z SAMAYBUDDHA’s QUOTATIONs

मनुवादियों को बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर की मूर्तियों से खतरा कम, उनकी लिखी हुई किताबों से ज्यादा है।और हमारे लोगों को उनकी लिखी हुई किताबों से लगाव कम मूर्तियों से ज्यादा है..यही उनकी दुर्दशा/गुलामी का असली कारण है। पूजने से नहीं मानने से सुधार होगा इसलिए जानो पढ़ो समझो। तुम्हारे बहुत से ऐतिहासिक महापुरुष के संगर्ष और विचारधारा को ख़तम करके उनकी मूर्ती/देवता बना कर पूजा जा रहा है, इस पूजन से तुम्हारा नहीं पुजारियों का भला होता है…समयबुद्धा

 

बौद्ध धम्म की तरफ चल पड़े लोगों में एक बड़ी बहस छिड़ी है आस्तिक और नास्तिक पर, ध्यान रहे हम न नास्तिक हैं न आस्तिक हैं हम वास्तविक हैं। जो हमारा भला करे उसे हम अपनाते हैं जो हमारा बुरा करे उसे त्याग देते हैं , हम किसी धर्म परंपरा या देवी देवता के पिछलग्गू नहीं है, अपनी बुद्धि विवेक को बढ़ाना और इस्तेमाल करना ही हमारा लक्ष्ये है। बुद्ध का धम्म बाकि के धर्मों से अलग है, धम्म का मकसद आपके जीवन के दुखों को दूर करना है, न की आपको नास्तिक और नकारात्मक बनाना।…समयबुद्धा

 

मान्यवर चंद्रशेखर “रावण” की काफी बातें ठीक है पर चमारवाद फ़ैलाने से जाने अनजाने वो ब्राह्मणवाद का ही काम करेंगे,जाती तो ब्राह्मणवादी वर्चस्व बनाये रखने का एक षडियंत्र है। डॉ आंबेडकर ने हमें जाती तोड़कर बौद्ध धम्म के विकास में लगाया था , धरम या धम्म से आप ब्राह्मणवाद के बराबर हो जाते हो जबकि जाती से आप ब्राह्मण से कई गुना नीचे पहुंच जाते हो। २२ प्रतिज्ञा द्वारा बौद्ध धम्म और राजनैतिक संगर्ष ही हमारा कल्याण कर सकता है। डॉ आंबेडकर ने ऐसा कहीं किसी किताब में नहीं लिखा की जाती न मिटा सको तो जाती पर गर्व करो, ये गलत बात है। जब अम्बेडकरवाद को चुन लिया गया है तो ये बिखराव क्यों, सबको एक राये एक मत होना होगा ये बिखराव हमे संगठित नहीं होने देगा।…समयबुद्धा

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