आपको क्या लगता है. भारत के नेशनल न्यूज चैनलों पर पहला दलित एंकर हम कब देख पाएंगे? और कितने साल तक इंतजार करना होगा?…Dilip C Mandal


आपको क्या लगता है. भारत के नेशनल न्यूज चैनलों पर पहला दलित एंकर हम कब देख पाएंगे?

और कितने साल तक इंतजार करना होगा?

20 करोड़ से ज्यादा की दलित आबादी नेशनल चैनलों के लिए एक एंकर क्यों नहीं पैदा कर पा रही है? राष्ट्रपति से लेकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और ज्ञान के तमाम क्षेत्र में झंडे गाड़ने वाला समाज मीडिया के सामने जाकर लंगड़ा क्यों हो जाता है.

बोलना नहीं आता?
चेहरा सुंदर नहीं है?
रंग सांवला है?
नाक मोटी है?
ओठ बेढब हैं?
स्मार्ट नहीं है?
ज्ञान नहीं है?

ये सब तो है. फिर समस्या कहां है?

अमेरिकी चैनलों पर कई टॉप एंकर ब्लैक हैं. तो भारत में क्या रंगभेद से भी बड़ी कोई समस्या है?

कहीं यह एक्सक्लूसन यानी जानबूझकर दलितों को बाहर रखने का मामला तो नहीं? इन चैनलों की प्रगतिशीलता की हद यह है कि वे दलितों के बारे में बात तो कर लेंगे, लेकिन किसी दलित को मौका नहीं देंगे.

अगर यह बात आपको परेशान नहीं करती तो आप …अब मैं क्या कहूं? आप वही हैं.

भीमा कोरेगाँव पर NDTV INDIA की आज की बहस कादम्बिनी “शर्मा” और अभिषेक “शर्मा” के बीच पूर्वाग्रही बातचीत में चली गई। दोनों “शर्माओं” ने मिलकर सब चौपट कर दिया। मूल बात को इन दोनों ने उजागर ही नहीं होने दिया।

हालांकि रतनलाल जी और प्रकाश अम्बेडकर जी ने अपनी बातें दमदार तरीके से रखीं… लेकिन मीडिया ने साबित किया कि वह अपने “जनेऊ” से बाहर नहीं निकलेगा… डॉ. Sunil Kumar Suman

 

 

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