B: समयबुद्ध मिशन-उद्देश्य और लक्ष्य


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समयबुद्ध मिशन ट्रस्ट (दिल्ली)बौद्ध चिन्तक, सुधारक, दार्शनिक, दृष्टा, मार्गदाता एव गुरु मान्यवर समयबुद्धा जी के विचारों एव दूरदृष्टी से समस्त बहुजन समाज की क्षमता बढ़ाना को समर्पित है| समयबुद्धा का मानना है की बहुजन उत्थान के लिए जो भी मेहनत की जाती है वो बहुजनों  में क्षमता न होने की वजह से उनको लाभ नहीं पंहुचा पाती| गुरु मान्यवर समयबुद्धा जी के निम्न  कोटेशन पर ध्यान दीजिये:

“स्वास्थ्य, निति, ज्ञान, उत्साह और समर्पण न होने ही वो कारण हैं जिसके बिना कोई व्यक्ति या समाज एक  बंजर भूमि की तरह हो जाता है जिसमे कितनी ही खाद बीज पानी  (विचार, कानूनी और आर्थिक सहायता, मौके आदि) डालो परिणाम कुछ नहीं निकलता…समयबुद्धा”

गुरु मान्यवर समयबुद्धा जी के निम्नलिखित अतिविशिस्ट वचन सदा ध्यान रखें:

“अगर आपमें क्षमता नहीं है तो आपके सगे भाई के राजा बनने पर भी आप कोई फायदा नहीं उठा पाएंगे पर यदि आपमें क्षमता है तो आप अपने दुश्मनों से भी फायदा निकाल सकते हैं| इस संसार में आपको उतना ही  मिलता है जितने की “जम्मेदारी” लेने की क्षमता आप अपने अंदर विकसित कर लेते हो, ऐसे कुछ भी जो आपकी क्षमता से जयादा आपको  मिल भी जाता है तो वो मुश्किल ही टिक पता है, अगर कुछ चाहिए तो उसकी जम्मेदारी लेने की क्षमता अपने अंदर विकसित करो| हमारी क्षमता को मुख्य रूप से  तीन  प्रकार से वर्गीकरण कर सकते हैं:

1. व्यक्तिगत क्षमता

2. सामाजिक क्षमता

3. नीति  क्षमता

 1 व्यक्तिगत क्षमता: हमारे खुद अपनी  शैक्षणिक योग्यता, जीवन ज्ञान,शारीरिक क्षमता,व्यक्तिगत धन बल,  दूरद्रिष्टि , समझ, परख, संयम, आत्मनियंत्रण,आत्मविश्वास और इनसे प्राप्त उपलब्धियां व्यक्तिगत क्षमता के उदाहरण हैं|

2. सामाजिक क्षमता: व्यक्तिगत क्षमता से केवल एक हद तक ही पहुँच सकते हैं उसके बाद और उससे ऊपर जाने के लिए हमे सहयोगी समूह की जरूरत होती है| हमारा अपना समाज हमारा रेडीमेड सहयोगी समूह होता है,अफ़सोस ये है की भारत में समाज जाती के आधार पर बनता है  |

 3. नीति  क्षमता : अर्थात भविष्य का आंकलन और प्लानिंग करने की क्षमता, ये प्लानिंग व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों स्थर पर  होनी चाहिए  | सामाजिक स्थर की प्लानिंग सामाजिक पंचायत या हमारे लिए कहें तो बौद्ध धम्म के झंडे के नीचे होती है |व्यक्तिगत और सामाजिक क्षमता की रक्षा कूटनेतिक योजना की क्षमता द्वारा ही किया जा सकता है| कूटनेतिक योजना की क्षमता  असल में ऊपर लिखी हुए दोनों क्षमताओं का ही हिस्सा है पर इसका महत्व तब बढ़ जाता है जब दूसरे लोग हमारी  क्षमता,सुख  और समृधी  को ख़त्म करने के कायावाद में लगे होते हैं|  

हमें सारा जीवन इन तीन क्षमताओं को बढ़ाने में प्रयासरत रहना चाहिए|संसार में हर किसी का हर कर्म  बस अपने आप के  अस्तित्व को बचाए रखने का वक्ती संगर्ष होता है, ये सारी जद्दोजहद बस नस्लों का संगर्ष है जिसमें क्षमताओं का युद्ध है, जो चलता आया है और चलता रहेगा, इसलिए केवल अपनी क्षमता बढ़ाने पर केन्द्रित रहो|”…समयबुद्धा

 गुरु मान्यवर समयबुद्धा जी का कहना है की

 “ज्ञात हो कि शूद्र ,अछूत,राक्षश की तरह “दलित” शब्द भी धम्म विरोधियों द्वारा फैलाया गया भ्रामक जाल है जो भारतीय बहुजनों  की इस पीढ़ी और आने वाली पीढयों को मानसिक रूप से कमजोर बनाये रखेगा। दलित शब्द कलंक है इसे त्यागो,अपने लिए ऐसे सम्भोधन चुनो जो आपकी शक्ति दिखाए कमजोरी नहीं| दलित शब्द कमजोरी बताता है,खुद को बौद्ध कहो और गौरवशाली विजेता बौद्ध इतिहास से जोड़ो |खुद को बहुजन कहो, बहुजन शब्द जनसंक्या बल दर्शाता है जिसमें सभी 6000 जातियां में बटे भारतीय लोग आते हैं| इज्ज़त मांगी नहीं जाती कमाई जाती है,जब तुम अपनी इज्ज़त खुद करोगे तभी तो दुनिया भी करेगी| जब तक दलित शब्द का इस्तेमाल होता रहेगा, तब तक विश्व जगत से कोई हमे बचाने आने के लिए आवाज नहीं लगाएगा। बौद्ध लिखो, कहो, दिखो। फिर देखो विश्व मे सबसे ज्यादा तुम्हारा समाज होगा, और तुम्हारी आवाज विश्व के कोने-कोने से सुनी जाएगी और तब भारत सरकार अपने अन्याय के लिए विश्व समुदाय के सामने लताड़ा जाएगी। जागरूक बनो, बौद्ध बनो,अपने आप को नवयान बौद्ध कहो, बुद्धिज़्म पूरी तरह विज्ञान के तर्को पर आधारित है और वैज्ञानिक है।

 आज सभी बौद्ध विहारों मे नीरास्ता फैली हुई है,खंडर की तरह पड़े हैं, तर्क पर आधारित बेहतरीन बौद्ध साहित्य की पूछ नहीं है,भारत में बहुजन मेजोरिटी में हैं फिर भी जब एक पर अत्याचार होता है तो बाकि कोई उसके पीछे नहीं खड़ा होता,कभी सोचा ऐसा क्यों? ऐसा इसलिए है की हममे संगठन की कमी है,संगठन केवल बोलने से नहीं बनेगा इसके लिए एक प्लेटफार्म एक स्थाई झंडा चाहिए जो की बाबा साहब ने बौद्ध धम्म के रूप में दे दिया है|धम्म ही वो स्थाई मुद्दा है जिसके नाम पर इकठ्ठा होकर हम सब साझा निति बना सकते हैं और उसे चला सकते हैं,विचारों का आदान प्रदान, आपस में भाईचारा विकसित कर सकते हैं|बाकि के मुद्दे जैसे राजनीती अदि समय के साथ आते जाते रहते हैं पर धम्म सदा के लिए स्थाई है | जीवन में तरक्की  के मौके एक दुसरे को बताना,धंदा की मार्केटिंग, रिश्ते नाते अदि अनेकों मुददों  पर संगठन का जबरदस्त फायदा होता है| क्या आप इसे समझ सकते हो की धम्म दान ही असल में महा दान है क्योंकि दान से धन होता है, धन से धर्म चलता है,धर्म से निति और संगठन चलता है,निति और संगठन से सुरक्षा होती है|तो क्या आप अपनी सुरक्षा और तरक्की के लिए अपने समय उर्जा और कमाई का मात्र १% भी खर्च नहीं करोगे|”… समयबुद्धा

 समयबुद्धा जी से लोग अक्सर  पूछते हैं की जब बौद्ध क्रांति का इस देश में पतन कर दिया गया तो आज वो हमें कैसे सुख और सुरक्षा प्रदान कर सकता है?

 समयबुद्धा का कहना है की “उनकी भी बात बिलकुल सही है सही है, अगर हमने अपने इतिहास से सीखकर बौद्ध  धम्म के लिए कुछ नए नियम नहीं बनाये तो इतिहास फिर हमें सबक सिखा देगा इसलिए मैं ऐसे नियम प्रस्तावित करता हूँ जो बौद्ध धम्म को सदा के लिए चरम पर स्थापित कर देंगे|

 नियम:सत्य और दुक्ख-निरोध के साथ सुरक्षा भी धम्म लक्ष्य बनाओ:  धम्म का लक्ष्य केवल सत्य की खोज ही नहीं होना चाहिए बल्कि अपने अनुयायिओं की सुरक्षा भी होनी चाहिए क्योंकि अगर मार दिए गए तो हम सत्य का क्या करेंगे, मृत्यु हमारे परिवार और समाज का सबसे बड़ा दुक्ख है तो दुःख निरोध कैसे हो पायेगा|

 नियम: हर पूर्णिमा पर बौद्ध विहारों में संगठित वंदना : नया नियम हर पूर्णिमा को बौध विहार पर संगठित वंदना का नियम अनिवार्य करना होगा | बौध धर्म में पूर्णिमा का बड़ा महत्व है हमें ये नियम बनाना होगा की कम से कम महीने में एक बार अर्थात पूर्णिमा के दिन अपने निकटतम बौध विहारों पर संगठित होना होगा| ये भारत के 6000 जातियों में बंटे सभी मूलनिवासियों को संगठित करने का बहेतरीन  माध्यम है|इसके दो फायेदे होंगे एक तो धार्मिक ज्ञान से जीवन बेहतर होगा दुसरे हमारा संगठन बल साबित होगा |विहारों से हमारे समाज को बढ़ाने वाली  नीति  को जनसाधारण  और जनसाधारण  की जरूरतों  को ऊपर  बैठे  अपने समाज के बुद्धिजीवियों  एव राजनीतिज्ञों तक पहुचाया जा सकेगा|केवल धर्म ही स्थाई झंडा है, राजनेतिक पार्टी के नाम और चिन्ह  तो बदलते रहेंगे पर किसे  चुनना है  इसका सामूहिक फैसला केवल बौध विहारों पर ही हो पायेगा|

 नियम:हर पूर्णिमा पर बौद्ध विहारों जो जनता का आर्थिक समर्थन :बौद्ध धम्म में भिक्षा ही वो वजह है जिसने इसे कमजोर बनाया हुआ है|जब बौद्ध धम्म प्रवर्तक भगवान् बुद्धा ने भिक्षा की सहारा लिया था तब और बात थी पर अब ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं रह गई है|मैंने अक्सर देखा है ही नीरस पड़े बौद्ध विहारों में रह रहे बौद्ध भंते को दो वत का भोजन भी नहीं मिल पाता, क्योंकि हमारे लोग बौद्ध विहार पर झाँकने भी नहीं जाते| मैं भिक्षा की विरोध करता हूँ और हर महीने संगठित वंदना पर बौधों द्वारा दान देने की राये देता हूँ| हर महीने इकठा होने वाले धन से बौद्ध विहार और बौद्ध भाते दोनों का कल्याण होगा जिससे बौद्ध धम्म की नीरसता ख़तम होगी और ये आकर्षित होगा|परिणाम स्वरुप बौद्ध धम्म शक्तिशाली होगा और अपने अनुयायिओं को सुरक्षा देने में सक्षम होगा| भ्रस्टाचार के डर से ही भगवान बुद्ध ने बौद्ध विहारों में धन संचय को नाकारा था पर उन्होंने ये भी कहा है की आप अपना दीपक स्वेव बनों| हम ऐसे नियम बना सकते हैं जिससे भ्रस्टाचार नहीं होगा और धम्म का कल्याण भी होगा| बौद्ध धम्म का मुख्य लक्ष्य दुखों से छुटकारा दिलाना है, पर एक भी एक सार्वभौम जिन्दगी का नियम है की धन से जिन्दगी के साठ प्रतिशत दुःख दूर हो जाते हैं|ध्यान रहे भगवान बुद्ध ने निर्धन रहने को नहीं कहा न ही उन्होंने ये कहा है की कैसे भी बौहुत ज्यादा धनि बनो|दोनों अवस्थाओं में दुक्ख है, माध्यम मार्ग उत्तम है-न अधिक गरीब न अधिक अमीर|

 धन संचय बुरी चीज़ है पर गुलामी और धम्म की नकादरी उससे भी बुरी चीज़ है, अब फैसला आपके हाथों में है|”

भगवान् बुद्धा ने कहाँ है  सत्य  जानने  के मार्ग में इंसान बस दो ही गलती करता है ,एक वो शुरू ही नहीं करता दूसरा पूरा जाने बिना  ही छोड़ जाता है “

भले ही हमारा मीडिया में शेयर न हो हम अपना मीडिया खुद हैं | अगर हम में से हर कोई हमारे समाज के फायदे की बात अपने दस साथिओं जो की हमारे ही लोग हों को मौखिक बताये या SMS या ईमेल या अन्य साधनों से करें तो केवल ७ दिनों में हर बुद्धिस्ट भाई के पास  हमारा सन्देश पहुँच सकता है | इसी तरह हमारा विरोध की बात भी 9 वे दिन तक तो देश के हर आखिरी आदमी तक पहुँच जाएगी | नीचे लिखे टेबल को देखो, दोस्तों जहाँ चाह वह राह, भले ही हमारा मीडिया में शेयर न, हो हम अपना मीडिया खुद हैं :

1ST DAY =10
2ND DAY =100
3RD DAY =1,000
4TH DAY =10,000
5TH DAY =100,000
6TH DAY =1,000,000
7TH DAY =10,000,000
8TH DAY =100,000,000
9TH DAY =1,000,000,000
10TH DAY =1,210,193,422

बौध साहित्य बहुत विस्तृत है, अकेला कोई उतना नहीं कर सकता जितना की हम सब मिल कर कर सकते हैं| आओ हम मिलकर अपने दुखों से छुटकारा पा लें|आओ समयबुद्धा मिशन को तन मन धन से समर्थन कर के अपने समाज को शशक्त  करें| ध्यान रहे कमजोर का कोई नहीं होता|

 ट्रस्ट के अन्य कार्य और उद्देश्य इस प्रकास से हैं :

 – केवल सर्व शक्तिमान,सर्व समर्थ,सर्व व्याप्त ‘समय’ को ही प्रमाणित इश्वरिये शक्ति के रूप में स्वीकार करना

-इस समय चक्र के मर्ग्दाता भगवान् बुद्ध के ही मार्ग का अनुशरण करना या पर चलना

 -अपने अपने पेशा के व्यवहार की स्वतंत्रता को बढ़ावा देना व धर्म का प्रचार प्रसार करना

 -गरीब और पिछड़े वर्गों के प्रतिभावान व्यक्तिओं की प्रतिभा को पहचानना और उसको उभारना व बढ़ावा देना -धर्मनिरपेक्षवाद को उभारना व बढ़ावा देना

  -सर्वव्यापी शांति,तालमेल और सुरक्षा को उभारना व बढ़ावा देना -आर्ट, लिटरेचर, विज्ञानं और वाणिज्य को समाज व देश हित में प्रचार, प्रसार व बढ़ावा देना

 -गरीब पिछड़े और जरूरतमंदों की सहायता हेतु गरम कपडे, कम्बल, और एनी प्रकार के कपडे जुटाना व उन्हें बांटना -गरीब पिछड़े और जरूरतमंदों की सहायता हेतु शिक्षण संस्थान जैसे कालेज,स्कूल,पुस्तकालय,निशुल्क ज्ञान केंद्र, के लिए आर्थिक मदत,साजसामान जुटाना और इन्हें स्थापित करना व चलाना

 -गरीब पिछड़े और जरूरतमंदों की सहायता हेतु समस्त प्रकार से मेडिकल सहायता जैसे व्यायामशाला,हॉस्पिटल, नुर्सिंग होम,मेटरनिटी होम ,के लिए आर्थिक मदत,साजसामान जुटाना और इन्हें स्थापित करना

  -गरीब पिछड़े और जरूरतमंदों की सहायता हेतु धर्मशाला,सामुदायिक केंद्र, एव प्रेरणा स्थल के लिए आर्थिक मदत,साजसामान जुटाना और इन्हें स्थापित करना व चलाना -गरीब पिछड़े और जरूरतमंदों की सहायता हेतु स्वरोजगार व उसके लिए ट्रेनिंग आर्थिक मदत,साजसामान जुटाना और इन्हें आत्मनिर्भर करना

 -प्रकृति और पर्यावरण की हर संभव रक्षा करना खासकर पेड़ लगाना और उसके रक्षा करना -प्राकतिक आपदा में सरकारी तंत्र के साथ मिलकर हर क्षतिग्रस्थों की हर संभव मदत करना

 -मूल भारत की संस्कृति और परम्पराओं को उभारना व बढ़ावा देना|

 नमो बुद्धाय, जय भीम,नमो समयबुद्धा

407446_176888712418801_100002930216237_299204_931459586_nविरोधी मीडिया बौद्ध धम्म और गौतम बुद्ध के नाम पर बहुजन जनता को जुल्म सहने की शिक्षा दे रहा है, चुप रहने की शिक्षा दे रहा है,इनके झासें में न आना|आज का धम्म वो धम्म नहीं जो सिर्फ सहते जाना सिखाये, आज का धम्म अम्बेडकरवादी बौद्ध धम्म है जो सिखाता है की शिक्षा,संगठन और संगर्ष से अपने हक़ छीन लो|समयबुद्ध मिशन जिस धम्म की देशना और प्रचार करता है उस धम्म में पुराने धम्म का सबकुछ है सिर्फ वो हिस्सा नहीं जो कमजोर बनाये, जुल्म सहना सिखाये| हमारा धम्म वो धम्म नहीं जो सिर्फ अच्छी बाते करने तक ही सीमित रहे, हमारा धम्म वो धम्म है जिसने इस देश में क्रांति की थी और वर्ण व्यस्था को जड़ से उखाड़ फेका था और अब भी हमारा धम्म उसे क्रांति के लिए है| ध्यान रहे धम्म में अगर ऐसा कुछ भी मिले जो आपको कमजोर बनाये तो समझ लेना वो मिलावट है| कमजोर बनना किसी बात का समाधान नहीं, कमजोर का कोई नहीं उसकी खुद की औलाद उसकी नहीं, वो भी उसी को पूजती है जिसने उसके पूर्वजों को हराया| हमारा धम्म विजेता बनाने वाला धम्म है….समयबुद्ध

 

हर पूर्णिमा को समयबुद्धा की धम्म देशना https://samaybuddha.wordpress.com/वेबसाइट पर प्रकाशित होती है, इस साल की पूर्णिमा की तारीखें इस प्रकार हैं: पिछले सालों की धम्म देशना इसी वेबसाइट पर उपलब्ध है

05 January (Monday) Paush Purnima
03 February (Tuesday) Magha Purnima
05 March (Thursday) Phalguna Purnima
04 April (Saturday) Chaitra Purnima
04 May (Monday) Vaishakha Purnima
02 June (Tuesday) Jyeshtha Purnima
02 July (Thursday) Ashadha Purnima
31 July (Friday) Ashadha Purnima
29 August (Saturday) Shravana Purnima
28 September (Monday) Bhadrapada Purnima
27 October (Tuesday) Ashwin Purnima
25 November (Wednesday) Kartik Purnima
25 December (Friday) Margashirsha Purnima

11 thoughts on “B: समयबुद्ध मिशन-उद्देश्य और लक्ष्य

  1. kiya app ke pas question answer[Simple wording mein] Buddha ki jivani hai.Mein likh raha hun.Agar hai to E-mail karin.Mera samay bach jayayga.Logon ko Budhh ke Jivan and sandesh ki ABC Nahin ati,voh Brahmin Dharam ko manatay hain kiun ki vohi unke Dimagh mein Bhara gaya hai.Jaisey Babasahib Ke baray mein logon ko kuchh pata nahin hai.iske liyay bhi mein Test banay hai jisey mein pichhlay 3 salon se chala raha hun. achha effect hai iska.Neha, Meenakshi, Renuka emerge winners in Quiz competition
    Excelsior Correspondent
    JAMMU, Dec 20: Dr Baba Sahib BR Ambedkar Young Blood Welfare Society, Ranjit Pura, Gole Gujral organized a Quiz competition on the life and mission of Dr Ambedkar, in which students of Sarasvati Vidyalaya High School, Badheri, Samba participated.
    In the competition, Neha Devi of class 9th stood first while Meenakshi Attri of class 8th and Renuka Singh both from class 8th bagged second and third positions respectively.
    A paper reading competition was also held, in which Ghasiv Attri of class 6th, Asha Attri of class 9th and Nitti Angral of class 10th clinched first, second and third positions respectively.
    On the prize distribution ceremony, TR Azad, who was the chief guest distributed prizes among the winners in presence of Romesh Chander, Sarpanch.
    Among others present were Rattan Lal Bangotra, district officer, Agriculture Department, Suman Sambyal, Principal, Sarasvati Vidyalaya High School, Tarsem Kumar Attri, Managing Director Dhian Chand Thappa, Dr Baru Ram, etc.
    The stage affairs were managed by Ghasiv Attri.

  2. adarniy samaybuddh ji,
    jai bhim namo buddhay!
    hame apk vichar bahut hi achhe lage padhkar man khush ho gaya.
    ham apk sath hain hame bataiye k hame ab kya karna h

    • shikshit bano, sangthith raho aur sangarsh karo ye baba sahab ka mool mantra par kaam jari rakhna hai. Baudh dhamm par SAMAYBUDDHA ke vicharon ka prachar prasar karo

      समयबुद्धा मिशन बहुजन समाज को अम्बेडकर और बुद्ध मार्ग द्वारा खुशहाल बनाने के लिए समर्पित है| बुद्धा और आंबेडकर के विचारों का प्रचार प्रसार करने के लिए ही समयबुद्धा वेबसाईट समर्पित है| शिक्षित और सक्षम वर्ग ही बदलाव लाता है पर ऐसा देखा गया है की समय का आभाव या अन्य कारणों से यही वर्ग बौद्ध और अम्बेडकरवादी विचारधारा और साहित्य पर ध्यान नहीं दे पाता। शिक्षित और सक्षम वर्ग इन्टरनेट खूब इस्तेमाल करता है, इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए इस वेबसाईट को चलाया जा रहा है। ये वेबसाईट ऐसा प्लेटफार्म प्रदान करती है जहाँ अम्बेडकर और बुद्ध विचारधारा को हमारे लोग आपस में शेयर कर सकते हैं इस वेबसाईट पर अनेकों पुस्तकें और लेख फ्री में उपलब्ध हैं, आप स्वेव भी लेख लिख सकते हैं|.इस वेबसाइट पर उपलब्ध फ्री किताबों का अध्ययन करें |आप खुद यहाँ इस वेबसाइट पर उपलब्ध बौद्ध धम्म की जानकारी पढ़ें और अपना ज्ञान बढ़ाएं, बौद्ध धम्म ज्ञान को अपने जीवन में उतारें| भगवान् बुद्ध द्वारा बताये गए मार्ग और शिक्षा को हिंदी में जानने के लिए,बौद्ध विचारक एव दार्शनिक ‘समयबुद्धा’ के धम्म प्रवचनों के लिए , बौद्ध धम्म पर अपने विचार और लेख लिखने के लिए व् अनेकों बौद्ध धम्म और अम्बेडकरवाद की पुस्तकों को मुफ्त में पाने के लिए आप इस वेबसाइट को अपनी ईमेल से ज्वाइन करें, अपने सभी साथियों को ज्वाइन करवाएं| तरीका इस प्रकार है:

      https://samaybuddha.wordpress.com पर जाकर बाएँ तरफ दिए Follow Blog via Email में अपनी ईमेल डाल कर फोल्लो पर क्लिक करें, इसके बाद आपको एक CONFIRMATION का बटन बनी हुए मेल आएगी निवेदन है की उसे क्लिक कर के कनफिरम करें इसके बाद आपको हर हफ्ते बौध धर्म की जानकारी भरी एक मेल आयेगी| ये ठीक ऐसे है जैसे कोई साप्ताहिक हिंदी बौद्ध पत्रिका हो और वो भी फ्री में, पसंद न आने पर अनसब्सक्राइब भी कर सकते हैं|

      भले ही हमारा मीडिया में शेयर न हो हमें अपना मीडिया खुद बनना है। आप बौद्ध धम्म के प्रचार प्रसार में मदत करें, आप केवल अपने १० बहुजन साथियों की जिम्मेदारी ले|अगर हम में से हर कोई हमारे समाज के फायदे की बात अपने दस साथिओं जो की हमारे ही लोग हों को मौखिक बताये या SMS या ईमेल या अन्य साधनों से करें तो केवल 7 दिनों में हर बुद्धिस्ट भाई के पास हमारा सन्देश पहुँच सकता है | इसी तरह हमारा विरोध की बात भी 9 वे दिन तक तो देश के हर आखिरी आदमी तक पहुँच जाएगी | नीचे लिखे टेबल को देखो, दोस्तों जहाँ चाह वह राह, भले ही हमारा मीडिया में शेयर न, हो हम अपना मीडिया खुद हैं :

      1ST DAY =10

      2ND DAY =100

      3RD DAY =1,000

      4TH DAY =10,000

      5TH DAY =100,000

      6TH DAY =1,000,000

      7TH DAY =10,000,000

      8TH DAY =100,000,000

      9TH DAY =1,000,000,000

      10TH DAY =1,210,193,422

      अगर आपको कोई लेख ऐसा लगता है जिसका आप प्रचार करना चाहते हैं तो उसे कॉपी कर के प्रिंट और फोटो कॉपी कर के अपने लोगों में बाँट भी सकते हैं, क्योंकि इन्टरनेट का इस्तेमाल हर कोई तो नहीं करता | कई लोग जो नौकरी करते हैं उनको प्रिंट और फोटो कॉपी की सुविधा मुफ्त में उपलब्ध होती है|बिना अपना धन खर्च किये भी आप इस तरह धम्म प्रचार कर सकते हो| ज्यादा नहीं बस दस शिक्षित युवा लोगो को चुन लो और उनतक सन्देश पहुचने की जिम्मेदारी ले लो|

      बौद्ध साहित्य बहुत विस्तृत है, केवल बौद्ध भंते और बौद्ध लीडर उतना नहीं कर सकते जितना की हम सब मिल कर कर सकते हैं| अगर आपके पास भी बौद्ध धम्म की जानकारी है और आप बौद्ध धम्म पर लिखते हो तो आपसे अनुरोध है की आप बौद्ध धर्म पर अपने आर्टिकल हिंदी में jileraj@gmail.com पर भेजे जिसे हम आपके नाम और फोटो सहित या जैसा आप चाहें यहाँ पब्लिश करेंगे| आईये किताबों में दबे बौध धम्म के कल्याणकारी ज्ञान को मिल जुल कर जन साधारण के लिए उपलब्ध कराएँ |

      भगवान् बुद्धा ने कहा है “सत्य जानने के मार्ग में इंसान बस दो ही गलती करता है ,एक वो शुरू ही नहीं करता दूसरा पूरा जाने बिना ही छोड़ जाता है “

  3. BAHUT HI ACHI JANKARIAYA HAI JO HAME NHI MALUM ES SITE SE HAME HAMARE DHHAMMA DHARM KE BARE ME JANKARI MILEGI AOR BHI BAHUT SARI JANKARI HAI ,
    AAP SABHI KO THANKX

  4. जय भिम , नमो बुद्धाय, आपका जाग्रृता मिशन सही है , मै धम्म और बाबा की विरासतकी देन से यह लिख पाता हुं , और भी बहुजनो का परिचय पोस्ट करेंगे तो अच्छा लगेगा .

  5. बुद्ध ने जो ज्ञान और धम्म हमें दिया है वो केवल भारत ही नहीं अपितु पूरी दुनियाँ में एक उच्य आदर्श प्राप्त कर चूका है। मित्रो दुनियॉ उस दौर से गुजर रही है जहाँ हर तरह की अनैतिकहिंता दिखाई देती है। हमारा देश भी आज अछूता नहीं तभी बुद्ध ने अपना ज्ञान चार दिशाओ में भेजा था और सम्राठ अशोक और तत्पच्यात डा. बाबासाहेब भीमराव जी आम्बेडकर साहेब ने इसको समाज के हित को ध्यान में रखकर इसे अमल में लाया और प्रचार ही नहीं अपनाया भी। आज मै भी इस लायक हूँ केवल और केवल बाबा के वजह से जिन्होंने बुद्ध मार्ग दिखाया।
    डरे नहीं एक ही जन्म मिलता है सत्य की राह पर आगे बढ़ने को बुद्ध पुरुष पैदा नहीं बनते है यहाँ ~~~
    कितने गौरव की बात है देश के प्रधानमंत्री जब USA के दौरे पर थे तो खुद को बुद्ध और डॉ.आम्बेडकर के देश का नागगरिक प्रमुख बता रहे थे क्यू करोडो देवी देवता याद नहीं आये।
    क्यू की ये वो धरती थी जहाँ सत्य को आज ज्यादा बल दिया जाता है जुठे भाषण कोई नहीं सुनता वहा। हमें हमारा देश भी पुनः वैसा ही सच्चा और आदर्श बनाना है जैसा बुद्ध चाहते थे।
    जय भीम जय भारत
    प्रा. जयंत रामटेके

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