संविधान दिवस 26nov विशेष:- बाबासाहब डॉ. आंबेड़कर जी द्वारा *Making of Constitution and its Challenges from tri-varna* समझे बगैर हम संविधान का मजबुती से बचाव नही कर सकते ….राजिव महानंदा


संविधान दिन विशेष
एक तरफ संविधान दिन जोर-शोर से मनाया जा रहा है तो दुसरी तरफ संविधान को अर्थात समता, स्वतंत्रता, भाईंचारा एवं न्याय पर आधारीत समाज व्यवस्था को खत्म करने की पुरजोर सफल  कोशिश की जा रही है! संविधान को पढ़े और समजे बगैर उसके ऊपर हो रहें बलात्कार को समझ पाना मुश्किल हैं, अत: सभी समता, स्वतंत्रता, भाईंचारा एवं न्याय को माननेवाले महानुभावों से, बुध्दिजिवीयोंसे यह दरकार हैं कि, वह संविधान को बचाने की पुरजोर सफल कोशिश करें।
संविधान दिन को केवल उत्सव मानने वाले लोगों ने *समता, स्वतंत्रता, भाईंचारा एवं न्याय पर आधारीत बुध्दक्रांती को खत्म कर प्रतिक्रांती करने वालों का चरीत्र समझना जरूरी हैं।* तथा बाबासाहब डॉ. आंबेड़कर जी द्वारा *Making of Constitution and its Challenges from tri-varna* समझे बगैर हम संविधान का मजबुती से बचाव नही कर सकते, परिणामत: जितने जोर-शोर से हम संविधान दिन, संविधान बचाव का स्वांग इन्ही त्रि-वर्णों की छत्रछाया में मनाते रहेंगे उतने ही यह मानवता के दुश्मन मानवतावादी संविधान के तत्व को खोखला कर केवल मात्र पुजा करने के लिए *संविधान की किताब* रख देंगे।
हम पिछले 65-67 सालों से सवैंधानिक प्रावधानों का फायदा लेकर जश्न तो जरुर मना रहें है, लेकिन उसी संविधान को मजबुत और कायम रखने के लिए इमानदार प्रयास करने में चुंक गये। परिणामत: संवैधानिक *शिक्षा का अधिकार, LPG के द्वारा महंगी शिक्षा कर छिना गया, वैचारिक स्वतंत्रता छिनी गयी, धार्मिक आजादी, निती (Policy) बनाने वाले पदोंपर प्रतिनिधित्व नकारकर, समान रोजगार के अवसर, आधार लाकर एवं नियोजीत नोटबंदी कर आर्थिक आजादी, दहशत फैलाकर जिने की आजादी छिन ली गयी।*
इन सभी मौलिक अधिकारों के ऊपर अमल और उसका संरक्षण करने की जिम्मेवारी जिस चुनाव प्रक्रिया (Article 326, Section 62, Constitution & Representation of People’s Act, 1951) के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधीयोंके उपर होती है, उस चुनाव प्रक्रिया को पहले जोर-जबरदस्ती के बल पर, बादमें शराब-शबाब के बल पर, पुरी प्रक्रिया को जानबुझकर महंगी कर और अभी *Gate way of our human (Social, Economical, Cultural, Religious, Political) rights* कही जानेवाली, जिसके द्वारा *Representative Parliamentary Democracy* में हम जनप्रतिनिधी भेजकर यह उम्मीद रखतें हैं की, यह जनप्रतिनिधी हमारे संवैधानिक अधिकारों के ऊपर अमल करेंगे और उसकी सुरक्षा करेंगे! उस मताधिकार के प्रणाली पर दिन-दहाडें *EVM के द्वारा बलात्कार* हो रहा हैं और हम न्यायप्रिय लोग तमाशबिन बने हैं। हमनें दिया हुआ *Vote* उसी उम्मिदवार को गया जिसको हम देना चाह रहे है, इस बात की गैरेंटी जब तक नहीं हो जाती तब तक नहीं कहां जा सकता, आपको कोई *Right of vote* हैं।
अत:  हम संगठ़ित तरीके से EVM बैन करा कर ही संविधान को बचा सकते हैं। भारत देश का संविधान गुरु ग्रंथसाहब का  मानवतावाद, कुरान का मसावाद, धम्मपद के न्यायपुर्ण चरित्र, बाईबल की ईन्सानियत तथा OBC, SC, ST और Minorities के सभी मौलिक अधिकारों की गैरेंटी हैं, इसलिए सभी महानुभावों की निजी जिम्मेंदारी है कि, वे संविधान दिन के जश्न के साथ-साथ संविधान बचाव आंदोलन का हिस्सा बनें।
याद रहें,
संविधान हैं तबतक हक़ और अधिकार हैं,
संविधान हैं तबतक दिन और दस्तूर भी हैं!!!
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
*राजिव महानंदा*

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