यूपी के इलाहाबाद में सरेआम LLB कर रहे दलित छात्र दिलीप सरोज की हत्या की खबर से सारे देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं कहीं रोष है कहीं मौन कहीं मार्च अदि निकाला जा रहे हैं सोशल मीडिया पर जबरदस्त विद्रोह हो रहा है,#JusticeForDilipSaroj ….Dilip C Mandal

 

 

 

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यूपी के इलाहाबाद में सरेआम LLB कर रहे दलित छात्र दिलीप सरोज की हत्या की गई,अख़बारों की कटिंग संलग्न है । सवाल उठता है कि उन जतिवादी हत्यारों को ऐसा करने का साहस कौन दे रहा है?… Dilip C Mandal FB post

देश की सबसे बुरी खबर।

पैर छू जाने पर 21वीं सदी में आदमी की हत्या कर दी गई!

यूपी के इलाहाबाद में जिस तरह सरेआम LLB कर रहे दलित छात्र दिलीप सरोज की हत्या की गई, उससे सवाल उठता है कि उन जतिवादी हत्यारों को ऐसा करने का साहस कौन दे रहा है?

************ से सवाल है कि – “कहीं वे आप तो नहीं? आपने ही तो कहीं इन हत्यारों का हौसला नहीं बढाया है?”

दलित और पिछड़ों का एक हिस्सा, धर्म के नाम पर मारता है और जाति के नाम पर मार दिया जाता है.

जो समाज अपने बच्चों और बच्चियों को, युवाओं को नहीं बचा सकता, बचाने की कोशिश नहीं करता, वह गुलाम रहने के लिए अभिशप्त है।इलाहाबाद दिलीप सरोज हत्याकांड।

सिर्फ संविधान के सहारे दलितों पर अत्याचार खत्म होना होता तो कब का खत्म हो चुका होता,जब तक दलित इनको इनकी भाषा में नहीं समझायेगा गुलाम ही रहेगा।

इलाहाबाद के दिलीप सरोज हत्याकांड के खिलाफ रोहित वेमुला और गुजरात के ऊना जैसे विशाल लोकतांत्रिक आंदोलन और बड़े जन उभार की जरूरत है। वरना वे हमारे युवाओं को मार डालेंगे। सबको मार डालेंगे। कोई नहीं बचेगा। सबका नंबर लगेगा।

राष्ट्रीय आंदोलन समय की मांग है। पूरे देश में विरोध होना चाहिए। हर शहर में, हर कस्बे में।

अगर हिंसा एक आम इंसानी बुराई है तो ऐसी खबरें भी आती कि

– दलितों ने एक ब्राह्मण युवक को पीटकर मार डाला।

– या उसकी आंख फोड़ दी।

– या कि पिछड़ों ने ठाकुर या भूमिहार युवक को मारकर उसे पेड़ पर टांग दिया।

– जीप से घसीटकर मार डाला।

भारत की कुछ जातियां ज्यादा ही हिंसक, बर्बर और असभ्य हैं।

भारत SC, ST, OBC, माइनॉरिटी और सभी समुदायों की महिलाओं के कारण लोकतांत्रिक है।

यहां जिस जंगल राज के अवशेष हैं, वह सवर्णों का कुकर्म है।

 

हो सकता है कि मजहब आपस में दुश्मनी करना नहीं सिखाता, लेकिन दुनिया का इतिहास यही रहा है कि हर धर्म का दूसरे धर्म से टकराव का रिश्ता है. एक की कीमत पर ही दूसरे को बढ़ना है. इसलिए दो धर्मों के लोगों के बीच नफरत की बात एक हद तक समझ में आती है.

लेकिन

हिंदू धर्म दुनिया का अकेला धर्म है, जो अपने ही धर्म के लोगों के बीच इतनी नफरत पैदा करता है कि पैर छू देने भर एक आदमी दूसरे आदमी की हत्या कर सकता है.

(या फिर दूसरी बात यह हो सकती है कि नीचे की जातियां हिंदू हैं ही नहीं.)

हिंदू धर्म की हर जाति दूसरी जाति से नफरत पालती है. खुद को बड़ा और दूसरे को नीच समझती है. एक दूसरे का हक मारती है और इसे धार्मिक आधार पर सही भी ठहराती ही.

हिंदू धर्म में नफरत को धार्मिक मान्यता है,

#JusticeForDilipSaroj

2 मिनट का मौन! इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग में अभी अभी हुई शोक सभा. यह एक सामूहिक दुख और क्रोध का क्षण है.

 

वे यादव के लिए आए,
मैं निश्चिंत रहा क्योंकि मैं यादव नहीं था,
फिर वे पटेलों के लिए आए,
लेकिन मैं तो पटेल नहीं था, बच गया.
फिर वे जाटवों के लिए आए,
मैं नसीब वाला निकला, मैं जाटव नहीं था,
फिर वे मौर्यों को लिए आए,
मैं फिर बच गया, मैं मौर्य नहीं था,
फिर वे मुसलमानों के लिए आए,
मैं मुसलमान नहीं था, बच गया.
वे महारों के लिए आए, मैं महार नही था.
फिर वे निषादों के लिए आए,
मैं फिर बच गया,
फिर वे पासियों के लिए आए,
मैं पासी नहीं था, बच गया,
फिर वे खटिकों के लिए आए,
मैं खटिक नहीं था, बच गया,
फिर वे ईसाइयों के लिए आए,
मैं ईसाई नहीं था,
वे आदिवासियों के लिए आए
मैं आदिवासी नहीं था.
फिर वे कुम्हारों के लिए आए,
मैं कुम्हार न होने के कारण बच गया.
वे जिनके लिए भी आए, मैं वह नहीं था.

फिर एक दिन वे मेरे लिए आए
अब मेरे साथ कोई नहीं था.

#JusticeForDilipSaroj