गौतम बुद्ध के बारे में पचास छोटे आसान सवाल जवाब

बुद्ध की 50 बातें।
1. बौद्ध धर्म के संस्थापक कौन थे ? – गौतम बुद्ध
2. गौतम बुद्ध का जन्म कब हुआ था ? – 563 ई०पू०
3. गौतम बुद्ध का जन्म स्थान का नाम क्या है ? – कपिलवस्तु के लुम्बिनी नामक स्थान
4. किसे Light of Asia के नाम से जाना जाता है ? – महात्मा बुद्ध
5. गौतम बुद्ध के बचपन का नाम क्या था ? – सिद्धार्थ
6. गौतम बुद्ध के पिता का नाम क्या था ? – शुद्धोधन
7. इनके मा का नाम था ? – मायादेवी
8. महात्मा बुद्ध के सौतेली मा का नाम क्या था ? – प्रजापति गौतमी
9. महात्मा बुद्ध के पत्नी का नाम क्या था ? – यशोधरा
10. गौतम बुद्ध के पुत्र का नाम क्या था ? – राहुल
11. गौतम बुद्ध के सारथी का नाम क्या था ? – चन्ना
12. गौतम बुद्ध कितने वर्ष की अवस्था में गृह त्याग कर सत्य की खोज में निकाल पड़े ? – 25 वर्ष
13. सिद्धार्थ के गृह त्याग की घटना को बौद्ध धर्म में क्या कहा जाता है ? – महाभिनिष्क्रमण
14. बुद्ध ने अपना प्रथम गुरु किसे बनाया था ? – आलारकलाम
15. बुद्ध ने अपने प्रथम गुरु से कौन सी शिक्षा प्राप्त की ? – सांख्य दर्शन
16. गौतम बुद्ध के दुसरे गुरु का नाम क्या था ? – रुद्रक
17. उरुवेला में कितने ब्राह्मण बुद्ध के शिष्य बने ? – पांच
18. बुद्ध के पांचों शिष्य के नाम क्या थे ? – कौण्डिन्य, वप्पा, भादिया, अस्सागी और महानामा
19. 35 वर्ष की आयु में बिना अन्न-जल ग्रहण किए आधुनिक बोधगया में निरंजना (फल्गु) नदी के तट पर, पीपल वृक्ष के निचे कितने वर्ष की कठिन तपस्या के बाद बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई ? – 6 वर्ष
20. ज्ञान प्राप्ति के बाद सिद्धार्थ को क्या कहा गया ? – गौतम बुद्ध और तथागत
21. सिद्धार्थ का गोत्र क्या था ? – गौतम
22. गौतम बुद्ध को किस रात्रि के दिन ज्ञान की प्राप्ति हुई ? – वैशाखी पूर्णिमा
23. गौतम बुद्ध ने अपना पहला उपदेश कहाँ दिया था ? – वाराणसी के निकट सारनाथ
24. उपदेश देने की इस घटना को क्या कहा जाता है ? – धर्मचक्रप्रवर्तन
25. महात्मा बुद्ध ने अपने उपदेश को किस भाषा में दिया ? – पाली
26. बौद्धधर्म के त्रिरत्न कौन-कौन है ? – बुद्ध, धम्म और संघ
27. बौद्ध धर्म में प्रविष्टि को क्या कहा जाता था ? – उपसम्पदा
28. बुद्ध के अनुसार देवतागण भी किस सिद्धान्त के अंतर्गत आते है ? – कर्म के सिद्धान्त
29. बुद्ध ने तृष्णा की घटना को क्या कहा है ? – निर्वाण
30. बुद्ध के अनुयायी कितने भागों में बंटे थे ? – दो भिक्षुक और उपासक
31. जिस स्थान पर बुद्ध ने ज्ञान की प्राप्ति की थी, वह स्थान क्या कहलाया ? – बोधगया
32. महात्मा बुद्ध की मृत्यु कब और कहाँ हुई थी ? – 483 ई०पू० में कुशीनगर उत्तर प्रदेश
33. महात्मा बुद्ध की मृत्यु की घटना को बौद्ध धर्म में क्या कहा गया है ? – महापरिनिर्वाण
34. महात्मा बुद्ध द्वारा दिया गया अंतिम उपदेश क्या था ? – “सभी वस्तुए क्षरणशील होती है अतः मनुष्य को अपना पथ-प्रदर्शक स्वयं होना चाहिए
35. प्रथम बौद्ध संगीति किसके शासन काल में हुआ था ? – अजातशत्रु
36. तृतीय बौद्ध संगीति कहाँ हुआ था ? – पाटलिपुत्र
37. गौतम बुद्ध के सबसे प्रिय और आत्मीय शिष्य कौन थे ? – आनंद
38. बौद्ध धर्म को अपनाने वाली प्रथम महिला कौन थी ? – बुद्ध की माँ प्रजापति गौतमी
39. भारत से बाहर बौद्ध धर्म को फैलाने का श्रेय किस राजा को जाता है ? – सम्राट अशोक
40. बुद्ध के प्रथम दो अनुयायी कौन कौन थे ? – काल्लिक तपासु
41. बुद्ध की प्रथम मूर्ति कहाँ बना था ? – मथुरा कला
42. सबसे अधिक संख्या में बुद्ध की मूर्तियों का निर्माण किस शैली में किया गया था ? – गांधार शैली
43. बौद्ध का परम धर्म लक्ष्य है – निर्वाण
44. धार्मिक जुलूस की शुरुआत सबसे पहले किस धर्म से शुरू की गयी थी ? – बौद्धधर्म
45. बौद्धों का सर्वाधिक पवित्र त्योहार क्या है ? – वैशाख पूर्णिमा
46. वैशाख पूर्णिमा किस नाम से विख्यात है ? – बुद्ध पूर्णिमा
47. अनीश्वरवाद को मानने वाले कौन-कौन धर्म है ? – बौद्धधर्म एवं जैनधर्म
48. बुद्ध ने किसके प्रमाणिकता को स्पस्टतः नकार दिया था ? – वेदों के
49. सम्राट अशोक को बौद्ध धर्म में किसने दीक्षित किया था ? – मोगलीपुत्त तिस्सा
50. चतुर्थ बौद्ध संगीति कहाँ हुआ था ? – कुण्डलवन कश्मीर
नमो बुद्धाय

अंबेडकरवाद कया है? ब्राम्हणवाद पर आधारित गैरबराबरी वाली व्यवस्था को बदलकर मानवतावादी व्यवस्था बनाने वाली विचारधारा अम्बेडकरवाद है

अंबेडकरवाद कया है
आज हर कोई कहता नज़र आता है कि मैं अम्बेडकरवादी हूँ…. लेकिन उसको ये बड़ी मुस्किल से पता होता है कि अम्बेडकरवाद असल में है क्या?
अम्बेडकरवाद किसी भी धर्म, जाति या रंगभेद को नहीं मानता, अम्बेडकरवाद मानव को मानव से जोड़ने या मानव को मानव बनाने का नाम है। अम्बेडकरवाद वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर मानव के उत्थान के लिए किये जा रहे आन्दोलन या प्रयासों के नाम है।

अम्बेडकरवाद भारत के सविधान को भी कहा जा सकता है।
एक अम्बेडकरवादी होना तभी सार्थक है जब मानव वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपना कर समाज और मानवहित में कार्य किया जाये।
सुनी सुनाई या रुढ़िवादी विचारधाराओं को अपनाना अम्बेडकरवाद नहीं है।
आज हर तरफ तथाकथित अम्बेडकरवादी पैदा होते जा रहे है…. परन्तु अपनी रुढ़िवादी सोच को वो लोग छोड़ने को तैयार ही नहीं है। क्या आज तक रुढ़िवादी सोच से किसी मानव या समाज का उदधार हो पाया है ? ???
अगर ऐसा होता तो शायद अम्बेडकरवाद का जन्म ही नहीं हो पाता। अम्बेडकरवादी कहलाने से पहले रुढ़िवादी विचारों को छोड़ना पड़ेगा। वैज्ञानिक तथ्यों पर विचार करना पड़ेगा, तभी अम्बेडकरवादी कहलाना सार्थक होगा। अम्बेडकरवाद दुनिया की सबसे प्रतिभाशाली और विकसित विचारधारा का नाम है, दुनिया में ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान अम्बेडकरवाद में ना हो। आइये आपको अम्बेडकरवाद के बारे कुछ बताते है:

1. अपमानित, अमानवीय, अवैज्ञानिक, अन्याय एवं असमान सामाजिक व्यवस्था से दुखी मानव की इसी जन्म में आंदोलन से मुक्ती कर, समता–स्वतंत्र–बंधुत्व एवं न्याय के आदर्श समाज में मानव और मानव (स्त्री पुरुष समानता भी) के बीच सही सम्बन्ध स्थापित करने वाली नयी क्रांतिकारी मानवतावादी विचारधारा को अम्बेडकरवाद कहते है।
2. जाती-वर्ग-स्त्री-पुरुष-रंगभेद की व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाकर एक न्यायमुक्त, समान, बराबरी, वैज्ञानिक, तर्कसंगत एवं मानवतावादी सामाजिक व्यवस्था बनाने वाले तत्वज्ञान को अम्बेडकरवाद कहते है। जिससे मानव को इसी जन्म में मुक्त किया जा सके।
3. व्यक्ती विकास के अंतिम लक्ष को प्राप्त करने की दृष्टी से समता-स्वतंत्रता-बंधुत्व और न्याय इन लोकतंत्र निष्ठ मानवी मुल्यो को आधारभूत मानकर संपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन (समग्रक्रांती) लानेवाले दर्शन को (तत्वज्ञान) को अम्बेडकरवाद कहते है।
4. ब्राम्हणवाद पार आधारित गैरबराबरी वाली व्यवस्था को बदलकर मानवतावादी व्यवस्था बनाने वाली विचारधारा अम्बेडकरवाद है। संपूर्ण मानव का निर्माण समता-स्वतंत्रता-बंधुत्व एवं न्याय के आधार पार करने वाली सामाजिक व्यवस्था बनाने की विचारधारा को अम्बेडकरवाद कहते है। ऐसी व्यवस्था में सबको विकास एवं समान संधि मिलती है।
1. गैर बराबरी वाली व्यवस्था को बदलकर मानवतावादी व्यवस्था की निर्मिती करना अम्बेडकरवाद है।
2. अम्बेडकरवाद यह मानव मुक्ती का विचार है, यह वैज्ञानिक दृष्टीकोन है।
3. इंसानियत का नाता ही अम्बेडकरवाद है।
4. मानव गरिमा (human dignity) के लिये चलाया गया आंदोलन फूल है।
. मानव का इसी जन्म में कल्याण करने वाली विचारधारा अम्बेडकरवाद है।
सबकी मुक्ति का विकास और मानव कल्याण का मार्ग ही अम्बेडकरवाद है।
इंसान को जन्म देनेवाली, जीवन जिने का मार्ग देने वाली विचारधारा अम्बेडकरवाद है।
मानसिक और सामाजिक उथान, आर्थिक, राजनैतिक एवं सांस्कृतिक बदलाव को अम्बेडकरवाद कहा जा सकता है।
. अम्बेडकरवाद एक ऐसा विचार एवं आंदोलन है, जो अन्याय और शोषण के खिलाफ है और उस की जगह एक मानवतावादी वैकल्पिक व्यवस्था बनाता है। यह संपूर्ण वैज्ञानिक दृष्टीकोन पर आधारित है।
ब्राम्हणवाद का विनाश करने वाली क्रांतिकारी विचारधारा को अम्बेडकरवाद कहते है।
अम्बेडकरवाद केवल यह विचार का दर्शन ही नही है बल्की यह सामाजिक शैक्षणिक-धार्मिक-आर्थिक एवं सांस्कृतिक जीवन में बदलाव लाने का एक संपूर्ण आंदोलन है।
अम्बेडकरवाद यह ऐसी विचारधारा है जो हमें मानवतावाद की ओर ले जाती है। व्यवस्था के गुलाम लोगो को गुलामी से मुक्त कर मानवतावाद स्थापित करना ही अम्बेडकरवाद है।
संपूर्ण मानव का निर्माण समता–स्वतंत्र–बंधुत्व एवं न्याय के आधार पर करने वाली सामाजिक व्यवस्था बनाना यह अम्बेडकरवाद है।
इस समाज व्यवस्था में सबका सर्वांगीण विकास और सबको समान संधी मिलती है।

 

यूपी के पूर्व इंस्पेक्टर जनरल पुलिस, S.r. Darapuri, IPS (अम्बेडकरवादी ) को यूपी पुलिस ने आज गिरफ्तार कर लिया। वे दलित उत्पीड़न के सवाल पर लखनऊ प्रेस क्लब में संवाददाता सम्मेलन कर रहे थे।…Dilip C Mandal

यूपी के पूर्व इंस्पेक्टर जनरल पुलिस, S.r. Darapuri, IPS को यूपी पुलिस ने आज गिरफ्तार कर लिया। वे दलित उत्पीड़न के सवाल पर लखनऊ प्रेस क्लब में संवाददाता सम्मेलन कर रहे थे|

दारापुरी साहब  दबे कुचले और अल्पसंख्यक समाज के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाते हैं,लिखते हैं ।

कानून के ज्ञान की ताकत और महत्व समझो ,सुप्रीम कोर्ट के केवल एक छोटे से निर्णय से  आरक्षण कोटे SC/ST की 9000 MBBS सीट्स का नुकसान हो गया है,मेरी राय है जिन बच्चों का सलेक्शन mbbs में नही हुआ है उन्हें लॉ करवाये ओर वकील बनाये।…एडवोकेट कुशालचंद्र राजस्थान।

✴   कानून का महत्व,✴
🔔सुप्रीम कोर्ट के केवल एक छोटे से निर्णय से
🔔आरक्षण कोटे की 9000 MBBS सीट्स का नुकसान हो गया है।
🌀यह कानून का महत्व है।। यदि इन बुद्धिजीवी स्टूडेंट्स या इनके परेंट्स को ज्ञात या ज्ञान होतो
मेरी राय है जिन बच्चों का सलेक्शन mbbs में नही हुआ है उन्हें लॉ करवाये ओर वकील बनाये।
ताकि जो आरक्षण अभी तक खत्म नही हुआ है उसे भविष्य में बचाया जा सके।
मेरा मानना है कि जीवन जीने का अधिकार कानून देता हूँ, डॉक्टर नही।
आज जो 9000 आरक्षित बच्चे डॉक्टर नही बन पाएंगे। वह भी कानून का प्रभाव है और जो बन रहे है वे भी कानून की देंन है।
🌀डॉ बाबा साहब अम्बेडकर को पढ़े, ध्यान रहे – बाबा साहब इकोनॉमिक्स में डॉक्टरेट करने के बाद बेरिस्टर अथार्त वकील बने थे, क्योकि वे जानते थे, कानून के ज्ञान के बिना हमारी पढाई ओर पैसा, हमारा आत्मसम्मान नही बचा सकता।।
कानून की शिक्षा वो हथियार है जिससे सवैधानिक रूप से हम दुश्मनो का मुकाबला कर सकते है।
🌀विचार करे।।
हमारी ताकत हमारे सरक्षण के लिये बने कानून है जिसकी सुरक्षा के लिये इंटेलिजेंट सुप्रीम कोर्ट लॉयर होने चाहिए।
🌀आरक्षित वर्ग के आत्मसम्मान की रक्षा,  कानून की शिक्षा के बिना सम्भव नही, यह सच्चाई है कोई माने या न माने।।
🌀सविधान हमारी ताकत है उसकी रक्षा कानून के विद्वान बने , बिना सम्भव नही।।
🔔सहमत हो तो शेयर करे।
विचार परिवर्तन , सभी परिवर्तनों का मूल है।
जय भीम – जय सविधान
कुशालचंद्र एडवोकेट राजस्थान।

आरक्षण मुद्दा : सुप्रीम कोर्ट के नए फैसले की वजह से बहुजन(SC/ST/OBC) बच्चे खतरे में हैं, (इसके अनुसार आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार चाहे सबसे ज्यादा नंबर ले आए लेकिन वह सिर्फ आरक्षित कोटे में ही नौकरी पाएगा यानि सवर्णों के लिए 50.5 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था मुक़र्रर कर दी गई है.)…चिंतित बरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल

सीबीएसई ने नीट में सवर्णों छात्रों को आऱक्षित कर दिया है. इसे लेकर एक व्यापक बहस शुरू हो चुकी है. इस कदम को आरक्षण खत्म करने की शुरूआत के तौर पर देखा जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद सीबीएसई ने देशभर में इसे लागू कर दिया है. इसके अनुसार आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार चाहे सबसे ज्यादा नंबर ले आए लेकिन वह सिर्फ आरक्षित कोटे में ही नौकरी पाएगा यानि सवर्णों के लिए 50.5 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था मुक़र्रर कर दी गई है.

इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल ने लिखा है…

 

अपने बच्चों को बचाओ!

SC, ST, OBC के ख़िलाफ़ आज़ादी के बाद का यह सबसे बड़ा फ़ैसला है, लेकिन हम चुप हैं, क्योंकि हम एक मरे हुए समाज के नागरिक हैं! यह मान लेने में कोई हर्ज नहीं है।बाबा साहेब ने कारवाँ को जहाँ तक पहुँचाया था, वह पीछे जा रहा है.आने वाली पीढ़ी हमें गालियाँ देंगी कि हम कितने रीढविहीन थे.

क़लम की नोक पर एक झटके में SC, ST, OBC के नौ हज़ार स्टूडेंट्स इस साल डॉक्टर बनने से रह जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि 50.5% सीटों पर SC, ST, OBC का कोई नहीं आ सकता. जनरल मेरिट में टॉपर हो तो भी नहीं.

केंद्र सरकार इसके ख़िलाफ़ अपील करने की जगह, तत्परता से इसे लागू कर रही है.मामला सिर्फ़ मेडिकल का नहीं है. आगे चलकर यह आदेश इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और यूपीएससी और पीसीएस तक आएगा. कई राज्यों में यह पहले से लागू है. लाखों स्टूडेंट्स पर असर पड़ेगा.

मुझे नहीं मालूम कि समाज की नींद कैसे खुलेगी. हमारे पॉलिटिकल क्लास की चिंताओं में यह कैसे शामिल हो पाएगा.जो नेता इस मुद्दे को उठाएगा, उस पर फ़ौरन भ्रष्टाचार का केस लग जाएगा. क्या हम उस नेता के साथ खडें होंगे? अगर नहीं, तो कोई नेता जोखिम क्यों लेगा?

मात्र पाँच हज़ार लोग भी सड़कों पर आ जाएँ, सारे लोग अपने जनप्रतिनिधियों पर दबाव डालें, तो आपके समाज के लाखों बच्चों का भविष्य बच जाएगा.

लेकिन क्या आप अपने बच्चों को बचाना चाहते हैं?

इस साल के नए नियमों की वजह से नौ हज़ार से अधिक SC, ST, OBC के स्टूडेंट्स का MBBS और BDS में दाख़िला नहीं होगा।

नए नियमों की घोषणा खुद केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने की है, जिसे इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स ऑफ इंडिया समेत भारत के हर अखबार और वेबसाइट ने छापा।

नया नियम यह है कि जिसने जिस कटेगरी में फ़ॉर्म भरा है, उसे उसी कटेगरी से सीट मिलेगी, चाहे वह जनरल मेरिट का टॉपर ही क्यों न हो। यह सवर्ण जातियों का 50.5% आरक्षण है।

इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला सरकार दे रही है। अगर ऐसा कोई आदेश है भी तो सरकार को रिव्यू पिटीशन डालना चाहिए। मेरे हिसाब से यह नियम की गलत व्याख्या है।

अगर इसे मान लिया गया तो इसे तमाम एडमिशन और नौकरियों में लागू कर दिया जाएगा।

इसका आर्थिक पक्ष यह है कि एक स्टूडेंट अगर मेडिकल कोचिंग पर पाँच लाख रुपए ख़र्च करता है तो 9,000 SC, ST, OBC के 450 करोड़ रुपए पानी में गए।

जिसे आप ईश्वर कहते हो उसे बौद्ध “प्रकृति/Nature” कहते हैं, इसके अपने नियम हैं जो सब धर्म वालों के लिए सामान हैं ,उदाहरण के लिए अगर भगवान् के एक भक्त को और एक नास्तिक को किसी गहरी नदी में फेंक दिया जाय, तो क्या होगा?तो वही जिंदा बचेगा जिसे तैरना आता है।…Devendra Dev

अगर भगवान् के एक भक्त को और एक नास्तिक को किसी गहरी नदी में फेंक दिया जाय, तो क्या होगा?

तो वही जिंदा बचेगा जिसे तैरना आता है।

अगर इन दोनों में से एक हिन्दू और एक मुसलमान हो, तो भी वही जिंदा बचेगा जिसे तैरना आता है।

अल्लाह और ईश्वर अपने नियम को नहीं तोड़ता।
क्योंकि
अल्लाह और ईश्वर का अपना कोई धर्म या मजहब नहीं है।

यानी वह ना हिन्दू है ना मुसलमान।

अगर कोई आपको ऐसा बता रहा है कि सिर्फ आपके अल्लाह या आपके ईश्वर में यकीन करने वाले को जन्नत या स्वर्ग मिलेगा तो आपको ऐसा बताने वाला आपको बेवकूफ बना रहा है।

मैं भी पहले पूजा पाठ करता था।

तब मैं काफी डरा हुआ और अपने दिमाग में अँधेरा महसूस करता था।

जब से मैंने विज्ञान और तर्क के आधार पर सोचना शुरू किया,

मन से ईश्वर का डर खत्म होने लगा, सभी सवालों के जवाब मिलने लगे, दिमाग के अँधेरे खत्म होने लगे,

अब मैं बहुत खुश और सुलझा हुआ महसूस करता हूँ,

अब मुझे ना किसी धर्म वाले से नफरत होती है और ना किसी की जाति की वजह से उसे छोटा या बड़ा मानता हूँ।

विज्ञान और तर्क के आधार पर सोचने की वजह से मुझे अब सभी इंसान एक जैसे लगने लगे हैं।

अब देशों की सीमाओं के भीतर कुढ़ते हुए, पड़ोसी देश से नफरतों से भरे हुए, दुसरे धर्म वालों को गालियाँ देते हुए, जातिवाद से भरे हुए लोगों को देख कर मुझे बहुत दया आती है।

मुझे महसूस होता है कि यह सब बेचारे बीमार लोग हैं।

अब मैं विज्ञान और तर्क के आधार पर सोचता हूँ तो मुझे लगता है कि पेड़, नदी, जानवर,पहाड़ और मैं सब एक ही हैं।

अब मैं आसपास की दुनिया और प्रकृति से ज्यादा लगाव महसूस करता हूँ।

सत्य जानना ही इंसान का धर्म है।

विज्ञान और तर्क ही सत्य को जानने का तरीका है।

जो लोग यह माने बैठे हैं कि जिस मजहब और धर्म में जन्म हो गया वही सबसे अच्छा और सच्चा है तो वह सबसे नासमझ लोग हैं।

यकीन मानिए, जब तक हम इन पुराने अंधे विश्वासों से आज़ाद नहीं होंगे, ना युद्ध बंद होंगे, ना शांति आयेगी, ना नफरतें खत्म होंगी।

जय भीम, जय संविधान।