२६ जनवरी गणतंत्र दिवस की सभी भारतवासियों को बहुत बहुत बधाई, इस दिन भारत में बाबा साहब डॉ आंबेडकर द्वारा बनाया हुआ संविधान लागू हुआ था, पर इस देश का मीडिया और सरकार बाबा साहब को याद क्यों नहीं करते, अगर किसी सवर्ण ने बनाया होता तब भी यही उदासीनता होती ?

गणतंत्र दिवस की सभी भारतवासियों को बहुत बहुत बधाई एवं मंगलकामनाए।
२६ जनवरी गणतंत्र दिवस की सभी भारतवासियों को बहुत बहुत बधाई, इस दिन भारत में बाबा साहब डॉ आंबेडकर द्वारा बनाया हुआ संविधान लागू हुआ था, पर इस देश का मीडिया और सरकार बाबा साहब को याद क्यों नहीं करते, अगर किसी सवर्ण ने बनाया होता तब भी यही उदासीनता होती ?
कर्णाटक के मुख्य मंत्री श्री सिद्धराममया जी ने अख़बारों में बाबासाहब को याद करते हुए बड़े बड़े बैनर निकले हैं , सारा अम्बेडकरवादी समाज आपका आभारी है
26 जनवरी के महानायक भारतीय संविधान के रचयिता परम पूज्य बोधिसत्व भारत रत्न बाबासाहेब डॉ भीमरावअम्बेडकर जी को कोटि कोटि नमन व वंदन
यह कैसा गणतंत्र दिवस ?*
 कितने वर्षों से हम गणतंत्र दिवस मनाते रहे पर उस शख्स को ,उस महामानव को ,उस युगपुरुष को, क्यों याद नहीं किया जाता
*किसी भी देश का आजाद होना अलग बात है पर उस आजादी को कायम रखना और भी अलग बात है हमारा देश कई बार गुलाम हुआ है कभी तुर्को, कभी मुगलों, कभी अंग्रेजों से ,*
आज हम इस आजादी को कायम रख पाए हैं इसमें संविधान का बहुत बड़ा योगदान है आजादी के बाद हमारी सबसे बड़ी समस्या थी कि *देश को आगे कैसे चलाया जाए  संविधान कौन लिखेगा !संविधान कैसा होगा?*  और आज हम  गणतंत्र दिवस मनाना  ही नहीं समझ पाए
 *गणतंत्र दिवस पर  कई विद्यालयों में ,कई शासकीय कार्यालयों में बाबा साहेब की तस्वीर आज भी नहीं है आप जिस पाठशाला में पढ़ते हैं क्या वहां पर उस वक्त बाबा साहब की तस्वीर थी ?*
कहीं ना कहीं हम बाबा साहब की तस्वीर पर माल्यार्पणया बाबा साहब अमर रहे यह भी नहीं कह सकते
 *जिस महान आदमी ने 2 साल 11 महीने और 18 दिन लगातार अपनी सेहत खराब होने के बावजूद भी दिन रात एक कर के बहुत ही कम समय में सविधान लिखा*
ऐसा सविधान जो दुनिया का सबसे बड़ा और श्रेष्ठ संविधान है
इतने आर्टिकल अमेरिका के संविधान में भी नहीं है
हम गणतंत्र दिवस मनाते हुए बाबा साहब अमर रहे यह भी नहीं कहते तो हमें अपने आप पर  शर्म आनी चाहिए
*उस शख्स को ,उस महान आत्मा को, हमने कैसे भुला दिया?*
मित्रों आप से अनुरोध है कि आने वाले हर गणतंत्र दिवस पर हम बाबा साहब की तस्वीर को माल्यार्पण करें एवं स्कूली बच्चों और लोगों को बाबा साहब , व हमारे संविधान के बारे मे बताएं  *जो हमें   समता स्वतन्त्रता बन्धुता और न्याय सिखाता है*
  हम पूरी ईमानदारी व पूरी समझदारी से गणतंत्र दिवस का पर्व मनाए
*आप सभी को गणतंत्र दिवस की अग्रिम हार्दिक-हार्दिक शुभकामनाएं*
 बाबा साहब अमर रहे ,
बाबा साहब अमर रहे,
*जय भीम जय भारत जय संविधान गणतंत्र दिवस अमर रहे*

आज जब संविधान बदलने की अफवाहे या बातें चल रही है ऐसे में संविधान के बारे में जननां जरूरी है |भारतीय संविधान सभा से जुड़े महत्‍वपूर्ण तथ्‍य और जानकारी

आज जब संविधान बदलने की अफवाहे या बातें चल रही है ऐसे में संविधान के बारे में जननां जरूरी है |क्या संविधान लिखकर वाकई कोई कारनामा किया था बाबा साहेब ने? चलो इसबार सच्चाई जान लेते हैं।
1895 में पहली बार बाल गंगाधर तिलक ने विधान लिखा था अब इससे ज्यादा मैं इस संविधान पर न ही बोलूँ वह ज्यादा बेहतर है, फिर 1922 में गांधीजी ने संविधान की मांग उठाई,  मोती लाल नेहरू, मोहम्मद अली जिन्ना और पटेल-नेहरू तक न जाने किन किन ने और कितने संविधान पेश किये । ये आपस् में ही एक प्रारूप बनाता तो दूसरा फाड़ देता, दुसरा बनाता तो तीसरा फाड़ देता और  इस तरह 50 वर्षों में कोई भी व्यक्ति भारत का एक (संविधान) का प्रारूप ब्रिटिश सरकार के सम्पक्ष पेश नही कर सके। उससे भी मजे की बात कि संविधान न अंग्रेजों को बनाने दिया और न खुद बना सके। अंग्रेजों पर यह आरोप लगाते कि तुम संविधान बनाएंगे तो उसे हम आजादी के नजरिये से स्वीकार कैसे करें। बात भी सत्य थी लेकिन भारत के किसी भी व्यक्ति को यह मालूम नही था कि इतने बड़े देश का संविधान कैसे होगा और उसमे क्या क्या चीजें होंगी? लोकतंत्र कैसा होगा? कार्यपालिका कैसी होगी? न्यायपालिका कैसी होगी? समाज को क्या अधिकार, कर्तव्य और हक होंगे आदि आदि..
अंग्रेज भारत छोड़ने का एलान कर चुके थे लेकिन वो इस शर्त पर कि उससे पहले तुम भारत के लोग अपना संविधान बना लें जिससे तुम्हारे भविष्य के लिए जो सपने हैं उन पर तुम काम कर सको। इसके बावजूद भी कई बैठकों का दौर हुआ लेकिन कोई भी भारतीय संविधान की वास्तविक रूपरेखा तक तय नही कर सका। यह नौटँकीयों का दौर खत्म नही हो रहा था,साइमन कमीशन जब भारत आने की तैयारी में था उससे पहले ही भारत के सचिव लार्ड बर्कन हेड ने भारतीय नेताओं को चुनौती भरे स्वर में भारत के सभी नेताओं, राजाओं और प्रतिनिधियों से कहा कि इतने बड़े देश में यदि कोई भी व्यक्ति संविधान का मसौदा पेश नही करता तो यह दुर्भाग्य कि बात है। यदि तुम्हे ब्रिटिश सरकार की या किसी भी सलाहकार अथवा जानकार की जरूरत है तो हम तुम्हारी मदद करने को तैयार है और संविधान तुम्हारी इच्छाओं और जनता की आशाओं के अनुरूप हो। फिर भी यदि तुम कोई भी भारतीय किसी भी तरह का संविधानिक मसौदा पेश करते हैं हम उस संविधान को बिना किसी बहस के स्वीकार कर लेंगे। मगर यदि  तुमने संविधान का मसौदा पेश नही किया तो संविधान हम बनाएंगे और उसे सभी को स्वीकार करना होगा।
यह मत समझना कि आजकल जैसे कई संगठन संविधान बदलने की बातें करते हैं और यदि अंग्रेज हमारे देश के संविधान को लिखते तो हम आजादी के बाद उसे संशोधित या बदल देते। पहले आपको यह समझना आवश्यक है कि जब भी किसी देश का संविधान लागू होता है तो वह संविधान उस देश का ही नही मानव अधिकार और सयुंक्त राष्ट्र तथा विश्व समुदाय के समक्ष एक दस्तावेज होता है जो देश का प्रतिनिधित्व और जन मानस के अधिकारों का संरक्षण करता है। दूसरी बात किसी भी संविधान के संशोधन में संसद का बहुमत और कार्यपालिका तथा न्यायपालिका की भूमिका के साथ समाज के सभी तबकों की सुनिश्चित एवं आनुपातिक भागीदारी भी अवश्य है। इसलिए फालतू के ख्याल दिमाग से हटा देने चाहिए। दुसरा उदाहरण।
जापान एक विकसित देश है। अमेरिका ने जापान के दो शहर हिरोशिमा और नागासाकी को परमाणु हमले से ख़ाक कर दिया था उसके बाद जापान का पुनरूत्थान करने के लिए अमेरिका के राजनेताओं, सैन्य अधिकारियों और शिक्षाविदों ने मिलकर जापान का संविधान लिखा था। फरवरी 1946 में कुल 24 अमेरिकी लोगों ने जापान की संसद डाइट के लिए कुल एक सप्ताह में वहां के संविधान को लिखा था जिसमे 16 अमेरिकी सैन्य अधिकारी थे। आज भी जापानी लोग यही कहते है कि काश हमे भी भारत की तरह अपना संविधान लिखने का अवसर मिला होता। बावजूद इसके जापानी एक धार्मिक राष्ट्र और अमेरिका एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र होते हुए दोनों देश तरक्की और खुशहाली पर जोर देते हैं।
लार्ड बर्कन की चुनौती के बाद भी कोई भी व्यक्ति संवैधानिक मसौदा तक पेश नही कर सका और दुनिया के सामने भारत के सिर पर कलंक लगा। इस सभा में केवल कांग्रेस ही शामिल नही थी बल्कि मुस्लिम लीग, हिन्दू महासभा जिसकी विचारधारा आज बीजेपी और संघ में सम्मिलित लोग थे। राजाओं के प्रतिनिधि तथा अन्य भी थे। इसलिए नेहरू इंग्लैण्ड से संविधान विशेषज्ञों को बुलाने पर विचार कर रहे थे। ऐसी बेइज्जती के बाद गांधीजी को अचानक डॉ अम्बेडकर का ख्याल आया और उन्हें संविधान सभा में शामिल करने की बात की।
इस समय तक डॉ अम्बेडकर का कहीं कोई जिक्र तक नही था, सरदार पटेल ने यहाँ तक कहा था कि डॉ अम्बेडकर के लिए दरबाजे तो क्या हमने खिड़कियाँ भी बन्द की हुई है अब देखते हैं वो कैसे संविधान समिति में शामिल होते हैं। हालाँकि संविधान के प्रति समर्पण को देखते हुए पटेल ने बाबा साहेब को सबसे अच्छी फसल देने वाला बीज कहा था। कई सदस्य, कई समितियां, कई संशोधन, कई सुझाव और कई देशों के विचारों के बाद केवल बीएन राव के प्रयासों पर जिन्ना ने पानी फेर दिया जब जिन्ना ने दो दो संविधान लिखने पर अड़ गए। एक पाकिस्तान के लिए और एक भारत के लिए।
पृथक पाकिस्तान की घोषणा के बाद पहली बार 9 दिसम्बर 1946 से भारतीय संविधान पर जमकर कार्य हुए। इस तरह डॉ अम्बेडकर ने मसौदा तैयार करके दुनिया को चौंकाया। आज वो लोग संविधान बदलने की बात करते हैं जिनके पूर्वजों ने जग हंसाई करवाई थी। मसौदा तैयार करने के पश्चात आगे इसे अमलीजामा पहनाने पर कार्य हुआ जिसमें भी खूब नौटँकियां हुई .. अकेले व्यक्ति बाबा साहेब थे जिन्होंने संविधान पर मन से कार्य किये। पूरी मेहनत और लगन से आज ही के दिन पुरे 2 साल 11 माह 18 दिन बाद बाबा साहेब ने देशवासियों के सामने देश का अपना संविधान रखा जिसके दम पर आज देश विकास और शिक्षा की ओर अग्रसर बढ़ रहा है और कहने वाले कहते रहें मगर बाबा साहेब के योगदान ये भारत कभी नही भुला सकता है। हम उनको संविधान निर्माता के रूप तक सीमित नही कर सकते, आर्किटेक्ट ऑफ़ मॉडर्न इंडिया यूँ ही नही कहा गया कुछ तो जानना पड़ेगा उनके योगदान, समर्पण, कर्तव्य और संघर्षों को।

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