A: हमारी २२ प्रतिज्ञा

आप सभी को धम्म क्रांति/वापसी दिवस की हार्दिक शुभकामनायें, आज 14अक्टूबर को ही सन 1956 में डा बी.आर. अम्बेडकर ने अपने लाखों अनुयायियों समेत सार्वजानिक जलसा करके बौद्ध धर्मं में लौटने की दीक्षा ली थी| इसी अवसर पर उन्होंने अपने अनुयायियों के लिए जो  22 प्रतिज्ञाएँ  तय की थी वो इस पोस्ट में प्रस्तुत हैं

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डा बी.आर. अम्बेडकर ने  बौद्ध धर्मं में लौटने  के अवसर पर,14 अक्टूबर 1956 को अपने अनुयायियों के लिए 22 प्रतिज्ञाएँ निर्धारित कीं.ब्राह्मणवादी कर्मकांडों के भव्य धार्मिक इमारतें, मीडिया प्रचार,संगीत, खुसबू-धुआं, भीड़,ढोल नगाड़े में इतना आकर्षण है की हमारा भोला भला व्यक्ति भटक सकता है ये बात डॉ आंबेडकर अच्छी  तरह जानते थे इसीलिए उन्होंने इन प्रतिज्ञाओं की जरूरत महसूस हुई होगी| पर ये  भी सच है की इन प्रतिज्ञाओं की जड़ और इतिहास जाने बिना लोग इनको जानकर भी मान नहीं पाते, उन्हें ये प्रितिग्य अजीब तो लगती हैं पर कभी इनकी जड़ तक पहुचने की कोशिश नहीं करते, और हिन्दू दलित बने रहते हैं |उन्होंने इन शपथों को निर्धारित किया ताकि हिंदू धर्म के बंधनों को पूरी तरह पृथक किया जा सके.ये 22 प्रतिज्ञाएँ हिंदू मान्यताओं और पद्धतियों की जड़ों पर गहरा आघात करती हैं.  प्रसिद्ध 22 प्रतिज्ञाएँ निम्न हैं:

1- मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई विश्वास नहीं करूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा
2- मैं राम और कृष्ण, जो भगवान के अवतार माने जाते हैं, में कोई आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा
3- मैं गौरी, गणपति और हिन्दुओं के अन्य देवी-देवताओं में आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा.
4- मैं भगवान के अवतार में विश्वास नहीं करता हूँ
5- मैं यह नहीं मानता और न कभी मानूंगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे. मैं इसे पागलपन और झूठा प्रचार-प्रसार मानता हूँ
6- मैं श्रद्धा (श्राद्ध) में भाग नहीं लूँगा और न ही पिंड-दान दूँगा.
7- मैं बुद्ध के सिद्धांतों और उपदेशों का उल्लंघन करने वाले तरीके से कार्य नहीं करूँगा
8- मैं ब्राह्मणों द्वारा निष्पादित होने वाले किसी भी समारोह को स्वीकार नहीं करूँगा
9- मैं मनुष्य की समानता में विश्वास करता हूँ
10- मैं समानता स्थापित करने का प्रयास करूँगा
11- मैं बुद्ध के आष्टांगिक मार्ग का अनुशरण करूँगा
12- मैं बुद्ध द्वारा निर्धारित परमितों का पालन करूँगा.
13- मैं सभी जीवित प्राणियों के प्रति दया और प्यार भरी दयालुता रखूँगा तथा उनकी रक्षा करूँगा.
14- मैं चोरी नहीं करूँगा.
15- मैं झूठ नहीं बोलूँगा
16- मैं कामुक पापों को नहीं करूँगा.
17- मैं शराब, ड्रग्स जैसे मादक पदार्थों का सेवन नहीं करूँगा.
18- मैं महान आष्टांगिक मार्ग के पालन का प्रयास करूँगा एवं सहानुभूति और प्यार भरी दयालुता का दैनिक जीवन में अभ्यास करूँगा.
19- मैं हिंदू धर्म का त्याग करता हूँ जो मानवता के लिए हानिकारक है और उन्नति और मानवता के विकास में बाधक है क्योंकि यह असमानता पर आधारित है, और स्व-धर्मं के रूप में बौद्ध धर्म को अपनाता हूँ
20- मैं दृढ़ता के साथ यह विश्वास करता हूँ की बुद्ध का धम्म ही सच्चा धर्म है.
21- मुझे विश्वास है कि मैं फिर से जन्म ले रहा हूँ (इस धर्म परिवर्तन के द्वारा).
22- मैं गंभीरता एवं दृढ़ता के साथ घोषित करता हूँ कि मैं इसके (धर्म परिवर्तन के) बाद अपने जीवन का बुद्ध के सिद्धांतों व शिक्षाओं एवं उनके धम्म के अनुसार मार्गदर्शन करूँगा

डा बी.आर. अम्बेडकर

68 thoughts on “A: हमारी २२ प्रतिज्ञा

  1. Boddhisattva Dr Bababsaheb Ambedkarji Ne jo 22 pratigyan di he vah samast Bahujano ko Brahman aur BrahmanWad ke Gulami se Mukti ka ek
    matra Marg hai. Lekin 22 pratigya Aur Bhagwan Buddha ka Dhamma ko Brahmano ke Nirmit Sabhi Samasha ka Nirakaran ke liye prashikshit full timer
    Panchsheel , Ashtangik Marg Vinay Aacharan karnewale (Vipassana ) pracharak (Upasak , Anagarik , Bhadant ) tayar karne ki jarurat hai. Namo Buddhay / Jay Bhim !!!

    • लेख को समझने और कमेंट के लिए हार्दिक धन्यवाद. कृपया मिशन से जुड़े रहे और इसे आगे बढाएं, जय भीम नमो बुद्धाय जय भारत…

    • जयभीम ! हमारा उद्धार हिंदू धर्म को तिलांजली देकर बौद्ध धर्म को अपनाकर ही संभव है ! शिक्षित दलितों को इसके लिए आगे आकर बौद्ध धम्म को अंगीकार कर दूसरों के लिए मिसाल कायम करनी चाहिए ! रब तक हिंदू धर्म के काल्पिक भगवान और देवी देवताओं का बेमतलब का भार ढोते रहोगे ! जब हमारे मुक्तिदाता ने हमें सुमार्ग दिखा दिया है तो अब किसका इंतजार कर रहे हो ?? हिंदू धर्म नहीं अधर्म है ! यह असमानता और अन्यायपूर्ण व अमानवीयता पर टिका है ! पंडे पुजारी हमें पाप-पुण्य, स्वर्ग-नर्क के झूठे मनगढंत चमत्कारिक किस्से बताकर गुलाम बनाए हुए हैं ! और हम हैं कि किसी के समझाने पर भी समझने को तैयार नहीं हैं ! सुनो, समझो और जागो बहुजनों ! अभी नहीं तो कब नींद से जागोगे ?? अब तो……
      बुद्धम शरणम गच्छामि !
      धम्मम शरणम गच्छामि !
      संघम शरणम गच्छामि !! का उदघोष चारों तरफ गूंजना चाहिए ! “जयभीम जयभारत”

      • tumko sharm aani chahiye ki jaybhim likhte ho or hindu dharmo ke khilaf ho tumko ye bhi pta nhi hai bhim ke matlb kya hota hai to kya samjhoge agar bhagwan ki marji yehi hoti ki tum bodh dahrm me jao to mere priye tumko dharm change karne ki koi jarurt nhi hoti sahrm karo yese soch ki

  2. nice sar ji bhut acha bichar he ap ka mare dada ji bhi in bichar bale the let sri babu atam ds ji butpurv lok shbha mambar 1977 me murena m.p se

  3. मुझे यह समझ मैं नहीं आता की किसी धर्म की बुराई करके आप अपने धर्म को कैसे ठीक कह सकते हैं। यदि आप इतना ही धर्म को समझते तो उसकी कमियो को दूर करते न की उससे दूर भागते, ध्यन्यवाद

    • सबसे पहले मैं आपका धन्यवाद देना चाहूँगा की आपने बड़ी ही मर्यादा में अपना विरोध और प्रश्न उठाया है वार्ना ब्राह्मणवादी तो गली गलौज धमकी पर उतारू रहते हैं|

      डॉ आंबेडकर के पास इस्लाम में जाने के ऑफर थे फिर भी उन्होंने वापस अपने बौद्ध धम्म में ही लौटना स्वीकारा , यही सुधारवादी नजरिया है| विरोध तो तब होता जब अगर इस्लाम में चले जाते, आबादी का ४०% हिस्सा वहां चला जाता तब आप सोच सकते हैं की क्या हाल होता

      क्या आप बता सकते हैं की दुनिया में तीन सौ से भी ज्यादा प्रकार के ईश्वर हैं पर उनमे से सिर्फ हिन्दुओं के भगवानों के हाथ में ही हतियार क्यों हैं? किसको मरने के लिए हैं? किससे डर हैं? इन्हें भगवान होकर भी हतियारों की क्या जरूरत हैं इनको?

      क्या आप बता सकते हैं की हर समय राक्षशों (भारत के मूलनिवासिओं) की मारने की शिक्षा देने वाली धार्मिक किताबें , नाटक मीडिया प्रचार आदि खुले आम क्यों होता है,

      कभी अपने अपने धर्म में बताये गए अन्याय दमन और अत्याचार के खिलाफ कभी कोई आवाज़ उठाई है?

      ये आपको बुराई लग सकती है, पर ये बुराई नहीं है? अधिक जानकारी के लिए डॉ आंबेडकर रिटिंग एंड स्पीचेस के २२ वॉल्यूम जो की भारत सरकार छाप कर सस्ते दामों पर बांटती है उसे पढ़ें, आप खुद महसूस करेंगे की किस हद तक बुराई की जा सकती थी पर फिर भी कोई बुराई नहीं करते|

      धार्मिक स्वतंत्रता हर भारतवासी का मौलिक अधिकार है| उम्मीद है आप इस बात को जानते होगे|

      • हमने आपकी पोस्ट पढि, आपके हिंदू विरोधी विचार पढकर बुरा लगा ठिक है भारत मे सभी को धर्मस्वातंत्र है पर इसका मतलब यह नही कि आप दुसरे धर्म का अपमान करे. हम मानते है कि बीच के कुछ दशको मै धर्म मै गलत प्रथाए मिलाई गई परंतु हमने उन्हे निकाल कर फिरसे धर्म को शुदघ किया है… समय नुसार विकृतीया हर धर्म मै आती है, उस समय धर्म सुधार कि आवश्यकता होती है न कि धर्मांतरण कि,आप बुद्ध कि विचारो पे चलते है ठिक है पर बुद्ध धम्म की स्थापना करणे से पुर्व कौनसे धर्म मे थे??? आप सम्राट अशोक उदाहरण देते हो पर वो बौद्ध बनने से पुर्व कौनसे धर्म से जुडे हुए थे??? आप अंबेडकरजी के अनुयायी है पर उनका धर्मांतर पुर्व कौनसा धर्म था??? अगर इन सभी ने धर्मांतर न कर अगर धर्म को सुधारा होता तो आज दुनिया मै एक हि धर्म होता और सभी शांति से रह पाते…

  4. जिस धर्म मे किसी एक वर्ग विषेशे को श्रेष्ठ ( ब्राह्मणों) और दूसरे वर्ग को नीच (शूद्र) समझा ने और एक वर्ग को राज करने जब्कि दूसरे को सेवा उसकी सेवा करने के लिए बाध्य किया जाये वो धर्म नही एक वर्ग को गुलाम बनाये रखने का षड्यंत्र है। जो एक ना एक दिन अवश्य उजागर होगा ।
    जय भीम

      • Aaap dono Pakshon ki baat suniye brahmanvadiyon ki bhi aur buddhivadiyon ki bhi….jo sahi lage use apnaayiye … aapki jitni bhi umra hai usme aapne sirn ek hi paksh brahmanvaad ko suna…hum samajh sakte hain ki 30 saal ke mulable 5 minute ka paksh kamjoor padega hi…Koi nahin lage rahiye, agar reserch karenge to sach tak pahuch hi jayenge,

  5. मैं बौद्ध धर्म के महत्व को प्राथमिकता देता हूँ क्योंकि इस धर्म में कोई जात-पात की भावना नहीं है|मनुष्य को चाहिए कि वह ऐसे धर्म का चयन करे जो उसे समानता दिला सके जो हिन्दू धर्म में नहीं है|इस धर्म में इतने भगवान हैं कि लोग उलझकर सत्य से वंचित रह जाते हैं जबकि बौद्ध धर्म ऐसा धर्म है जहाँ पर सिर्फ और सिर्फ सत्य ही है क्योंकि सत्य वही बता सकता है जो सत्य जानता है|हम समझ नहीं पाते जब सबको पता है कि सबको बनाने वाला ईश्वर एक है तो फिर हम अंधविश्वासों में क्यों उलझतें हैं|

  6. मै एक भारतीय हु ऐसी सोच जब तक हर मजहब मे नही आयेगी तब तक जात पात उच्च निच के नाम पे हम लोग झगडते रहेंगे ।

    आंबेडकर great थे great है और great रहेंगे

    क्योंकि वह एक सच्चे भारतीय थे और रहेंग बस अफसोस ईस बात का है कि हम धर्म को ईन्सान से और देश से बढकर समझते है । हमारा धर्म हमारी जात है ईन्सानीयत और हम है भारतीय ।

  7. जो धर्म हमरा बहिष्कार करता ह हमे भी उस धर्म का बहिष्कार कर देना चाहिए जय भीम

  8. बाबा साहब ने पथ प्रदर्शक की अहम भूमिका निभाई, इस हेतु समाज को उनके प्रति कृतज्ञ होना ही चाहिए।
    परन्तु दलित समाज ने बाबा साहब को ही सबसे बड़ा मानते हुए उन्हें ही सारी प्रमुखता दे डाली, जिस बुद्ध की ओर जाने उन्होंने कहा वह आज भी इस समाज के लिए गौड़ है। वे बेचारे इन प्रतिज्ञाओं को मन्त्र समझ बैठे, जिनका समय-समय पर उच्चारण भर करते रहें। ठीक ऐसे ही बुद्धं सरणं गच्छामि…. भी उनके लिए एक मंत्र ही है, जिसका उच्चारण करते रहना नियम बना लिया है।
    यह स्थिति दुःखद है।

  9. मैं तो बाबा साहब के मार्ग पर चलना पसंद करता हूँ और चलता रहूंगा क्योकि बाबा तो पापा के पापा है और कुछ लोग परेशान इसलिए है की हम आगे बढ़ रहे है और वो पीछे……….
    @ कर सको तो अपनी वाणी मे वो असर पैदा कर
    रुख हवाओ का मोढ़ दे वो असर पैदा कर
    चाहते हो अगर स्वाभिमान से जीना ये साथियो
    तो हर घर मे एक अम्बेडकर पैदा कर….
    जय भीम नमोः बुद्धाय

    • bhai sahab boudh dhamm ko theek se samjho to pahale.tumto dhamm ke bahane samajik vyavasthaon per sirf our sirf politics kar rahe ho.babasaheb ke nam per kyon itni vishela vichar rakhte ho bhartiya samaj our bharat aapsi vaimanasya se nahi balki SAMBHAV, SAMRASTA, SADACHAR, OUR MANSIK EKTA SE UCHAIYON KO CHHUYEGA.
      SIRF–JAI BHARAT.

  10. jo xxxxxgalixxxx pakhandi brahman, mere pujniye baba sahab bhim rao ambedakar ke bare me galat bolana to dur ,sochata bhi hai use wahi xxxgalixxxx ko bhej dunga janha se aaya tha. saala pakhandi brahaman kahata hai ki hindu darm me burai hai to usase dur kyu bhagate ho sudharte kyu nahi Are xxxmakigalixxx pakhandi tum saala hamara bat manega. main to kahata hu hindu darm ko main sudhar dunga bas tum janha se aye the wanha chale jao.

    koi bat nahi agar nahi pakhandi brahman tum agar nahi jawoge to main tumahe ghasit kar ek din le jaunga.

    main Bhim rao ambedakar ke bare me ek labj bhi galat nahi sunana chahata.

    jo BR ambedakar ke bare me galat sochata hai O xxxxgali hai. saala apane BABA ke bare me galat sochata hai.

    JAY JAY BIM & JAI MULNIWASI………………….!

  11. ब्राह्मण को गाली देने वालों गलती की हमने जो अम्बेडकर को इतना सम्मान दिलाया।।और वो अहसान फरामोस निकला।।।क्यों नही जाते तुम लोग बोध धर्म में।।किसने रोका है।।।वैसे भी हिन्दू धर्म एक शाश्वत है और युगों युगों से है।।।तुम जैसे लोगों की औकात नहीं है इस धर्म को समझने की।।।और हाँ तुम लोग धमकी किस को देते हो।।।।।हिम्मत है तो आओ सामने बराबर की टक्कर में।।
    भीख में मिली रोटी खाकर कुश्ती करने चले हो।।।।खुश रहो।।।।जय हिंद जय हिन्दू जय ब्राह्मण।।।।।जय परशुराम

    • आपके कमेंट का जवाब हिंदी लेखक व् उपन्यासकार पंडित हज़ारी प्रसाद द्विवेदी के निम्न शब्दों में है:
      “वह अपूर्व समय होगा जब शताब्दीयों से पददलित, निर्वाक जनता (बहुजन/मूलनिवासी) समुन्द्र की लहरों के सामान गर्जन से अपना अधिकार मांगेगी | उस दिन हमारी सभी कल्पनाएँ न जाने क्या रूप धारण कर लेंगी जिन्हें हम भारतीय सभ्यता,हिन्दू संस्कृति आदि अस्पष्ट और भुलावे वाले शब्दों में प्रकट करते हैं |मैं हैरानी के साथ सोचता हूँ की हम में उस महान एतिहासिक घटना को सहतने का साहस है क्या ? यदि नहीं तो धैर्य और त्याग के साथ साहस बटोरना होगा,हमें उन सारी सुख सुविधाओं को जो हम अब तक भोगते आये हैं उनके लिए छोड़ना होगा जो अब तक नंगे भूखे और तृषित हैं| यदि वे समाज के पथ प्रदर्शन के लिए भी आगे आयें तो सहर्ष ही साफ़ दिल से हमें उन्हें नेतृत्व प्रदान और स्वीकार करना होगा| हमें अपने पुरातन अहम् त्याग कर उन्हें गले लगाना होगा |आज हमारा कर्तव्य उनके प्रति दया दिखाना नहीं न्याय करना है,वे दया नहीं मांगते हैं न्याय मांगते हैं| यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे जबरन उसे ले लेंगे |”…हिंदी लेखक व् उपन्यासकार पंडित हज़ारी प्रसाद द्विवेदी https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%86%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B9%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A6_%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A6%E0%A5%80

      • महामानव गौतम बुद्ध ने कहा था कि “ये मानव की प्रकृति है जिससे हम मोह करते हैं उसकी बुराई नहीं देख पाते,और जिससे घृणा करते हैं उसमे अच्छाई नहीं देख पाते”| दलित शूद्र बताकर जनवादी विचारधारा से घृणा करवाई जा रही है, इस घृणा से भरे आमजन इनकी बात सुनने को तैयार नहीं, जबकि उसे चाहिए को वो दोनों की बात सुने और न्यायकर्ता बन जिसकी बात में भला लगे उसे चुने |

  12. आप सब बौद्ध लोग भलेही खुद को बहोत होशियर समजते होंगे ..और कदाचित आप लोग होशियार होगे भी ….लेकिन दुसरो के धर्म को कम लेखन बंद कर दीजिये …हिंदू धर्म सबसे अच्छा धर्म था , हैं, और हमेशा रहेगा ….अगर झूठ लग रहा हो तो google पर सर्च कर के देख लिजिये …सम्राट अशोक और गौतम बुद्ध पहिले कॅन्सर धर्म के थे ये मत भुलीये …आप के धर्म मे गाय काट कर खाना अनिवार्य हैं ….आपके धर्म मे किसी प्राणी पक्षी का मांस खाना अनिवार्य है ….और कहते हों कि बौद्ध धर्म सबसे अच्छा है ….जय हिंद …।। जय शिवाजी ।। जय महाराष्ट्र ।। जय भारत ।।

    • आपके शब्दों से आपकी मानसिकता जाहिर हो रही है,खेर जिस जगह आप हैं वहाँ से आप सत्य को नहीं देख पाएंगे , अगर देख भी पाएंगे तो उसमे बुराई आपको दिखेगी ही नहीं, रहने दीजिये आप कोशिश मत कीजिये |अगर आप वाकई समझना चाहते हैं तो खुद को जज की कुर्सी पर बैठाओ और “निष्पक्ष” होकर बौद्धों और ब्राह्मणवादियों की बात सुनो फिर फैसला करो, पर ये तब तक न हो पायेगा जब तक पहले आप अपने दिमाग से ब्राह्मणवादी असर को निकाल कर निष्पक्ष न हो जाएँ|वैसे हिन्दू धर्म अच्छा है तो आप खुले आम असुरों की हत्या की शिक्षा क्यों देते हो ?

      अधिक जानकारी के लिए भारत सरकार द्वारा प्रकाशित “डॉ आंबेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेस के बाइस वॉल्यूम” खरीद कर पढ़ो,खासकर “हिन्दू धर्म की पहेलियाँ”, “प्राचीन भारत में क्रांति और प्रतिक्रांति” और “जाती का उच्छेद”| आपको तो ये भी विश्वास नहीं होगा की भारत सरकार ऐसी बातें छापती है और इनमे से कई हिन्दू विरोधी बातें आईएएस आईपीएस के सिलेबस में पढ़ाया जाता है|आपके अपने पूर्वाग्रह और वर्तमान मानसिक स्तर से ऊपर उठना होगा|

      ध्यान रहे हमें आपके हिन्दू धर्म की प्रैक्टिस पर कोई ऐतराज नहीं, ऐतराज है असुरों यानि बौद्धों/दलितों की अटरोसिटीज़ पर , वो बंद होनी चाहिए

    • Dilip C Mandal FB post
      विवेकानंद ने चेन्नई के विक्टोरिया हॉल के भाषण में ख़ुद माना कि उनकी जाति को शूद्र कहकर उन्हें हमेशा अपमानित किया गया। संन्यासी बनने के उनके अधिकार को चुनौती दी गई। यह भाषण विवेकानंद रचना समग्र के तीसरे खंड में है। हर लाइब्रेरी में उपलब्ध है। स्टेशनों पर भी यह किताब मिल जाती है।
      भाषण यहाँ मिलेगा- The Complete Works of Swami Vivekananda/Volume 3/Lectures from Colombo to Almora/My Plan of Campaign

    • धन्यवाद आपने सवाल सही सवाल पूछा, देखिये आप जिस ही धर्म वाले से ये सवाल पूछँगे वो अपने पसंदीदा धर्म को ही सही बताएगा, रही बात बौद्ध धर्म की
      तो वो तो एक ब्राह्मणवादी परिभाषा है, असल में ये धर्म नहीं धम्म है, धम्म मतलब रास्ता| बुद्ध धम्म को आस्था से या विश्वास से नहीं मन जाता बल्कि अपने अनुभव से जाना और फिर जो आपकी कसौटी पर खरा उतरे उसे माना जाता है या जीवन में प्रैक्टिस किया जाता है| अगर वाकई जानना चाहते हैं तो निम्न आर्टिकल एक बार पढ़ें, कोई सवाल हो तो यहाँ poochen

      https://samaybuddha.wordpress.com/2015/09/08/dharm-kya-hai-ye-dhamm-se-kaise-alag-hai-explained-by-dr-ambedkar/

      https://samaybuddha.wordpress.com/2015/01/17/baudh-dhamm-kya-hai/

      https://samaybuddha.wordpress.com/2014/01/13/dharm-religion-meaning-buddhism-hindi-india/

      https://samaybuddha.wordpress.com/2014/02/20/difference-between-dhamma-and-dharma/

      • alp gyani atee bhayankar aaplog politics karna chahte hai to active politics me aayen.varna dhamm dhyanse padhe dhamm to very personal mamla hai.aaplog vyarth apna energy barbad karte hai,.ye energy possitive direction me lagao–apna budhhi lagao sirf bhed-chal mat chalo.bahut kamyab houge.

      • Hum aapki frustration samajh sakte hain…waise kya aapko pata hai ki ye 22 praatigya Dr ambedkar ne nirdharit ki hai.

        Hindutva apne dharm granth, natak, film me shoodro/rakshashao/daliton/asuron/achhoton ko maar dalne ki baat khule aam karta hai, har natak , har dharm granth yahi sab hinsa ki baaten karta hai , kya aapko wo sab galat nahin lagta…

        Jaisa ki Lohiya ji ne kahan tha ki :Rajniti Alpkaleen dharm hai par Dharm sadiyon chalne wali rajniti hoti hai” ….to aapko ye samajhna hoga ki Dharm rajniti hi hoti hai…

  13. Ap paida hue Hindu dharam m.. Jitne bhi sanskar hue Hindu dharam ke… Saadi se lekar Marne tak…. Or gaali bhi Hindu dharam ko de rhe ho…. Ye kya hai…. Ap itne hi smjdaar Ho to or dharam m kyu ja rhe ho… Apne dharam m sudhar lao…. Agr privaar me koi gaali de to parivaar ko chod ke Jana kha ki smjdaari h….

    • Mr Kamal,

      Hum 2000 saal se abhi tak hindu hi to hain, par aap NYAY nahin dete to kya karen? aap mujhe batao kitne aise dalit hain jo Ambani jaise dhanpati hai, kitne dalit pradhanmantri hue, kitne dalit GENERAL CORNEL hue, aap mujhe batao SARKARI school ki shiksha sare desh me kharab kyon kar rakhi hai aur apne liye private school ka intzaam alag se kyon hai?

      Ab MERIT ka rona rone mat bait jana…himmat hai to sarkari aur private school ki vyastha khatam kar ek eek hi line kheecho aur waha se race shuru karo,…. Race aise kaise lagate ho ek ke hat pair band do doosre ko private school ke pankh laga do….aur fir kaho ki race me peeche rah jate hain

      • SARKARI school ki shiksha sare desh me kharab kyon kar rakhi?
        Kyuki Sarkari School me padane wale jyaadatar teachers and staf reserved category ka he jo khud grace marks pe studies complete kar ke teacher ban gaye he. SARKARI school ki shiksha sare desh me kharab hone ka mukhya karan yahi he.

        Race Lgane ka agar itna hi shauk paal rakha he toh, reservation system khatam kar do, fir race lagao, tab dekhte he kaun kitna agge tak jaata he.

  14. बौद्ध धर्म में तो दलितवाद है ही नहीं फिर आप जैसे दलितों को आरक्छन कैसे मिल जाता है, या तो आप यहाँ झूठ बोल रहे हो या फिर सरकारी नौकरी का फॉर्म भरते समय या शिक्षा में फीस माफ़ी के समय झूठ बोलते हो, खैर जो भी हो आप अपने में खुस रहो, हमें हमारे भगवान के साथ खुश रहने दो

    • मैडम, हम कहाँ आपको आपके भगवानों को छेड़ने जाते हैं ,क्या अब इतना यहाँ अलग थलग ब्लॉग पर भी न लिखने दोगे| न हम टीवी पर हैं न हम अख़बारों में हैं नहीं ही हम अपने विचारों को स्कूल सिलेबस में शामिल करते हैं, न ही हम ढोल नगाड़े शोर शराबा करके जागरण करके अपने धर्म का प्रचार करते हैं | स्कूलों में बच्चों की कोमल बुद्धि पर न ही हम धर्म ग्रन्थ पाठ और धार्मिक चरित्रों के कपडे पहनते हैं| न ही हम टीवी में बच्चों को कार्टून के रूप में धार्मिक एजेंडा उनके मन में घुसाते हैं| फिर आप कैसे कह सकतीं हैं की “आप अपने में खुस रहो, हमें हमारे भगवान के साथ खुश रहने दो” |हम कहाँ आपको अपनी विचारधारा बताने जाते हैं ,ये तो वो बात हो गयी की उल्टा चोर कोतवाल को डांटे

  15. I AM INDIA
    I AM BHARAT
    inshan paida hote hi Dharm me bandh jata hai Lekin uske vichar vaivhar uske Apne hote hai sahi oar galat vokudh parakh Sakta hai
    I AM INDIA
    I AM BHARAT

    YE MERA REAL NAME BHEE HAI OAR KAM BHEE HAI.

  16. ak sawal ?
    MAA KA KYA ISTHAN HAI DHARMO KI KITABO ME?
    OR
    JISNE AAPKO JANM DIYA USKA KYA ISTHAN HAI DHARMO ME?
    ALL DHHARM…..?

    • साथियो किसी को दोष देने की जरूरत नहीं, बस आप बाबा साहब की 22 प्रतिज्ञ मानना सुरू करिए। यदि पेड़ को पनि देना बंद कर दें तो पेड़ अपने आप ……………………………….

  17. namste bhaiyo ham hindu dharm me viswas rakhte hai aur budhist dharam me bhi astha rakhte hai………………mera ap logo se ek nivedan hai ki aap hindu dharam ka itihas jarur pade isme suru se hi jaatiyo ka bhed bhaw nahi raha hai ye baad me isme shamil ho gaya hai………….aur hindu dharam ki yah visheshta rahi hai ki ye apni kamiyo ko samya samy p dur karta rahta hai……jab ghar me ko samsya ho to use dur karne ki kosis karni chahiye naa ki usse bhagne ka pryas karna chahiye…….ap koi bhi dharm apna lo par hindu dharam aaj ke samay me jada vahwarik hai aisa mera manana hai apke vichar hamse alag ho sakte hai……………………ane wale samay me koi bhi dharm ia duniya me nahi rahega….2080 tak.
    JAY MATRBHUMI JAY BHARAT

    • kya Apko pata hai
      HINDU shabd hi keval 300 saal purana hai?
      isse pahle is dharm ko kya kahte the?
      Kya aapko pata hai brahman dharm ko hindu dharm kahne ki jaroorat kyon padi?
      Kya apko pata hai ki baudh dhamm ASTHA ki viruddh ek kranti hai?
      to aap kaise baudh dhamm me astha rakh rakte ho jo astha ka ki virodhi ho ?

      aapke sahi javab ka intzaar rahega..

  18. NAMSKAR..
    Koe vayaki Hindu dharm hai aisa nyaalay court me sabit kar Sakta hai tho mujhe court ki ak copy
    Bheje.
    Dhanyvad

    • mera ek sawal he,
      Agar Budh Jee ne Baudh Dham ki Shurwat ki thi toh, Budh ji ne jin ke ghar me janam liya unn ka dharam kaunsa tha. mene pahele bhi bahut se comments kiye the, but aap un comments ko delete kar dete ho and reply b nai dete, umeed he iss sawal ke jawab hume awashya milega.
      Hari Om.

      • Buddha ne kisi dharm ki shuruaat nahin ki, Buddh ne to jeevan me dukhon ka karan aur nivaran khoja….Buddh ne Dhamm diya hai dharm nahin…apni jankari durust karo….

        Aapki baaton se lagta hai ki aap dhamma ko nahin janna chahte balki kattarta se hindu hone ke dhambh me bahas kar apni baat badi karna chahte hain….

        vyarth ki koshish hai….aap logon ka raj hai jo theek samjo karo…

  19. Dear KSHMTABUDDHA,

    Mene aapse simple sa ek questions pucha ki Budha ke mata paita ka Dharam kaunsa tha, unhone jin se siksha li, gyaan liya, jis se woh itne mahaan ho gaye woh kaun the aur kiss Dharam ke the.

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