O: तब तुम्हारा ईश्वर कहाँ था?

shoodraआज संविधान और आंबेडकर मिशन के चलते दलित लोग जब थोडा सक्षम हो गए तब बजाये आंबेडकर मिशन को मजबूत करने के ये लोग मन्दिरबाजी और पुरोहित पालन कर रहे हैं| ये वो दिन भूल गए जब इनको मंदिर में गुसने और पुरोहित को चूने पर मार मार कर मार डाला जाता था| अरे अगर अम्बेडकरमीशन का साथ नहीं दे सकते तो कम से कम अपने शोषक को पालना तो बंद करो वर्ना वही स्तिथि दोबारा आ जायेगी| वह रे अहसान फरामोश कौम…..

देखिये श्री जे के मौर्या जी का ये बेतरीन लेख:

1. जब तुमको गाँव से बाहर बस्ती बनाकर रहने के लिए मजबूर किया गया था । तब 5000 साल तक आपका ईश्वर कहाँ था ?

2. जब आपको 5000 साल तक शिक्षा से वंचित रखा गया तब आपका ईश्वर कहाँ था ?

3. जब 5000 साल तक आपको संपत्ति रखने का अधिकार नहीं था तब आपका ईश्वर कहाँ था ?…

4. जब आपको गले में हांड़ी लटकाकर चलने के लिए मजबूर किया गया तब पाँच हजार साल तक आपका ईश्वर कहाँ सोया हुआ था ?

5. जब पाँच हजार साल तक आपको पीछे झाड़ू बाँधकर चलने के लिए मजबूर किया गया तब आपका ईश्वर कहाँ था ?

6. जब आपके प्राणों का मूल्य कुत्ते, बिल्ली, मेंढक के प्राणों के बराबर समझा जाता था तब पाँच हजार साल तक आपका ईश्वर कहाँ था ?

7. जब आपको सुबह शाम चलने पर प्रतिबन्ध था सिर्फ दोपहर को कोई थाली वगैरह बजाते हुए चलने दिया जाता था तब आपका ईश्वर कहाँ था ?

8. जिस पानी में कुत्ते बिल्ली मल मूत्र विसर्जित करते रहते थे उसी पानी को आपको पीने नहीं दिया जाता था । तब आपका ईश्वर कहाँ था ?

9. जब आपकी बहू बेटियों को किसी जानवर की तरह कोई भी ले जा सकता था तब आपका ईश्वर कहाँ था ?

10. जब आपको सिर्फ काम कराने के लिए बंधुआ मजदूर की तरह प्रयोग किया जाता था तब आपका ईश्वर कहाँ था ?

11. जब आपको मंदिर में नहीं घुसने दिया जाता था तब आपका ईश्वर कहाँ था ?

12. जब आपको धर्म कर्म से वंचित रखा गया था तब आपका ईश्वर कहाँ था ?

13. जब आपके छूने से ही ये लोग अपवित्र हो जाते थे तब आपका ईश्वर कहाँ था ?

14. जब कोई तुम्हारी बीमारी का इलाज तुम्हारी जाति की वजह से करने से इंकार कर देता था और तुम इलाज के आभाव में तड़प तड़पकर दम तोड़ देते थे तब आपका ईश्वर कहाँ था ?

15. जब पानी के अभाव में तुम प्यासे ही तड़प तड़पकर दम तोड़ देते थे तब तुम्हारा ईश्वर कहाँ था ?

आज जब भारतीय संविधान के वजह से जब आपको इन सबसे मुक्ति मिल गयी और अधिकार मिल गए तो तुम्हारे करोडो ईश्वर पैदा हो गए ?

jk maurya

Shri J K MAURYA

http://ibnlive.in.com/news/orissa-dalit-mp-denied-entry-in-temple/162457-37-64.html

 

 

 

एक परिवार के बैठकखाने में दो मछलियां काच के बर्तन में चक्कर मार रही थीं। एक मछली ने रुककर दूसरी से पूछा, तुम्हारा क्या खयाल है, ईश्वर है या नहीं? दूसरी मछली थोड़ी दार्शनिक प्रकृति की थी। उसने थोड़ा विचार किया। उसने कहा, होना ही चाहिए, अन्यथा हमारा पानी रोज कौन बदलता है! अगर परमात्मा न हो, तो इस बर्तन का पानी कौन बदलता है रोज!
मछलियों के लिए यह बहुत भारी घटना है कि कोई पानी बदलता है।
तुम्हारा परमात्मा भी इन मछलियों के परमात्मा से ज्यादा नहीं है। क्योंकि तुम सोच नहीं सकते कि बिना बनाए चीजें कैसे बनायी जाएंगी! लेकिन तुम्हारे बचपन में तुमने जो धारणा पकड़ी थी, कभी तुमने पूछा कि परमात्मा को किसने बनाया है?
तब तुम्हारी धारणा डगमगाने लगेगी। तब तुम्हें संदेह उठेगा। तब तुम्हें लगेगा कि अगर परमात्मा बिना बनाया हो सकता है, तो फिर यह धारणा कुम्हार की और बढ़ई की, नासमझी की है।
लेकिन बचपन की धारणाए तुम्हें घेरे रखती हैं। नास्तिकता— आस्तिकता, हिंदू —इस्लाम, जैन—बौद्ध, सब बचपन में पकड़ी गई धारणाएं हैं। उनसे तुम घिरे बैठे हों। उनकी दीवारें तुम्हारे चारों तरफ हैं। वह तुम्हारा कारागृह है।
जब तुम सुनने आते हो, तो उस कारागृह के बाहर आकर सुनो, खुले आकाश के नीचे |
-ओशो
गीता दर्शन

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हो सकता है की ईश्वर हो, पर एक बात निश्चित है की मंदिर मस्जिद गिरजा में कैद होकर वहां के पुजारियों के हिसाब से जीने वाला नहीं हैं|ये देवता(विजेता) हो सकते हैं ईश्वर नहीं
हम मानते हैं की अगर ईश्वर और बन्दे में डायरेक्ट कनेक्शन हो तो बीच से ये धर्म, पूजास्थल, दिखावा वगेरा निकल कर फेक दो तो ‘ईश्वर आईडिया’ से
आपका कोई बुरा नहीं होगा उल्टा मानसिक रूप से सहारा और शक्ति मिल सकती है| हमारी लड़ाई ईश्वर से नहीं बल्कि ईश्वरवाद के नाम पर शोषण से है|
ध्यान रहे की अति किसी भी चीज़ की बुरी होती है ईश्वर भक्ति की अति भी बुरी होती है, इतिहास में ऐसे उदाहरण मिलते हैं की भक्ति में अंधे लोगों ने अपने बच्चों को पत्थरों पर कुर्बान किया है | और ईश्वर को नकारने की अति भी नुकसानदायक हो सकती है क्यों की वो आपको क्रन्तिकारी बना देता है और ईश्वरवादी लोग क्रन्तिकारी को पसंद नहीं करते , अधिक जानकारी के लिए शहीद भगत सिंह जी का लेख “मैं नास्तिक क्यों हूँ” पढ़ें https://samaybuddha.wordpress.com/2013/09/26/main-nastik-kyon-hoon-by-amar-shaheed-bhagat-singh/

इसीलिए बौद्ध धम्म में हम “मध्यम मार्ग” को मानते हैं,दोनों तरफ की अति से बचो बुद्धि का इस्तेमाल करो | हम जानते हैं की किसी भी झूठ को बार बार सदियों तक रटा जाए तो वो सच जैसी लगने लगती है …समयबुद्धा

27 thoughts on “O: तब तुम्हारा ईश्वर कहाँ था?

  1. मौर्या जी
    आप को कब लगा या पता चला की इश्वर नहीं है

    • अतुल कुमार सिंह

      ईश्वर नहीं है ये बात मानवता उस दिन से जानती है जिस दिन से वो अस्तित्व में हैं ईश्वर है ये बात उसने तब बनायीं जब उसने सोचना शुरू किया| एक बार को मान लें की आपकी बात सही है ईश्वर है, तो कृपया आप बताईये की आपका ईश्वर अत्याचार होते हुए क्यों देखता रहता है रोकता क्यों नहीं? अगर आपका ईश्वर कुछ नहीं कर sakta मानवता के दुःख दूर करने को तो वो क्यों है किसलिए है| आप कैसे कह सकते हैं की ईश्वर और धर्म राज करने के औज़ार नहीं हैं?

      • मानवता नहीं आप जानते होंगे क्योकि मानवता सभी में है और हम मानते है ईश्वर है,और सबसे बड़ी बात ये है की तुम मुर्ख हो,और तुमको ईश्वर के बारे में क्या प्रमाण दूँ तुम तो मुर्ख ही हो वैसे, जितनी चतुराई से अतुल का जबाब दिया इतनी चतुराई किसी काम में लगते तो सफलता भी मिल जाती, बुरे कर्म का बुरा नतीजा , न मनो तो करके देखो और जिन लोगो ने बुरा किया है उनके जाकर घर देखो,

      • हो सकता है की ईश्वर हो, पर एक बात निश्चित है की मंदिर मस्जिद गिरजा में कैद होकर वहां के पुजारियों के हिसाब से जीने वाला नहीं हैं|ये देवता(विजेता) हो सकते हैं ईश्वर नहीं
        हम मानते हैं की अगर ईश्वर और बन्दे में डायरेक्ट कनेक्शन हो तो बीच से ये धर्म, पूजास्थल, दिखावा वगेरा निकल कर फेक दो तो ‘ईश्वर आईडिया’ से
        आपका कोई बुरा नहीं होगा उल्टा मानसिक रूप से सहारा और शक्ति मिल सकती है| हमारी लड़ाई ईश्वर से नहीं बल्कि ईश्वरवाद के नाम पर शोषण से है|
        ध्यान रहे की अति किसी भी चीज़ की बुरी होती है ईश्वर भक्ति की अति भी बुरी होती है, इतिहास में ऐसे उदाहरण मिलते हैं की भक्ति में अंधे लोगों ने अपने बच्चों को पत्थरों पर कुर्बान किया है | और ईश्वर को नकारने की अति भी नुकसानदायक हो सकती है क्यों की वो आपको क्रन्तिकारी बना देता है और ईश्वरवादी लोग क्रन्तिकारी को पसंद नहीं करते , अधिक जानकारी के लिए शहीद भगत सिंह जी का लेख “मैं नास्तिक क्यों हूँ” पढ़ें https://samaybuddha.wordpress.com/2013/09/26/main-nastik-kyon-hoon-by-amar-shaheed-bhagat-singh/

        इसीलिए बौद्ध धम्म में हम “मध्यम मार्ग” को मानते हैं,दोनों तरफ की अति से बचो बुद्धि का इस्तेमाल करो | हम जानते हैं की किसी भी झूठ को बार बार सदियों तक रटा जाए तो वो सच जैसी लगने लगती है …समयबुद्धा

    • Bhagvaan hote hi nahi , banaye jaate he,,😊😊
      Kyo ki wo agar hamare bhagvaan hote to samanat , bandhoota , ajhaadi dete aryo ki caste system ko bandh kar vaate

  2. ईश्वर को मनुष्य ने अपनी थोथि कल्पना के माध्यम से पैदा किया है जिसका कोई अस्तित्व नही है अपितू वह एक व्यावसाय का माध्यम अवश्य बन गया है कम लागत अधिक मुनाफा .

  3. मुझे तरस आता है उन लोगो पर जो ईश्वर को नहीं मानते, दुःख देख लिया और मूंह फाड़ दिया की ईश्वर नहीं है, अबे जो गलत करम करेगा तो गलत ही होगा उसके साथ, तुमने यह नहीं देखा की 5000 साल पहले पाप कितना था तो पाप करोगे तो भाई भरोगे भी. तुम नौ महीने तक पेट में जिंदा कैसे रहे और तुम्हारी माताजी के शरीर में दूध कैसे बनने लगा. थोडा सोचो फिर बोलो.

    • Ho sakta hai Iswar ho …par ye bilkul sahi baat hai ki wo mandir msjir ya church me nahin hai…..wahan jo ishwar hai wo waisa hi hai jaisa usko bnane wale hain….thoda dimag lagao…ye brahmanvadi brainwash ke baton ke aage badho aur thoda apne dimag ka bhi istemaal karo….yahan jo bhi tumne kaha wo saditon se tumko rataya gaya hai…..Apni Buddhi lagao khud jaan jao

    • अनुसूचित जाति / जनजाति के वो सभी लोग जो
      देवी देवताओं
      को पूजते हैं, ध्यान दें और जवाब दें ।
      1👉. एक भी ऐसे अछूत व्यक्ति का नाम बताएं
      जिसका भला किसी देवी देवता अथवा भगवान ने
      किया हो ?
      👉संविधान लागू होने से पहले किसी एक
      व्यक्ति को नौकरी दिलवाने वाले किसी देवता
      का नाम बताये ?
      👉किसी भी ऐसे देवता का नाम बताएं जिसने जाति
      व्यवस्था के
      खिलाफ संघर्ष किया हो ?
      👉किसी भी ऐसे देवता का नाम बताये जिसने जाति
      के कारण
      अपमानित होते हुए किसी अछूत कहे जाने वाले
      व्यक्ति को अपमानित होने से बचाया हो ?
      👉किसी भी ऐसे देवता का नाम बताएं जिसने प्यास
      से मरते हुए
      किसी अछूत को पानी पिलाया हो ?
      किसी भी ऐसे देवता का नाम बताये जो किसी
      अछूत के घर
      पैदा हुआ हो ?
      👉किसी भी ऐसे देवता का नाम बताएं जिसने
      द्विजों से
      कहा हो कि अछूतों से इंसानों के समान व्यवहार
      करो । बदले में मैं
      ऐसे द्विजों को अपने परम धाम में जगह दूँगा ?
      👉किसी भी ऐसे देवता का नाम बताओ जिसने कहा
      हो कि जातीय
      भेदभाव करने वाले व्यक्तियों को नर्क की भट्टी में
      जलाया जायेगा या उसके पकौड़े तले जायेंगे या
      उसको कीलों के
      बिस्तर पर सुलाया जायेगा ?
      👉किसी भी ऐसे देवता का नाम बताओ जिसने कहा
      हो कि अगर कोई
      किसी अछूत कहे जाने वाले इन्सान के स्पर्श अथवा
      परछाई से
      अपवित्र होने की बात कहता है तो मैं उसको
      दण्डित करूँगा ?
      👉किसी भी एक ऐसे देवता का नाम बताइए जिसने
      किसी मरे हुए
      ढोर का मांस खाते हुए किसी अछूत से कहा हो
      कि तुम इन्सान
      हो । तुमको ये सब खाने की आवश्यकता नही है ।
      आओ मैं
      तुमको गाँव में ले जाकर भोजन करवाता हूँ ?
      👉किसी भी ऐसे देवता का नाम बताइए जिसने गाँव
      के बाहर
      बस्ती बनाकर रहने वाले किसी अछूत से कहा हो
      कि तुम
      भी बाकि सभी आदमियों की तरह हो आओ मैं
      आपको गाँव में रहने
      के लिए स्थान दिलवाऊंगा ?
      👉आप कोशिश करिए,आपको इनमे से किसी भी
      सवाल का जवाब
      नही मिलेगा
      👉क्योंकि पहली बात तो ये सब
      काल्पनिक हैं ।
      काल्पनिक होने के नाते ये कुछ भी नही कर सकvते हैं
      । जिनका ये
      भला करते हैं, उन्होंने इनकी रचना की है ।
      👉 अपनी
      बुद्धि लगाओ
      और विचार करो ।
      संस्कृत से PHD. किया हुआ एक दलित मंदिर में
      पूजा नहीं करा सकता,
      👉लेकिन पांचवी जमात फेल एक ब्राह्मण को सभी
      अधिकार हैं,
      जो 5000 हजार सालों से चला आ रहा है , ये
      👉कैसा आरक्षण है…
      अपने इस धंधे में किसी गैर जाति को प्रवेश नहीं
      करने दिया,ये कैसा आरक्षण है….?
      👉भारत के मंदिरों में अथाह धन जमा है,
      जो सिर्फ और सिर्फ ब्राह्मणों के एकाधिकार में
      है और धर्म के नाम पर ब्राह्मण अपने अय्याशी के
      लिए प्रयोग करता है..
      👉इस धन से दलित और गरीब की मदद किया जा
      सकता है किन्तु नहीं
      दलित आज भी दलित ही रह गया..
      👉एक बात और बताना चाहूँगा कि यह धन किसी
      और का नहीं ये धन हमारे पूर्वजों का है जिसे इन
      ब्राह्मणों ने
      छल और कपट से हमसे छीन लिया..
      👉 आज से हम सब को यह प्रण लेना होगा कि हम ना
      तो मंदिर जायेगे और ना ही कोई दान मंदिर में
      करेंगे…
      👉इन मंदिरों ने हमें कुछ नहीं दिया,
      देने वाले तो हमारे “बाबा साहब डाॅ○ भीम
      राव अंबेडकर जी” हैं जिन्होंने हमें शिक्षा और
      समानता का अधिकार दिलवाया.
      👉इस मैसेज को हर दलित भाईयों तक पहुंचाया
      जाये, जिससे हमारा समाज अंजान है
      और ब्राह्मणों (लुटेरे, धुतॆ, कामचोर, नीच, अय्याश)
      के छल कपट नीति को जान सके.
      🌹🌹JAY BHIM 🌹🌹

    • Bhai Lucky mere ko taras tum par aur un brahamano par aata hai jo dhongi aur pakhandi logo par aata hai, chalo aap ki bat maan lee ki ishwar hai, Rajshtahn ki Hingonia Gaushala me i mahine me 1000 gaye bhookh pyas se tadaf tadaf kar mar gayi na to 33 crore devi dewta aaye aur na hi unka dahi aur makhan kahne wala Krishan aaya. Maa ke shareer me doodh aayna natural hai lekin jis ko maa kehte jis ka doodh amrit mante to ishwar ko usko bachane ke liye bhi kuchh karna chahiye tha ki veh bhookh aur payas se na mre. Agar ishwar hota to Bhhokh paysas se gaye na marti, Maa ke pet me kanya bharun ki hatya na hoti, Paida hote hi kanhyao ki htya na hoti, kanyao ko education ka right hota, property me unki hissedari hoti, samaj me brabar ka adhikar hota. Ye sab kis ne diye maaloom hai, Ye aap ke kalpnik ishwar ne nhi balik Mahatam Phulle aur Jayotibaa Phulle jee ne 1948 me ladkiyon ko sare adhikar diye aur insko kanooni roop Baba Saheb jee ne diya. Kehne ko to Laxmi, lekin pita ki property me adhikar nhi, kehne ko to saraswati sheeksha ka adhikar nhi, kehne ko to Kali shashter uthne ka adhikar nhi kehne ko mata lekin Inder devta jaise papi Brahma ki putri Aahilya ka balatkar kar dete hai kya hai ye sab Sachai par aayo Pakhand wad ko bhago.

    • very good mauraya ji hamko aap ka ye line pasnd aye. (hamre kanoon na en logo ko ajad kya ha ya apni okat bhul gye ha.)

  4. Babashaheb me kaha uska jaroor palan karenge
    me na to gauri ganpati ya sakar me astha rakhunga aur nahi unki pooja karooonga,
    me ram, laksman ne ko manu ga aur nahi unki ppooja karunga ,,
    💪💪💪💪

  5. आप सभी के विचारों से सहमत हूँ, पर मुझे यह बताऐ कि, जिव और सृष्टि नाप तोल कौन कर रहा है ? जय हिंद

    • ये बहुत ही ज्यादा गहरी बातें हैं , समझने के लिए आस्था की पट्टी निकल के देखना पड़ेगा| अगर आपको इंट्रेस्ट हो तो बौद्ध धम्म को जानने की कोशिश करो , थोड़ा समय लगेगा पर अगर कोशिश करेंगे तो समझ पाएंगे

  6. गलत करने पर भगवान उससे दण्डित करते है उसकी रक्षा नहीं।

    • Ishwar nahin hai is baat ko samajhne ke liye IQ level kam se kam 110 se upar hona chahiye, Isse kam IQ wale log is baat ko nahin samajh sakte chahe unko kitne bhi TARK diye jaayen…Isilie BUDDHISM me is concept par bahut jyda charcha nahin karte, aapko maanna hai mano nahin manna mat mano, par PRAKRITI KE NIYAM sabpar ek se ho lgoo honge aur yahi BUDDHISM ki shiksha hai,,, Aap jise GOD kahte ho use hum PRAKRITI kahte hain, aur hum uski pooja nahin karte uske niyamon ko samajhne ki koshish karte hain taki apne jeevan me sudhar kar saken…

  7. Bhai sahab boudh dharm manne wale greeb nhi hai ?
    Ya woh log bimaar nhi hote h?
    Ya moorti pooja nhi krte h?
    Yeh boudh dharm bhi toh hindu dharm ki ek sakha hai.

    • Plz Correct you knowledge….

      1. Buddhist religion came into existence because in ancient times people fed up of Brahminical religion
      2. There was no such religion namely HINDUISM 2-3 centuries back, there was BRAHMINISM
      3. Brahminism and Buddhism Fight for survival is real history of INDIAN SUBCONTINENT
      4. Since when India adopted republic mode of guvernance and 1 man 1 VOTE, By then Brahminism starting hiding Behind Hinduism.

      Rest If you will reserch you will find the truth…Except Indian Bhakts whole world know these FACTS.

      One more thing try to find out meaning of word “HINDU”, and try to find out why muslim rulers used this word …

  8. Maurya Ji You are certainly right. Human ignorance and apathy have lead many vulnerable and poor people face unjust behaviour. In that era, Caste System was prevalent and in today’s era, people look at you through your account balance. If you are economically sound, people will praise you. No matter what Caste, creed or religion you come from! But a spiritual Seeker who is beyond this stage, for whom materialistic world isn’t important and whose heart knows only love and compassion actually gets above the Cumulative Network of Caste Creed Politics and Religion. For him all wordly Achievements are meaningless, hence either praise or abuse does not effect him anyway. Meanwhile if I would like to talk about God, then I would like to emphasize a critical point is that His Concept is Different among different Religions. That’s Why there are so many divisions! Abrahamic Religions have different concept of God, Hinduism itself is a Philosophy where one Spiritual Master Knows God Differently other in another way. But everybody comes to a point when he gets Enlightenment! God is neither a person nor any other Living entity..He neither thinks nor he intervenes…Even, You Roam around whole universe and You won’t find anybody like What has been told to you since your Childhood! But yes, God is there, everywhere not in the way you think! but in all pure and pious thoughts, actions..Those actions, thoughts are manifestation of God who fill you inside with love, compassion, virtues, forgiveness, tranquility, faith, truth, freedom from all fights and sorrows, energy, desire to change the world for good, freedom from lust, fearlessness, freedom from anguish, compassion for all living beings, compassion for nature, etc. See the Beauty of God, He Doesn’t work Himself but He has Created Humans when follow above thoughts and actions will be a blessing to everyone and they themselves experience bliss….So, it is wrong to believe that God will Come and feed poor, but yes, He has Created you and me who can work, who can act and surely the Rule Set up by God (Dharma) will bring us peace and liberation from Bondation. When we will Stop Identifying ourselves, Hindu Muslim Sikh Christian Buddhist..know that now you are into right path, you are living in equanimity with everyone! Ar last, I would like to clear that God is the Source of all Creation, but how to Find Him? His presence can be felt everywhere, wherever is Dharma, there is God. For there is an effect, there should be a cause! The effect is whole universe but the Cause is God. And That God works in Different ways to run this whole universe, in earth God acts as Prakriti, In Living Being God acts as Prana Shakti, in Soil, God acts as Fertility..So as in Enlightenment, God acta as Eternal Bliss..See, it’s so simple, Because of God everything functions but God Himself doesn’t function!:)

    • Kash aap sach jaan paate, par uske liye aapko apne aankhon se brahmanvaad ka chashma utar kar JUDGE ki kursi par baithna hoga aur fir ek taraf Baudhon ki aur doosri taraf Brahmanon ki vichardhara aur karmon ki sunna dekhna hoga aur fir nispaksh hokar faisla karna hoga….Kya aapme hai himmat ????

      Dhyan rahe ISHWAR pata nahin hai ki nahin par ye concept Vyaktigat ona chahiye sarvjanik nahin, jab bhi ISHWAR sarvjanik hota hai tab wo RAJNITI se jyada aur kuch nahin…..

      hum BUDDHIST mante hain ki Dharm aur Ishwar Vyaktigat mamla hai jo apne tak ya apne ghar ke ander hi simit rakhna chahiye,

      Jabki Kanoon aur Vyastha ek sarvjanik MAMLA hai

      Hum Baudh mante hain ki NYAYA se badhkar aur kuch bhi nahin ISHWAR bhi nahin

      OH MY GOD film dekhna ….

      Aisi soch jo ishwar ko bhi NYAY ke aade na aane de aur INSAAN ko nyay dena ishwar se bhi jaroori samjha jaaye ye soch kisi BAUDH ki hi ho sakti hai

      Kya aap ISHWAR se aage soch sakne ki koshish karneg ….agar nahin to aap Baudh dhamm tak kabhi pahuch hi nahin sakte

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