पूज्य भदंत गलगेदर प्रग्यानन्द महाथेर का पार्थिव शरीर 18 दिन तक रख कर वन्दना, परित्त पाठ किया जा रहा है.अब तक उत्तर प्रदेश के महामहिम राज्यपाल श्री राम नाईक, मुख्यमंत्री मा. योगी आदित्यनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री शुश्री मायावती, उपराष्ट्रपति भारत श्री वेंकइया नायडू भदंत गलगेदर प्रग्यानन्द महाथेर के पार्थिव शरीर का दर्शन कर चुके हैं…Dr Rajesh Chandra (क्या मीडिया में ये खबर आपने कहीं देखी ?)


14 अक्टूबर’1956 को, अशोक विजय दशमी के दिन, नागपुर में, भारत के संविधानशिल्पी बोधिसत्व बाबा साहेब डा. बी आर अम्बेदकर व उनके लाखों अनुयायियों को सप्तवर्गीय भिक्खु संघ द्वारा धम्मदीक्षा दी गयी थी. वे सात भिक्खू इस प्रकार थे- पूज्य भदंत चन्द्रमनी महाथेर(अध्यक्ष) बर्मा से, 2. भिक्खु प्रग्या तिस्स, 3. भिक्खु एम. संघरतन महाथेर, 4. भिक्खु संघरक्षित, 5. भिक्खु सद्धा तिस्स, 6. भिक्खु एच. धम्मानन्द महाथेर, 7. पूज्य भदंत गलगेदर प्रग्यानन्द महाथेर.
पूज्य भदंत गलगेदर प्रग्यानन्द महाथेर सप्तवर्गीय भिक्खु संघ में उस समय सर्वाधिक युवा थे, 28 वर्ष के. सात में से छ भिक्खुओं का पहले ही निधन हो चुका है. महान धम्मक्रांती के अंतिम साक्ष्य भदंत गलगेदर प्रग्यानन्द महाथेर का विगत 30 नवम्बर’2017 को लखनऊ में निधन हो गया. विगत 100 वर्षों में कदाचित यह पहला अवसर है जब भारत में किसी बौद्ध भिक्खु का पार्थिव शरीर 18 दिन तक रख कर पूजा-वन्दना, परित्त पाठ किया जा रहा है.
अब तक उत्तर प्रदेश के महामहिम राज्यपाल श्री राम नाईक, मुख्यमंत्री मा. योगी आदित्यनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री शुश्री मायावती, उपराष्ट्रपति भारत श्री वेंकइया नायडू भदंत गलगेदर प्रग्यानन्द महाथेर के पार्थिव शरीर का दर्शन कर चुके हैं तथा सूत्रानुसार राष्ट्रपति एवं मा. प्रधानमंत्री के भी आने की संभावना है..

भगवान बुद्ध के पावन शरीर का अंतिम संस्कार 7 दिन के बाद हुआ था. परमहंस योगानन्द का अंतिम संस्कार 6 दिन के बाद हुआ था. योगी श्रीअरविंद का संस्कार 5 दिन के बाद हुआ था. परम पावन दालाई लामा के गुरु जमयंग ख्येंत्से का अंतिम संस्कार 6 महीने बाद हुआ था. थाईलैंड के अरहत लांगफा सानोंग का संस्कार 100 दिन के बाद हुआ था. मदर टेरेसा का संस्कार 6 दिन के बाद हुआ था. ऐसे 200 से ज्यादा लिखित उदाहरण उपलब्ध हैं. पूज्य भदंत का पावन पार्थिव शरीर 16 दिसम्बर तक अंतिम दर्शनार्थ लखनऊ में रहेगा. सदकर्मी-पुन्यकर्मी होते हैं वह लोग ज़िनके पार्थिव शरीर को भी उनके प्रेमी-श्रद्धालु अधिक से अधिक दिन रखना चाहते हैं वरना तो घर वाले भी ‘ जल्दी उठाओ जल्दी उठाओ…’ करने लगते हैं…पावन पुरुषों के पार्थिव शरीर को रख कर पुजा-वन्दना, परित्त पाठ की प्राचीन बौद्ध परम्परा है…इसी परम्परा में 3 दिसम्बर’2017 को पूर्णिमा के दिन उपासक संघ द्वारा पूज्य भदंत के पावन पार्थिव शरीर के सान्निद्य में ध्यान साधना तथा धम्म्मपद पाठ होगा. निवेदन है कि समस्त उपासक-उपसिकायें सफेद वस्त्रों में प्रतिभाग करें.

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