल्पनिकताओं को मानने के बजाय जानना चाहता हूँं,
👉🏻 *_इन सभी का सच…!_*👈🏻
और, पूँछना चाहता हूं एक मात्र तार्किक सवाल….???
*”कि आजतक जो तुमने हमे बताया आखिर वह सब होता कैसे था…?”* *”और, वह सब आज क्यों नही कर पा रहे हो…?…*
*तो फिर, करिए न मंत्र जाप…*
*और, दिखाइए न ऐसे चमत्कार जो बड़े-बड़े ग्रंथो में ठूँस-ठूँस कर भरे हुए है…।*
     सवाल तार्किक है, इसलिए जवाब भी तार्किक ही अपेक्षित है..।
_*अब मूर्खता, पाखंड, अंधविश्वास के लिए यहां कोई भी जगह नहीं है…।*_
*क्योंकि, यह कोई रामराज, यमराज और धर्मराज का राज नही…,*
*_”बल्कि, अत्याधुनिक तर्क, बुद्धि, विवेक और विज्ञान से लैस वैज्ञानिक इक्कीसवी सदी के विज्ञान का राज है…।_*
जय भीम, नमो बुद्धाय ,सम्राट अशोक महान की जय
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 सरकार का विरोध करने से कुछ हासिल नही होगा… विरोध ही करना है तो…”EVM” का विरोध करो…।।