यह पोस्ट मैं उस माताएं बहनें एवं बेटियों के लिए लिख रहा हूं जिनको लगता है कि यह सारी सुविधाएं और अधिकार मुफ्त में मिले हैं ,किसी देवीए शक्ति पूजा पाठ व्रत से मिलते हैं..Kailash Das


जय भीम जय संविधान
मनुस्मृति और संविधान
यह पोस्ट मैं उस माताएं बहनें एवं बेटियों के लिए लिख रहा हूं जिनको लगता है कि यह सारी सुविधाएं और अधिकार मुफ्त में मिले हैं ,किसी देवीए शक्ति पूजा पाठ व्रत से मिलते हैं :-
ब्राह्मणवादी धर्मग्रन्थ और संविधान ” मनुस्मृति” में लिखा हुआ है:
नारी को पूजा पाठ व्रत उपवास करने का कोई अधिकार नहीं है
शिक्षा प्राप्त करने का कोई अधिकार नहीं है श्रृंगार करने का कोई अधिकार नहीं है ,,
और एक शूद्र बाबा साहब डॉ आंबेडकर के द्वारा लिखे गए संविधान में लिखा हुआ है
नारी का भी उतना ही अधिकार है जितना एक पुरुष का,,
नारी को भी शिक्षा लेने का अधिकार है नारी को भी शिक्षित होकर समाज में पूर्ण रूप से जिने का अधिकार है ,,
तुम जो अच्छे कपड़े पहनती हो अच्छे शिक्षा हासिल करती हो अपने इच्छा से हर जगह स्वतंत्र घुमती हो यह सब सारी सुविधाएं संविधान के बदौलत तुम्हें मिली मगर जिस संविधान की बदौलत यह अधिकार तुम्हें मिला है,,
उस महापुरुष का एक भी फोटो तुम्हारे घरों में नहीं मिलेंगे उस महापुरुष का कितने तारीख कौन सा महीने में जन्म हुआ वह भी तुम्हें पता नहीं ,,
मगर बरहामणो के द्वारा बनाए गए रूढ़ी वादी परम्परा तुम्हें हमेशा याद होते हैं व्रत त्योहार के बारे में हमेशा याद रहते हैं जो हमेशा खर्चीले होते हैं और वह रूढ़ी वादी परम्परा का नाम त्योहारो के रूप में दिया गया है
जैसे,, देवी पूजा दीपावली छठ पूजा रामनवमी होली तो देहात क्षेत्र में अखारी पूजा अगहनी पूजा ठकुराही पूजा सुरजाही पूजा इत्यादि और यह सब बरहामणो के द्वारा बनाए गए रूढ़ी वादी परम्परा है अगर घर में पैसे नहीं होते तो कर्जा करके इस रुढ़ी वादी परम्परा को निभाते हैं और जब तुम्हारे बच्चे की विद्यालय में दाखिला के लिए पैसे लगते हैं तो उसके लिए पैसों की बदोवश्त नहीं कर पाते हो उसे टाल बटोल कर देते हो अगर पूजा पाठ उपवास व्रत करने से तुम्हारे बच्चो को शिक्षा मिलती है तो शौक से निभाओ रूढ़ी वादी परम्परा को
पर एक बात जरूर याद रखें कि शिक्षा मंदिरों में पूजा अर्चना से नहीं बल्कि विद्यालय में पुस्तक पढ़ने से मिलती है।
बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर ने शिक्षा प्राप्त करने के लिए मंदिरों में पुतलों के सामने कभी हाथ जोड़कर विनती नहीं किया था उन्होंने स्कूल कोलेज को ही भगवान का मंदिर माना था
और शिक्षा प्राप्त करके उन्होंने रूढ़ी वादी परम्परा को खत्म करके यह सब अधिकार तुम्हें दिलाया न कि पूजा पाठ उपवास व्रत करके ,,

जय संविधान जय विज्ञान
Kailash Das

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