आज गुरु पूर्णिमा है। बौद्ध ग्रंथों के अनुसार गौतम बुद्ध ने सारनाथ पहुँचकर आषाढ़ पूर्णिमा के दिन अपने प्रथम पाँच शिष्यों को सर्वप्रथम शिक्षा प्रदान की थी। वह दिन आज है। इसे धम्म – चक्क – पवत्तन कहा जाता है।…Dilip C Mandal

आज गुरु पूर्णिमा है। बौद्ध ग्रंथों के अनुसार गौतम बुद्ध ने सारनाथ पहुँचकर आषाढ़ पूर्णिमा के दिन अपने प्रथम पाँच शिष्यों को सर्वप्रथम शिक्षा प्रदान की थी। वह दिन आज है। इसे धम्म – चक्क – पवत्तन कहा जाता है।

बौद्ध परंपरा में आषाढ़ पूर्णिमा से वर्षावास प्रारंभ होता है और आश्विन की पूर्णिमा को समाप्त होता है। यह वर्षावास 4 माह का होता है। इसलिए इसे चतुर्मास भी कहते हैं।

चतुर्मास में बौद्ध भिक्षु किसी एक बौद्ध विहार में रहकर अध्ययन – अध्यापन करते हैं, ध्यान – साधना करते हैं। फिर वर्ष के शेष महीनों में चारिका के लिए निकल पड़ते हैं।

पालि में वस्स का अर्थ साल भी होता है, वर्षा भी होता है। तब वर्षाकाल से ही वर्ष की नाप होती थी। इसीलिए वस्स का अर्थ साल और वर्षा दोनों होता है। वर्ष इसी वस्स का अपभ्रंश है।

विश्वगुरु गौतम बुद्ध को गुरु पूर्णिमा के दिन नमन!!!

 

 

धम्म चक्क पवत्तन दिवस
आज धम्म चक्क पवत्तन दिवस है और कुछ लोग इसे आषाढि पुर्णिमा या गुरु पूर्णिमा के नाम से भी जानते है। बौद्ध धम्म मे आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज से वर्षावास प्रारम्भ हो रहा है। आज के दिन ही तथागत बुद्ध ने सारनाथ (इसि पत्तन मृगदाव), वाराणसी में बहुजन हिताय-बहुजन सुखाय का प्रथम उपदेश पञ्चवर्गीय भिक्खुओं को दिया और इस प्रकार आज के दिन ही भिक्खु संघ की स्थापना हुई। तब से लेकर अपने महापरिनिर्वाण तक तथागत बुद्ध रुके नहीं हमेशा चारिका करते रहे और धम्मदेशना देते रहे । केवल वर्षावास के लिए तथागत बुद्ध रुकते थे नहीं तो हमेशा बहुजन हिताय-बहुजन सुखाय के लिए चारिका करते रहे। इसलिए बाबा साहब डा अंबेडकर को तथागत बुद्ध की चलती हुई प्रतिमा(Walking Buddha) सबसे पसंद थी क्योकि तथागत बुद्ध पूरे जीवन भर चलते रहे और रुके नहीं।
आज के ही दिन तथागत बुद्ध ने भिक्खुओ को धम्मदेशना करते हुये यह गाथा सारनाथ मे (धम्म चक्क पवत्तन सूत्र) कही कि,
चरथ भिक्कवे चारिकं बहुजन हिताय बहुजन सुखाय।।
लोकांनुकंपाय, अत्थाय हिताय, सुखाय देव मनुस्सान।।
देसेथ भिक्खवे धम्म… आदि कल्याण…. मज्झे कल्याण।।
परियोसान कल्याण। सात्थं सव्यज्जनं केवल
परिपुण्णं परिशुद्ध ब्रम्हचरियं पकासेथ।।
अर्थात ऐ भिक्खुओ जाओ चरिका करो। उस विचारधारा के लिए जो बहुजनो के हित में है, जिस विचारधारा में बहुजनों का सुख है, जो विचारधारा शुरू में बहुजनो का हित चाहती है, जो मध्य में बहुजनों का हित चाहती है और अन्त में भी जिस विचारधारा मे बहुजनों का हित है, उसी विचारधारा को स्थापित करो। दो एक दिशाओं मे मत जाओ। अलग अलग दिशाओ मे और जिस धम्म मे सबका कल्याण है उस धम्म को सबको बताओ।
भिक्खुओ ! “कामवासना” और “शरीरपीड़ा” इन दो अतियों से बचो । मैंने नया मध्यम मार्ग खोज निकाला है, जो नई दृष्टि देनेवाला है। वह यही “आर्य आष्टांगिक मार्ग” है।
1- सम्यक दृष्टि
2. सम्यक संकल्प
3 सम्यक वाचा
4 सम्यक कर्म
5 सम्यक आजीविका
6 सम्यक व्यायाम
7-सम्यक स्मृति
8 सम्यक समाधी:
“मेरे धम्म का उद्देश्य विश्व की निर्मिती करना नही है, उसकी पुनर्रसंरचना करना है, बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय, लोकानुकम्पाय, आदि कल्याण, मध्य कल्याण और अन्त्य कल्याण करना है तथा जो असामान्य (देव (मुनि), बुद्धिमान) और सामान्य (श्रमण, गृहस्थ, अनाड़ी) इन लोगों के लिए सुखकर है…वह दुख निरोध गामिनी, प्रतिपदा सत्य, “आर्य अष्टांगिक मार्ग” है.”

इस महान अवसर पर सभी बौद्ध उपासकों को धम्म चक्क पवत्तन दिवस के शुभ अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं…..!!!

नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ।
नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ।
नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ।

त्रिशरण

बुद्धं सरणं गच्छामि ।
धम्मं सरणं गच्छामि ।
संघं सरणं गच्छामि ।

दुतियम्पि बुद्धं सरणं गच्छामि ।
दुतियम्पि धम्मं सरणं गच्छामि ।
दुतियम्पि संघं सरणं गच्छामि ।

ततियम्पि बुद्धं सरणं गच्छामि ।
ततियम्पि धम्मं सरणं गच्छामि ।
ततियम्पि संघं सरणं गच्छामि ।

पंचसील
पाणातिपाता वेरमणि, सिक्खापदं समादियामि ।
अदिन्नादाना वेरमणि, सिक्खापदं समादियामि ।
कामेसु मिच्छाचारा वेरमणि, सिक्खापदं समादियामि ।
मुसावादा वेरमणि, सिक्खापदं समादियामि ।
सुरा-मेरय-मज्ज पमादठ्ठाना वेरमणि, सिक्खापदं समादियामि ।

बौद्ध धर्म दुनियाँ का अनोखा धर्म है, जो भारत में उत्पन्न हुआ, पूरे विश्व मे फैला, फूला, और फला, चाहे सम्राट अशोक का युग रहा हो, कनिष्क, हर्ष वर्धन या बौद्ध पाल का शासन युग रहा हो, भारत सोने की चिड़िया कहलाया, और जब – जब जाति या वर्ण वादी – कट्टर पंथियों का शासनकाल रहा, भारत गुलाम बना ! बौद्ध धर्म भारत को छोड़ कर दूसरे देशों में फैला, फूला और फला, 24 देशों का राष्ट्रीय धर्म बना और इसके प्रचार-प्रसार के लिये ऐक बूँद भी रक्त नहीँ बहा। इसका कारण है कि बौद्ध धर्म – त्याग , करुणा , दया , भाईचारा और मेत्री का धर्म है ! बौद्ध धर्म की विशेषता है कि यह विज्ञान सम्मत धर्म है, ज्ञान, चिंतन की इसमें प्रधानता है ! – बौद्ध धर्म वर्ण , जाति , ऊंच नीच – छूआ छूत आदि सामाजिक बुराइओ से दूर है। दुनियाँ के बैज्ञानिकों ने यह सिद्ध कर दिया है कि बुद्ध और उनका धर्म ही इस कराहती हुई मानवता को बचा सकता है और विनाश की औऱ बढ़ रहे संसार की रक्षा कर सकता है ! बौद्ध विकसित देश जापान इसका जीता – जागता उदहारण है ! भारत इससे सबक ले !

एक बार पुनः सभी बौद्ध उपासकों एवं उपासिकाओं को धम्म चक्क पवत्तन दिवस के शुभ अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं…..!!!
नमो बुद्धाय